सेमीकंडक्टर से स्वदेशी एआई तक बढ़ी रफ्तार, ₹1.64 लाख करोड़ की परियोजनाओं से मजबूत हो रहा घरेलू तकनीकी ढांचा

खबर सार :-

भारत सेमीकंडक्टर निर्माण और एआई के क्षेत्र में अपनी निर्भरता घटाकर घरेलू क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। चिप डिजाइन, फैब, पैकेजिंग, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी एआई मॉडल पर एक साथ जोर दिया जा रहा है। बड़े निवेश, बढ़ती जीपीयू क्षमता और नई परियोजनाएं भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में अधिक मजबूत भूमिका दिलाने की क्षमता रखती हैं। इससे नवाचार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
चिप से एआई तक, टेक पावर बन रहा भारत

खबर विस्तार : -

IndiaAI Mission: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर तकनीक के तेजी से बदलते दौर में भारत अपनी घरेलू तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के मुताबिक, देश अब सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से में क्षमता विकसित कर रहा है। इसमें चिप डिजाइन, वेफर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण निर्माण और जरूरी कच्ची सामग्री शामिल हैं। यह बदलाव भारत को केवल तकनीक का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि निर्माण और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत में अब तक विभिन्न तकनीकी नोड्स पर सात चिप्स का सफल निर्माण किया जा चुका है। इनमें 12 नैनोमीटर जैसे उन्नत नोड्स पर तैयार चिप्स भी शामिल हैं। इससे देश की घरेलू डिजाइन और निर्माण क्षमता में हो रही प्रगति का संकेत मिलता है।

छह राज्यों में 12 बड़ी सेमीकंडक्टर परियोजनाएं

सरकार ने छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निवेश प्रतिबद्धता है। प्रस्तावित इकाइयों में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले निर्माण संयंत्र और एडवांस्ड पैकेजिंग सुविधाएं शामिल हैं। इनमें से तीन इकाइयों ने व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है। यानी भारत अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल नीतिगत घोषणाओं से आगे बढ़कर वास्तविक उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। फैक्टशीट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक देश की 75 संस्थाओं ने 211 चिप्स का टेप-आउट पूरा कर लिया था। टेप-आउट चिप डिजाइन प्रक्रिया का अहम चरण है, जिसके बाद डिजाइन को निर्माण के लिए भेजा जाता है। यह आंकड़ा भारत की बढ़ती घरेलू चिप डिजाइन क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा को दर्शाता है।

Chip design-Semiconductors-IndiaAI Mission-Semicon 2.0

सेमीकॉन 2.0 से डिजाइन को मिलेगा बूस्ट

सरकार ने जुलाई 2026 में सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम का फोकस सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन को बढ़ावा देने पर है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन हब के रूप में और मजबूत करना है। सरकार के अनुसार, आधुनिक अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर तकनीक की भूमिका बेहद अहम है। स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, उपग्रह, रक्षा प्रणालियां और एआई आधारित तकनीकें उन्नत चिप्स पर निर्भर हैं। एआई के तेजी से विस्तार के साथ हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, विशेष प्रोसेसर और उन्नत चिप्स की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर और एआई का विकास एक-दूसरे से सीधे जुड़ता जा रहा है।

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एआई में भी आत्मनिर्भरता पर जोर

भारत की रणनीति केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। सरकार कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और स्वदेशी एआई मॉडल के विकास पर भी जोर दे रही है। इसी दिशा में करीब 10,372 करोड़ रुपये के परिव्यय वाला इंडियाएआई मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक इंडियाएआई मिशन के तहत साझा कंप्यूटिंग क्षमता बढ़कर 45,000 से अधिक जीपीयू तक पहुंच गई। इससे शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं को एआई मॉडल तैयार करने और प्रशिक्षित करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

237 परियोजनाओं को मिली सब्सिडी वाली कंप्यूटिंग

अगस्त 2026 तक 237 परियोजनाओं ने सब्सिडी वाली एआई कंप्यूटिंग सुविधा का इस्तेमाल किया है। इन परियोजनाओं को कुल 93.18 लाख जीपीयू घंटे उपलब्ध कराए गए। इसका उद्देश्य उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग को अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध कराना है, ताकि स्टार्टअप, शोधकर्ता और नवाचारकर्ता मॉडल का प्रशिक्षण, परीक्षण और अनुसंधान तेजी से कर सकें। सरकार का कहना है कि इन पहलों से एआई अनुसंधान एवं विकास की राह में आने वाली लागत और संसाधनों से जुड़ी बाधाएं कम होंगी। साथ ही देश में नए एआई मॉडल, तकनीकी समाधान और नवाचार विकसित करने के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। सेमीकंडक्टर निर्माण, चिप डिजाइन, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई मॉडल के समानांतर विकास से भारत एक व्यापक घरेलू तकनीकी इकोसिस्टम खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1.भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में क्या कर रहा है?

भारत चिप डिजाइन, वेफर फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग और उपकरण निर्माण समेत पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित कर रहा है।

2.इंडियाएआई मिशन क्या है?

इंडियाएआई मिशन का उद्देश्य देश में एआई कंप्यूटिंग क्षमता, शोध, नवाचार और स्वदेशी एआई मॉडल के विकास को बढ़ावा देना है।

3.सेमीकॉन 2.0 का क्या लक्ष्य है?

सेमीकॉन 2.0 के जरिए सेमीकंडक्टर आईपी, चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन को प्रोत्साहित कर भारत को वैश्विक डिजाइन हब के रूप में मजबूत करना है।

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