West Asia tensions के बीच अलर्ट मोड में भारत, Oil Crisis से निपटने को तैयार; ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का बड़ा भरोसा
खबर सार :-
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है। वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, एथेनॉल मिश्रण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने जैसी पहलों ने देश की स्थिति मजबूत की है। सरकार का दावा है कि वह किसी भी संभावित तेल संकट का सामना करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
खबर विस्तार : -
India energy security: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल बाजार में संभावित अस्थिरता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भरोसा जताया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश किसी भी संभावित तेल संकट या आपूर्ति व्यवधान से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर समयानुसार रणनीति में बदलाव भी किया जाएगा।
सरकार की प्राथमिकताः देश में ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कई महीनों में भारत ने वैश्विक तेल बाजार में आए उतार-चढ़ाव को सफलतापूर्वक संभाला है। सरकार की प्राथमिकता देश में ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़ने देना है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियां बदलती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि होती है, तो सरकार स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं बढ़ी
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। इस संदर्भ में पुरी ने बताया कि भारत की लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति और करीब 7 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी मार्ग से होता है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत ने पिछले वर्षों में अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर जोखिम को काफी हद तक कम किया है।
विभिन्न देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। देश ने विभिन्न देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी विकसित की है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों को भी बढ़ावा दिया है। इससे किसी एक क्षेत्र या मार्ग पर निर्भरता कम हुई है। मंत्री ने ईरान-अमेरिका संबंधों और संभावित युद्धविराम को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि सरकार तथ्यों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है।
आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने में जुटी सरकार
ऊर्जा आत्मनिर्भरता को लेकर केंद्र सरकार की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए पुरी ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम, जैव ईंधन के उपयोग और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार ने भारत को नई दिशा दी है। देश में तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन गतिविधियों में तेजी आई है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद मिल रही है। मंत्री ने ‘समुद्र मंथन’ पहल का भी उल्लेख किया। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत नए तेल एवं गैस कुओं की खोज, ड्रिलिंग और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 90,000 करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि से ऊर्जा सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव
ईंधन कीमतों के मुद्दे पर पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बावजूद दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें चार वर्ष पहले की तुलना में अभी भी कम हैं। उन्होंने इसका श्रेय केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौतियों और कई राज्यों द्वारा वैट में कमी को दिया। उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सब्सिडी पात्रता में बदलाव को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से उठाया है। कुछ मामलों में सब्सिडी वाले सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध बिक्री की शिकायतें सामने आई थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए पात्रता नियमों की समीक्षा की गई।
उन्होंने दोहराया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देशवासियों को सस्ती और सुलभ ऊर्जा उपलब्ध कराना है। साथ ही कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने, लीकेज रोकने और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति को मजबूत और दूरदर्शी माना जा रहा है।
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