आरबीआई का रोडमैप: तेज आर्थिक ग्रोथ संग मुद्रा व्यवस्था में बदलाव, 2028 तक पॉलिमर करेंसी की तैयारी

खबर सार :-

आरबीआई का 6.7 प्रतिशत विकास दर अनुमान भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। घरेलू मांग, उद्योग और निर्यात से विकास को समर्थन मिल रहा है। वहीं पॉलिमर नोटों की तैयारी मुद्रा व्यवस्था में तकनीकी बदलाव का संकेत है। हालांकि, महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं पर केंद्रीय बैंक की नजर बनी रहेगी। आने वाला समय आर्थिक सुधारों और नई पहलों के लिए अहम होगा।
RBI का बड़ा प्लानः 6.7% ग्रोथ और नए नोटों की तैयारी!

खबर विस्तार : -

RBI MPC Meeting: भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार आगे भी जारी रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

आरबीआई ने अगस्त एमपीसी बैठक में विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 10 आधार अंक अधिक है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती और सर्विस गतिविधियों में लगातार विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले प्रमुख कारण बने हुए हैं।

घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत, वैश्विक चुनौतियां बरकरार

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। पहली तिमाही के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि शुरुआती कॉर्पोरेट परिणामों से मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन के संकेत मिले हैं। इसके अलावा निर्यात में मजबूती और घरेलू खपत में सुधार भी आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, आरबीआई ने वैश्विक जोखिमों को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और जुलाई के बाद बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और अनिश्चितता बढ़ी है।

महंगाई पर आरबीआई की नजर, नीतिगत फैसलों में सावधानी

संजय मल्होत्रा ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई की स्थिति कई कारकों पर निर्भर करेगी। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण हेडलाइन महंगाई बढ़ सकती है। वहीं, मुख्य महंगाई दर फिलहाल सामान्य स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मानसून की स्थिति, अल नीनो प्रभाव, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार नीतियों में बदलाव भविष्य की महंगाई दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े नीतिगत कदम से पहले महंगाई के रुझान और उसके कारणों को बेहतर तरीके से समझना जरूरी है। आरबीआई का कहना है कि आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता है। मजबूत विकास दर के साथ कीमतों की स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।

RBI MPC meeting-RBI polymer notes

पॉलिमर करेंसी की तैयारी तेज, 2028 तक बाजार में आने की उम्मीद

आर्थिक विकास के साथ-साथ भारत की मुद्रा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलिमर करेंसी नोटों को प्रचलन में लाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पॉलिमर बैंक नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है। बड़े पैमाने पर इन्हें जारी करने से पहले इनकी मजबूती, टिकाऊपन और भारतीय परिस्थितियों में उपयोगिता की जांच की जा रही है। आरबीआई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पॉलिमर नोट देश के अलग-अलग मौसम और उपयोग की परिस्थितियों में प्रभावी साबित हों। ट्रायल के परिणामों के आधार पर ही इनके व्यापक इस्तेमाल पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

10 और 20 रुपये के नोटों से शुरू होगा परीक्षण

पॉलिमर करेंसी के पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के नोटों का परीक्षण किया जा रहा है। सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि आरबीआई इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल की तैयारी कर रहा है। इन परीक्षणों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कितने टिकाऊ हैं और भारतीय परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन कैसा रहता है। आरबीआई के अनुसार, छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है और वे जल्दी खराब हो जाते हैं। पॉलिमर नोट अधिक समय तक चल सकते हैं, जिससे नोटों को बार-बार बदलने की लागत कम होने की संभावना है।

सुरक्षा फीचर्स और नकली नोटों पर लगाम की उम्मीद

पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं। इनमें पारदर्शी विंडो और अन्य उन्नत सुरक्षा तत्व शामिल हो सकते हैं, जो नकली नोटों की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि कागजी नोटों को पूरी तरह हटाने की कोई योजना फिलहाल नहीं है। यदि पॉलिमर नोट जारी किए जाते हैं, तो वे मौजूदा कागजी मुद्रा के साथ ही चलेंगे। आरबीआई पूरे देश में अलग-अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों के आधार पर इन नोटों की समीक्षा करेगा। फील्ड ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन पूरा होने के बाद ही इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का फैसला लिया जाएगा।

भारत की अर्थव्यवस्था और मुद्रा प्रणाली में बदलाव का संकेत

आरबीआई के ताजा अनुमान से संकेत मिलता है कि भारत आर्थिक मजबूती के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। जहां एक ओर 6.7 प्रतिशत विकास दर का अनुमान देश की विकास क्षमता को दर्शाता है, वहीं पॉलिमर करेंसी की तैयारी मुद्रा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक नीतियां विकास, स्थिरता और तकनीकी सुधारों के संतुलन पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।

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