India के निर्यात ने बनाया Record: 12 वर्षों में 85% उछाल, 863 अरब डॉलर पर पहुंचा कुल Export
खबर सार :-
भारत का निर्यात प्रदर्शन दर्शाता है कि देश वैश्विक व्यापार में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वस्तु और सेवा दोनों क्षेत्रों में संतुलित वृद्धि, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार तथा सरकारी सुधारों ने निर्यात को नई ऊंचाई दी है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान बना सकता है।
खबर विस्तार : -
India's exports 2026: भारत ने वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए बीते 12 वर्षों में अपने कुल निर्यात में लगभग 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल निर्यात बढ़कर 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह 468 अरब डॉलर था। यह वृद्धि भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों, बढ़ती उत्पादन क्षमता और सेवा क्षेत्र के विस्तार को दर्शाती है।
5.7 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर
मंत्रालय के अनुसार, समीक्षा अवधि के दौरान भारत के कुल निर्यात में औसतन 5.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। विशेष रूप से सेवा क्षेत्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर हासिल की। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवाओं का योगदान लगातार बढ़ रहा है और यह क्षेत्र निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार बन चुका है।
वस्तु निर्यात में Engineering और Electronics की बड़ी भूमिका
वित्त वर्ष 2014-15 में 310 अरब डॉलर के मुकाबले वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 442 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान इंजीनियरिंग उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और उच्च मूल्य वाले उत्पादों की वैश्विक मांग को दर्शाता है।
Service Sector बना निर्यात वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन
भारत के सेवा निर्यात ने बीते एक दशक में सबसे तेज गति से विस्तार किया है। वर्ष 2014-15 में 158.1 अरब डॉलर का सेवा निर्यात बढ़कर 2025-26 में 421.3 अरब डॉलर हो गया। इसके साथ ही कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 33.8 प्रतिशत से बढ़कर 48.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग की मजबूती, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का विस्तार और कोविड-19 महामारी के बाद डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने इस वृद्धि को नई दिशा दी है।

Software सेवाएं बनीं सबसे बड़ी ताकत
दरअसल, कुल सेवा निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली सॉफ्टवेयर सेवाएं भारत की निर्यात सफलता का प्रमुख आधार बनी हुई हैं। इसके अलावा प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग सेवाएं भी तेजी से उभरते हुए योगदानकर्ता के रूप में सामने आई हैं। वैश्विक कंपनियों द्वारा भारत में तकनीकी और परामर्श सेवाओं की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
व्यापार सुगमता के लिए सरकार के बड़े कदम
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें 47 प्रक्रियाओं का सरलीकरण, विदेशी व्यापार नीति (एफटीपी) से जुड़ी प्रक्रियाओं का ऑटोमेशन, ऑटो-वैलिडेटेड इम्पोर्टर-एक्सपोर्टर कोड जारी करना तथा निर्यात प्रोत्साहन मिशन की शुरुआत शामिल है। इन उपायों से कारोबारियों के लिए व्यापार करना आसान हुआ है और निर्यात गतिविधियों को गति मिली है।
Global challenges के बीच भी कायम है रफ्तार
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ रहा है। मजबूत विनिर्माण आधार, वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती भागीदारी और डिजिटल क्षमताओं के कारण चालू वित्त वर्ष में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। मई 2026 में देश का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो आने वाले महीनों में भी निर्यात वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत संकेत देता है।
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