US Iran Peace Deal का बाजार पर बड़ा असर: सेंसेक्स 1200 अंक उछला, निफ्टी 24 हजार के करीब

खबर सार :-
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है, जिसका सीधा लाभ भारतीय शेयर बाजार को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी के साथ लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार को समर्थन दिया है। आने वाले दिनों में यह सकारात्मक माहौल बाजार की दिशा तय कर सकता है।
US Iran Peace Deal का बाजार पर बड़ा असर: सेंसेक्स 1200 अंक उछला, निफ्टी 24 हजार के करीब
खबर विस्तार : -

US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में नई ऊर्जा भर दी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने भी इस सकारात्मक माहौल का जोरदार स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते की पुष्टि के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और घरेलू बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। इसका परिणाम यह रहा कि बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों ने मजबूत बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की।

BSE-NSE की स्थितिः सेंसेक्स 1200 अंक और निफ्टी 360 अंक मजबूत

बीएसई सेंसेक्स ने करीब 1,200 अंकों यानी 1.6 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए 76,725.27 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। वहीं, निफ्टी 50 भी लगभग 360 अंकों की मजबूती के साथ 23,984.85 पर खुला। शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी का माहौल बना रहा और निवेशकों ने विभिन्न सेक्टरों में खरीदारी जारी रखी। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 1,089.96 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,617.91 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, निफ्टी 50 भी 341.45 अंक या 1.45 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,964.35 के स्तर पर ट्रेड करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होने से निवेशकों का जोखिम उठाने का रुझान बढ़ा है।

Midcap और Smallcap शेयरों में भी जोरदार तेजी

बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का उत्साह साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा बाजार के विभिन्न वर्गों में बढ़ा है। सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे आगे रहा और इसमें 3.61 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत तथा निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 2.2 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। वित्तीय क्षेत्र भी मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1.9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 1.4 प्रतिशत मजबूत हुआ। हालांकि बाजार की इस तेजी के बीच फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर दबाव में दिखाई दिए और इनमें हल्की गिरावट दर्ज की गई।

इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती

निफ्टी 50 के अधिकांश शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। केवल पांच शेयरों को छोड़कर बाकी सभी में तेजी देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, इटरनल, टीएमपीवी, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी जैसे प्रमुख शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों में आई मजबूती ने प्रमुख सूचकांकों को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

US-Iran Peace Deal-Donald Trump

Trump की घोषणा से बदला वैश्विक माहौल

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वाशिंगटन और तेहरान शांति समझौते पर सहमत हो गए हैं। यह समझौता पश्चिम एशिया में चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस युद्ध के कारण हजारों लोगों की जान गई थी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां तत्काल प्रभाव से रोकने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी बाधा के फिर से खोला जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक अवरोध भी समाप्त कर दिया जाएगा।

Crude Oil में गिरावट से भारत को राहत

शांति समझौते का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 83.05 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 5.74 प्रतिशत टूटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे महंगाई पर दबाव कम होगा और आर्थिक विकास को गति मिल सकती है। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि मुद्रास्फीति का अनुमान घटकर 4.6 प्रतिशत रह सकता है।

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