तेल की कीमतों और ग्लोबल टेंशन का असर, सेंसेक्स 180 अंक टूटा; निफ्टी 24,340 के करीब

खबर सार :-

भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल तेजी और दबाव के बीच संतुलन बना हुआ है। घरेलू आर्थिक संकेतक, निवेश प्रवाह और तकनीकी मजबूती बाजार को सहारा दे रहे हैं, जबकि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों की अनिश्चितता जोखिम बढ़ा रही है। ऐसे में निकट अवधि में सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर सावधानी से नजर रखनी होगी।
वैश्विक दबाव में बाजार की चाल बिगड़ी, सेंसेक्स 180 अंक टूटा

खबर विस्तार : -

Share Market Updates: मुंबई में गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भले ही लगभग सपाट रही, लेकिन शुरुआती कारोबार आगे बढ़ते ही बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स करीब 180 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े और लगातार घरेलू निवेश बाजार को कुछ सहारा देते दिखे।

बाजार ने बदली करवट

गुरुवार के कारोबार की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार ने मिश्रित रुख के साथ की। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 77,966.35 से 145.56 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,111.91 अंक पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 पिछले बंद 24,435.95 के मुकाबले 4.35 अंक फिसलकर 24,431.60 अंक पर खुला। शुरुआती संकेतों में बाजार सीमित दायरे में दिखाई दिया, लेकिन कुछ ही देर में प्रमुख सूचकांकों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 180 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ करीब 77,775 अंक पर कारोबार करता नजर आया। निफ्टी 50 भी 95.75 अंक यानी 0.39 प्रतिशत टूटकर 24,340.20 अंक के आसपास पहुंच गया। इससे साफ हुआ कि शुरुआती बढ़त टिक नहीं पाई और निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

मिडकैप-स्मॉलकैप में मिला-जुला रुख

व्यापक बाजार में भी कारोबार एकतरफा नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ मजबूत दिखाई दिया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा छोटे शेयरों में खरीदारी बनी रही, लेकिन मिडकैप खंड पर दबाव देखने को मिला। सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी मीडिया इंडेक्स 0.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे मजबूत रहा। इसके बाद निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ऑटो शेयरों में खरीदारी ने बाजार की कमजोरी को कुछ हद तक संतुलित किया। दूसरी ओर निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.81 प्रतिशत और निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.69 प्रतिशत कमजोर रहे। पीएसयू बैंक, ऑयल एंड गैस तथा प्राइवेट बैंकिंग इंडेक्स में भी करीब 0.61 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। निफ्टी50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज सबसे अधिक दबाव में रहने वाले शेयरों में शामिल रहे।

घरेलू ताकत दे रही बाजार को सहारा

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कई संकेतक बाजार के लिए सकारात्मक बने हुए हैं। जीएसटी संग्रह, माल ढुलाई, ऑटोमोबाइल बिक्री और बैंक ऋण वृद्धि जैसे उच्च-आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं। इन संकेतकों से आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय को समर्थन मिलने की उम्मीद है। घरेलू निवेशकों का लगातार बाजार में पैसा लगाना भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बना हुआ है। हालांकि विदेशी घटनाक्रमों को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशक फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचते दिख रहे हैं।

कच्चा तेल अब भी बड़ी चिंता

बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी बना हुआ है। ऊंची तेल कीमतें भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से गुरुवार को कुछ राहत के संकेत मिले। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक प्रतिशत से अधिक गिरकर 87.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.64 प्रतिशत फिसलकर 81.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल कीमतों में नरमी से महंगाई और लागत संबंधी चिंताओं को कुछ राहत मिल सकती है। इसके बावजूद बाजार की आगे की दिशा तेल की कीमतों, वैश्विक जोखिम और विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर रहेगी।

तकनीकी तस्वीर में तेजी की उम्मीद

तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक बुधवार के कारोबार में निफ्टी ने 20-दिवसीय मूविंग एवरेज के आसपास मजबूती दिखाई और चार्ट पर हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया। इसे निकट अवधि के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी में पहले चरण में 24,540 से 24,666 अंक तक बढ़त की संभावना बन सकती है। इसके बाद इंडेक्स 24,850 से 25,100 अंक की दिशा में भी बढ़ सकता है। हालांकि 24,490 अंक के आसपास मुनाफावसूली और कुछ समय के लिए समेकन देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए तकनीकी स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा।

कई संकेतकों पर निवेशकों की नजर

फिलहाल बाजार के सामने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के संकेत मौजूद हैं। मजबूत घरेलू मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़े, कॉरपोरेट आय की उम्मीद और घरेलू निवेश प्रवाह बाजार को आधार दे रहे हैं। दूसरी ओर वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी बाजारों की दिशा निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं।

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