Gold पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: अगले 5 वर्षों में Central Bank बढ़ाएंगे सोना भंडार, Dollar की हिस्सेदारी घटने के संकेत

खबर सार :-
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का ताजा सर्वे बताता है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक केंद्रीय बैंक सोने पर अपना भरोसा और बढ़ाने वाले हैं। रिजर्व में गोल्ड की बढ़ती हिस्सेदारी और डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में धीरे-धीरे बदलाव का संकेत है। आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित संपत्ति बनकर उभर रहा है।
Gold पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: अगले 5 वर्षों में Central Bank बढ़ाएंगे सोना भंडार, Dollar की हिस्सेदारी घटने के संकेत
खबर विस्तार : -

Central Bank Gold Survey 2026: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बीच दुनिया के केंद्रीय बैंक अब सोने को पहले से अधिक सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। यही वजह है कि आने वाले पांच वर्षों में अधिकांश केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी घटने की संभावना भी जताई गई है। यह जानकारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) द्वारा जारी किए गए सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे 2026 में सामने आई है।

84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों को सोने की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद

सर्वेक्षण के अनुसार, 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में उनके कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ेगी। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 76 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर सोने को लेकर केंद्रीय बैंकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। डब्ल्यूजीसी के अनुसार, केंद्रीय बैंक अब अपने रिजर्व पोर्टफोलियो को अधिक संतुलित और सुरक्षित बनाने के लिए सोने की भूमिका को बढ़ा रहे हैं। बढ़ती महंगाई, वैश्विक संघर्षों और वित्तीय जोखिमों के बीच सोना स्थिरता प्रदान करने वाला प्रमुख विकल्प बनकर उभरा है।

73 केंद्रीय बैंकों ने लिया सर्वे में हिस्सा

इस सर्वेक्षण में दुनिया भर के 73 केंद्रीय बैंकों को शामिल किया गया। इनमें 17 विकसित अर्थव्यवस्थाओं और 56 विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक शामिल रहे। यह सर्वे वैश्विक रिजर्व प्रबंधन की बदलती प्राथमिकताओं को समझने का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाएं अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने की दिशा में काम कर रही हैं, ताकि किसी एक मुद्रा या परिसंपत्ति पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके।

डॉलर की हिस्सेदारी घटने का अनुमान

सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि केंद्रीय बैंक आने वाले वर्षों में अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की सोच रहे हैं। कुल 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अगले पांच वर्षों में उनके रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी घट सकती है। वहीं, 15 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि डॉलर की हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। केवल 11 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि डॉलर का हिस्सा बढ़ सकता है। हालांकि, अधिकांश केंद्रीय बैंकों ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिकी डॉलर निकट भविष्य में दुनिया की प्रमुख रिजर्व मुद्रा बना रहेगा। इसके बावजूद वैकल्पिक परिसंपत्तियों और मुद्राओं की ओर बढ़ती रुचि डॉलर के प्रभुत्व में धीरे-धीरे कमी के संकेत देती है।

Central Bank Gold Survey 2026-Gold reserves-Dollar share

अगले 12 महीनों में भी जारी रहेगी सोने की खरीदारी

सर्वे के मुताबिक, 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में अपने सोना भंडार को और बढ़ाएंगे। जबकि 11 प्रतिशत का कहना है कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। जब केंद्रीय बैंकों से सीधे पूछा गया कि क्या वे अगले एक वर्ष में अपने गोल्ड रिजर्व में वृद्धि करेंगे, तो 45 प्रतिशत ने सकारात्मक जवाब दिया। दूसरी ओर, 54 प्रतिशत ने कहा कि वे मौजूदा स्तर बनाए रखेंगे। केवल 1 प्रतिशत केंद्रीय बैंक ऐसे थे जिन्होंने सोना भंडार घटाने की संभावना जताई। यह आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय बैंक सोने को केवल सुरक्षित निवेश ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक संपत्ति के रूप में भी देख रहे हैं।

मई में बढ़ी केंद्रीय बैंकों की सोना खरीद

डब्ल्यूजीसी द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 20 टन सोने की खरीदारी की। यह अप्रैल में खरीदे गए 16 टन सोने से अधिक है। हालांकि यह मात्रा पिछले 12 महीनों के औसत 27 टन से कम रही, लेकिन खरीदारी में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक अब भी सोने को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए हैं।

वैश्विक अस्थिरता बनी प्रमुख वजह

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव, महंगाई की चुनौतियां और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए जोखिम कम करने और दीर्घकालिक स्थिरता बनाए रखने का प्रभावी साधन बनता जा रहा है।

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