FED के सख्त संकेतों के बीच भारतीय बाजार की सुस्त शुरुआत, Sensex-Nifty फ्लैट; IT शेयरों पर दबाव
खबर सार :-
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में स्थिरता बनी हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत भले ही फ्लैट रही हो, लेकिन व्यापक बाजार में मजबूती और तकनीकी संकेत निवेशकों के लिए सकारात्मक संदेश दे रहे हैं। आने वाले सत्रों में निफ्टी का 24,100 स्तर निर्णायक रहेगा। इसके ऊपर टिकाव मिलने पर बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
खबर विस्तार : -
Indian stock market: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा नीतिगत फैसले और ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रुख के साथ की। वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा बना रहा, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली। हालांकि आईटी सेक्टर में बिकवाली का दबाव बना रहा, जबकि बैंकिंग, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों ने बाजार को सहारा दिया।
बीएसई (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,155.62 अंक के मुकाबले 23.96 अंक की गिरावट के साथ 77,131.66 पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 11.90 अंक फिसलकर 24,073.80 पर खुला। बाजार खुलने के कुछ समय बाद निवेशकों की खरीदारी लौटने से प्रमुख सूचकांकों में स्थिरता देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में मामूली उतार-चढ़ाव
आज सुबह करीब 9:18 बजे सेंसेक्स 19.04 अंक या 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,136.58 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर निफ्टी 50 में हल्की मजबूती देखने को मिली और यह 4.30 अंक या 0.02 प्रतिशत बढ़कर 24,090 के स्तर पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार फिलहाल वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की धारणा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी फेड के रुख ने निवेशकों को सतर्क जरूर किया है, लेकिन मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दिखी मजबूती
मुख्य सूचकांकों के मुकाबले व्यापक बाजार का प्रदर्शन बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.24 प्रतिशत ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया। यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी इन श्रेणियों के शेयरों को मजबूती प्रदान कर रही है।
IT sector पर दबाव, बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी
सेक्टोरल आधार पर देखें तो निफ्टी आईटी इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का असर आईटी कंपनियों पर पड़ा, क्योंकि इनकी आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है। निफ्टी 50 में इंफोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख आईटी शेयर शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे। दूसरी ओर पीएसयू बैंक, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ समर्थन मिला।
US-Iran agreement से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
हाल के दिनों में भारतीय बाजार में आई तेजी के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में सुधार को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने तथा क्षेत्रीय तनाव कम होने से निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार इसी सकारात्मक माहौल के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार चार कारोबारी सत्रों तक मजबूती के साथ बंद हुआ था। वैश्विक जोखिमों में कमी आने से विदेशी निवेशकों की धारणा भी बेहतर हुई है।
फेड ने दरें स्थिर रखीं, लेकिन भविष्य को लेकर संकेत सख्त
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फेडरल फंड्स रेट को 3.5 प्रतिशत से 3.7 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया। हालांकि केंद्रीय बैंक ने निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया, लेकिन डॉट प्लॉट से यह संकेत मिला है कि 2026 में दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। इसी वजह से वैश्विक निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। ऊंची ब्याज दरों का माहौल उभरते बाजारों में निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
Experts: तकनीकी संकेतों से मिल रहे सकारात्मक रुझान
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार बाजार की मौजूदा संरचना अभी भी सकारात्मक बनी हुई है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) बढ़कर 60.87 पर पहुंच गया है, जो बाजार में खरीदारी की ताकत बढ़ने का संकेत देता है। वहीं एमएसीडी इंडिकेटर भी पॉजिटिव क्रॉसओवर के साथ तेजी का संकेत दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो 24,300 से 24,500 तक की तेजी संभव है। वहीं 23,900 से 23,800 का दायरा मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है।
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