2047 का 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य: टिकाऊ विकास से ही बनेगी 30 ट्रिलियन डॉलर की ताकत
खबर सार :-
पीयूष गोयल का संदेश साफ है कि 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य केवल आर्थिक विस्तार से हासिल नहीं होगा। इसके लिए निर्यात, नवाचार, डिजिटल तकनीक, निष्पक्ष व्यापार और टिकाऊ उत्पादन को साथ लेकर चलना होगा। उद्योग, एमएसएमई, किसान, श्रमिक, उद्यमी और उपभोक्ता मिलकर इस बदलाव को गति दे सकते हैं। इससे भारत वैश्विक विकास की अगली बड़ी ताकत बनने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा सकेगा।
खबर विस्तार : -
Indian Economy 2047 Goal: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए उद्योग जगत से निष्पक्ष व्यापार और टिकाऊ कारोबारी मॉडल अपनाने की अपील की है। उन्होंने रीसाइक्लिंग, पुनः उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरत बताया। गोयल ने कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के साथ गुणवत्ता, नवाचार, डिजिटलीकरण और जिम्मेदार व्यापार पर भी जोर देना होगा।
भारतीय उद्योग के सामने वैश्विक अवसर
नई दिल्ली में भारतीय व्यापार महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों के साथ मजबूत होते व्यापारिक संबंध भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत अब अपने उत्पादों और सेवाओं को दुनिया के बाजारों में पहले की तुलना में अधिक मजबूती के साथ पेश करने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग को केवल घरेलू मांग पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी। गुणवत्ता, डिजाइन और नवाचार पर विशेष ध्यान देकर ‘मेक इन इंडिया’ ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
नौ एफटीए से बढ़ी बाजार तक पहुंच
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नौ मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए किए हैं। इन समझौतों से भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्राथमिकता आधारित पहुंच मिल रही है। इसका लाभ निर्यातकों के साथ-साथ विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और छोटे कारोबारियों को भी मिल सकता है। गोयल ने कहा कि भारत के बढ़ते निर्यात में एमएसएमई, किसान, मछुआरे, उद्यमी, श्रमिक और सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका है। उनके सामूहिक प्रयासों ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
पीयूष गोयल के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की है और सरकार का लक्ष्य इसे 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि वस्तु और सेवा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में भारत का निर्यात करीब 73 प्रतिशत बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के बीच भी निर्यात में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े भारतीय कारोबार की बढ़ती वैश्विक क्षमता को दर्शाते हैं।
स्वदेशी मांग से बढ़ेगा उत्पादन
गोयल ने भारतीय उपभोक्ताओं से अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि घरेलू स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने से उत्पादन का पैमाना बढ़ेगा और बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था का लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की लागत प्रतिस्पर्धा मजबूत हो सकती है और वे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला करने में अधिक सक्षम बनेंगी। उन्होंने कारोबारियों और उद्यमियों से व्यवसायों का डिजिटलीकरण करने तथा आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाएं अपनाने को कहा। उनके अनुसार तकनीक, पारदर्शिता और निष्पक्ष कारोबारी व्यवस्था उद्योगों की उत्पादकता और विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
जलवायु चुनौती के बीच सर्कुलर इकोनॉमी जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल तेज विकास पर आधारित नहीं हो सकती। विकास को टिकाऊ और जिम्मेदार बनाना भी उतना ही जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने उद्योग जगत से रीसाइक्लिंग, पुनः उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना, कचरे को कम करना और इस्तेमाल की गई वस्तुओं को दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करना है। गोयल के मुताबिक इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक दक्षता भी बढ़ाई जा सकती है।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक विस्तार साथ-साथ
गोयल ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार इन कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे में निवेश से उद्योगों को मजबूती मिली है तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार हुए हैं। मंत्री ने कहा कि भारत के विकास अभियान में नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी जरूरी है। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, जिम्मेदार उपभोग करना और कारोबार में पारदर्शिता अपनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
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