Defense Production में भारत का नया कीर्तिमान: 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा डिफेंस सेक्टर
खबर सार :-
भारत का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना देश की औद्योगिक क्षमता, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक मजबूती का बड़ा संकेत है। सरकारी नीतियों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि ने रक्षा क्षेत्र को नई दिशा दी है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
खबर विस्तार : -
Defense Production 2026: भारत के रक्षा क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया इतिहास रचते हुए रक्षा उत्पादन के मामले में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा हासिल किया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि न केवल भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में देश की बढ़ती साख का भी संकेत देती है।
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन का मूल्य 1.54 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार एक वर्ष में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार की आत्मनिर्भरता आधारित नीतियां और रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधार अब ठोस परिणाम देने लगे हैं।
पांच वर्षों में 110 प्रतिशत से अधिक की छलांग
भारत के रक्षा उत्पादन की प्रगति को समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े काफी महत्वपूर्ण हैं। वित्त वर्ष 2020-21 में देश का रक्षा उत्पादन 84,643 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले मौजूदा आंकड़ा 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी पांच वर्षों में रक्षा उत्पादन में 110 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि इसे एक दशक के नजरिए से देखा जाए तो तस्वीर और भी प्रभावशाली नजर आती है। वित्त वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा उत्पादन केवल 43,746 करोड़ रुपये था। वर्तमान आंकड़ा उस स्तर से लगभग चार गुना अधिक है। इससे स्पष्ट है कि भारत ने रक्षा निर्माण के क्षेत्र में लंबी और मजबूत छलांग लगाई है।

राजनाथ सिंह ने PM Modi के नेतृत्व को दिया श्रेय
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में रक्षा उत्पादन विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और निजी उद्योगों की संयुक्त भूमिका की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन में लगातार हो रही वृद्धि देश के मजबूत होते रक्षा औद्योगिक आधार का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतिगत सहायता, नई पहलें और उद्योगों की सक्रिय भागीदारी आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को और अधिक गति प्रदान करेंगी।
Public Sector अब भी अग्रणी, लेकिन निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ी
रक्षा मंत्रालय के अनुसार कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) और अन्य सरकारी उपक्रमों की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही। हालांकि निजी क्षेत्र की भागीदारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया, जबकि इससे पहले यह 22 प्रतिशत था। निजी उद्योगों का कुल उत्पादन मूल्य लगभग 42,000 करोड़ रुपये रहा, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। यह संकेत देता है कि देश का निजी उद्योग रक्षा निर्माण के क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।

Defense exports को भी मिला बड़ा सहारा
रक्षा उत्पादन में हुई इस रिकॉर्ड वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव रक्षा निर्यात पर भी देखने को मिला है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत उत्पादन क्षमता विकसित होने से भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बन रही हैं। भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक देश नहीं रह गया है, बल्कि कई देशों को रक्षा सामग्री और तकनीक उपलब्ध कराने वाला उभरता हुआ निर्यातक भी बन रहा है। यह बदलाव देश की आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Self-reliance की दिशा में तेजी से बढ़ता India
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) अभियान की सफलता को दर्शाती है। सरकार का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करना और स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में सुधार, घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन, स्टार्टअप्स की भागीदारी और नई तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। यही कारण है कि भारत का रक्षा उद्योग आज पहले की तुलना में अधिक सक्षम, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनता जा रहा है।
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