रिवॉल्विंग क्रेडिट पर RBI सख्त, NBFC से मांगी राय; डिजिटल लेंडिंग पर जोखिम नियंत्रण होगा मजबूत

खबर सार :-

आरबीआई का ताजा रुख एनबीएफसी क्षेत्र में तेज विकास के साथ मजबूत निगरानी की दिशा दिखाता है। रिवॉल्विंग क्रेडिट समेत नए उत्पादों पर नियम बनाने से पहले उद्योग की राय लेना नियामक के व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। जोखिम प्रबंधन, आंतरिक ऑडिट, ग्राहक शिकायत निवारण और डेटा सुरक्षा पर जोर से एनबीएफसी को नवाचार के साथ जवाबदेही और अनुपालन भी मजबूत करना होगा।
रिवॉल्विंग क्रेडिट के नए नियमों पर RBI सख्त

खबर विस्तार : -

RBI NBFC Revolving Credit Rules : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों को लेकर उद्योग से राय मांगी है। केंद्रीय बैंक ने एनबीएफसी को तेजी से बदलते लेंडिंग कारोबार के बीच जोखिमों की पहचान, मजबूत अनुपालन और प्रभावी आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। नियामक का फोकस खास तौर पर उन उत्पादों और बिजनेस मॉडल पर है, जिनमें तकनीक और डिजिटल चैनलों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह आरबीआई अधिकारियों और एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने कंपनियों को अपने आंतरिक नियंत्रण और ऑडिट सिस्टम को मजबूत बनाने तथा तेजी से बढ़ रहे लेंडिंग सेगमेंट की नियमित निगरानी करने की सलाह दी। बैठक को आरबीआई की व्यापक निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

नए प्रोडक्ट पर शुरुआती नजर जरूरी

आरबीआई ने एनबीएफसी से कहा है कि नए उत्पादों और बिजनेस मॉडल से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान शुरुआत में ही की जाए। नियामक का मानना है कि किसी नए मॉडल में मौजूद कमजोरी अगर शुरुआती स्तर पर पकड़ में नहीं आती, तो आगे चलकर वह बड़े वित्तीय या संचालन संबंधी जोखिम में बदल सकती है। इसलिए कंपनियों को जोखिम प्रबंधन व्यवस्था को कारोबार की शुरुआत से ही मजबूत रखना होगा। केंद्रीय बैंक ने यह भी माना कि एनबीएफसी अक्सर टेक्नोलॉजी आधारित लेंडिंग प्रोडक्ट और नए बिजनेस मॉडल को अपनाने में बैंकिंग क्षेत्र से आगे रहते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र का अनुभव नियामक के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। आरबीआई के अनुसार, एनबीएफसी के अनुभव और बाजार से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल उभरते क्षेत्रों के लिए भविष्य के नियामकीय ढांचे को तैयार करने में किया जा सकता है।

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वैश्विक मानकों के करीब होगा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क?

इस बैठक में एनबीएफसी के नियामकीय ढांचे को वैश्विक मानकों के ज्यादा करीब लाने की दिशा में भी विचार-विमर्श हुआ। इसका उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन को और मजबूत करना है। बदलते कारोबारी मॉडल और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के बीच आरबीआई एनबीएफसी क्षेत्र के लिए ऐसा ढांचा तैयार करना चाहता है, जो नवाचार को जगह देने के साथ संभावित जोखिमों पर प्रभावी नियंत्रण भी रख सके।

एसआरओ की भूमिका पर भी स्पष्ट संदेश

बैठक में स्वतः नियमन संस्थाओं यानी सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (एसआरओ) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एसआरओ को समानांतर नियामक के रूप में काम नहीं करना चाहिए। उनकी भूमिका उद्योग में नियमों के पालन को बढ़ावा देने, संभावित जोखिमों की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद करने की होनी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने एसआरओ को उद्योग की ‘पहली सुरक्षा पंक्ति’ के तौर पर काम करने की जरूरत बताई। इसका मतलब है कि एनबीएफसी क्षेत्र को अपने स्तर पर भी निगरानी और अनुशासन की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी, ताकि छोटी समस्याएं बड़े जोखिम का रूप न ले सकें।

ग्राहकों की शिकायतों पर भी सख्ती

आरबीआई ने एनबीएफसी को ग्राहक शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करने की सलाह दी है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों की शिकायतों का समाधान तय समय-सीमा के भीतर प्रभावी तरीके से हो। डिजिटल लेंडिंग के विस्तार के साथ ग्राहक अनुभव और शिकायत निवारण की अहमियत और बढ़ गई है। इसके अलावा, एनबीएफसी को आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है। लेंडर अब ग्राहकों को जोड़ने, अंडरराइटिंग और लोन सर्विसिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक पर अधिक निर्भर हैं। ऐसे में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार डिजिटल लेंडिंग नियामक की प्राथमिकताओं में बनी हुई है।

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