अप्रैल-जुलाई में 2.44% बढ़ा कुल निर्यात; सोने-चांदी से जड़ित आभूषणों और लैब-ग्रोन डायमंड ने संभाली कमान
खबर सार :-
भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात ने वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत लचीलापन दिखाया है। अप्रैल-जुलाई में 9.17 अरब डॉलर का निर्यात और वैल्यू-एडेड ज्वेलरी की तेज वृद्धि उद्योग की बदलती रणनीति को दर्शाती है। हालांकि कट-पॉलिश्ड डायमंड और साधारण सोने के आभूषणों में गिरावट चिंता बनी हुई है, लेकिन चांदी, जड़े आभूषण और लैब-ग्रोन डायमंड भविष्य की वृद्धि के मजबूत आधार बन रहे हैं।
खबर विस्तार : -
India Gem & Jewellery Exports: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र ने चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में मजबूत प्रदर्शन किया है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 9.17 अरब डॉलर पहुंच गया। निर्यात वृद्धि में वैल्यू-एडेड उत्पादों, खासकर जड़े हुए सोने और चांदी के आभूषणों की अहम भूमिका रही।
भारतीय मुद्रा में देखें तो इस अवधि में रत्न एवं आभूषणों का कुल निर्यात 13.58 प्रतिशत बढ़कर 87,078.01 करोड़ रुपये हो गया। डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और निर्यात संरचना में बदलाव को देखते हुए रुपये के मूल्य में यह वृद्धि उद्योग की निर्यात क्षमता और कारोबारी गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है।
जड़े सोने के आभूषणों की मांग तेज
अप्रैल-जुलाई अवधि में जड़े हुए सोने के आभूषणों का निर्यात 21.09 प्रतिशत बढ़कर 2.24 अरब डॉलर हो गया। चांदी के आभूषणों ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया। इनका निर्यात 72.19 प्रतिशत की शानदार वृद्धि के साथ 508.18 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों में डिजाइन, शिल्प और वैल्यू-एडेड ज्वेलरी की मांग लगातार बढ़ रही है। प्लैटिनम ज्वेलरी का निर्यात भी 17.20 प्रतिशत बढ़कर 77.82 मिलियन डॉलर रहा। वहीं पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड्स का निर्यात 7.47 प्रतिशत बढ़कर 408.50 मिलियन डॉलर पहुंच गया। साधारण और जड़े हुए आभूषणों को मिलाकर कुल सोने के आभूषणों का निर्यात 5.87 प्रतिशत बढ़कर 4.03 अरब डॉलर रहा।
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अमेरिका और अन्य बड़े बाजारों से मिला सहारा
जीजेईपीसी के अनुसार, अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग और ब्रिटेन जैसे प्रमुख बाजारों में भारतीय आभूषणों की मांग ने निर्यात को सहारा दिया। खासतौर पर वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग से भारतीय निर्यातकों को लाभ मिला। यह रुझान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता, महंगाई और उपभोक्ता खर्च में बदलाव जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। हालांकि, सभी उत्पाद श्रेणियों में प्रदर्शन समान नहीं रहा। कट एंड पॉलिश्ड डायमंड्स का निर्यात 8 प्रतिशत घटकर 3.60 अरब डॉलर रह गया। साधारण सोने के आभूषणों के निर्यात में भी 8.46 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1.80 अरब डॉलर पर आ गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पारंपरिक उत्पादों की तुलना में डिजाइन और मूल्यवर्धन वाले उत्पाद इस समय बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
वैल्यू-एडेड उत्पादों पर उद्योग का फोकस
जीजेईपीसी के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। उनके अनुसार, वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग निर्यात वृद्धि को सहारा दे रही है और भविष्य में भी यही श्रेणियां उद्योग की प्रमुख विकास चालक बन सकती हैं। भंसाली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हालिया नरमी प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मांग बढ़ाने में मदद कर सकती है। उन्हें उम्मीद है कि आईआईजेएस भारत प्रीमियर 2026 के दौरान हुए कारोबारी समझौते आने वाले महीनों में वास्तविक निर्यात ऑर्डरों में बदलेंगे। इस प्रदर्शनी में 61,000 से अधिक आगंतुक पहुंचे, जिनमें 80 देशों से आए 5,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार और प्रतिनिधि शामिल थे।
भारत को ग्लोबल डायमंड ट्रेड हब बनाने की उम्मीद
भंसाली ने हाल में पेश टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 का भी स्वागत किया। उनके मुताबिक, विशेष अधिसूचित क्षेत्रों के जरिए रफ डायमंड कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को 15 वर्ष की आयकर छूट मिलने से भारत को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे देश केवल हीरा प्रसंस्करण केंद्र तक सीमित न रहकर वैश्विक हीरा व्यापार केंद्र के रूप में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। कुल मिलाकर, शुरुआती चार महीनों के आंकड़े भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। हालांकि डायमंड और साधारण गोल्ड ज्वेलरी में कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं जड़े आभूषण, चांदी, प्लैटिनम और लैब-ग्रोन डायमंड जैसे क्षेत्रों का प्रदर्शन उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।
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