सेंसेक्स 188 अंक फिसला, निफ्टी भी लाल; अब महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की नजर
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार की गिरावट में आईटी के शेयर बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी बने, लेकिन पीएसयू बैंक, मेटल और कुछ अन्य सेक्टरों ने नुकसान सीमित किया। मिडकैप में तेजी ने निवेशकों के भरोसे का संकेत दिया। अब बाजार की नजर महंगाई के आंकड़ों पर है। जुलाई में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों का महंगाई पर असर बाजार के अगले रुख के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
खबर विस्तार : -
Stock Market Update: भारतीय शेयर बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 187.90 अंक टूटकर 77,966.35 और निफ्टी 35.75 अंक फिसलकर 24,435.95 पर बंद हुआ। आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की चाल बिगाड़ी, जबकि पीएसयू बैंक और मेटल सेक्टर ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों पर है, खासकर जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में रहे उतार-चढ़ाव के असर पर।
आईटी शेयरों ने बाजार पर बनाया दबाव
बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय बाजार में शुरुआत से ही दबाव देखने को मिला और अंत तक प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे। सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,966.35 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 35.75 अंक यानी 0.15 प्रतिशत फिसलकर 24,435.95 पर रहा। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी शेयरों की कमजोरी से आया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.54 प्रतिशत टूटकर दिन का सबसे बड़ा सेक्टोरल लूजर रहा। आईटी कंपनियों में बिकवाली का असर पूरे बाजार के सेंटीमेंट पर दिखाई दिया। इसके अलावा एफएमसीजी, कंजप्शन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर भी कमजोर रहे।
इन सेक्टरों में भी रही गिरावट
बुधवार को निफ्टी एफएमसीजी 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी कंजप्शन में 0.50 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर में 0.44 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी ऑटो 0.32 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.14 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इन सेक्टरों में दबाव ने बाजार की कुल दिशा को कमजोर बनाए रखा।
पीएसयू बैंक और मेटल ने संभाला मोर्चा
जहां आईटी समेत कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली हावी रही, वहीं कुछ क्षेत्रों ने बाजार को सहारा दिया। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2.05 प्रतिशत की जोरदार तेजी के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। निफ्टी मीडिया में 1.05 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.70 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 0.54 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.38 प्रतिशत, निफ्टी इंफ्रा 0.27 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। इन सेक्टरों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को सीमित रखने में भूमिका निभाई।
मिडकैप में दिखा भरोसा
व्यापक बाजार में कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 180.55 अंक यानी 0.28 प्रतिशत चढ़कर 64,024.40 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 35.50 अंक यानी 0.18 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 19,821.65 पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट का मजबूत रहना निवेशकों के भरोसे की ओर संकेत करता है। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स का रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बने रहना बाजार के व्यापक रुझान को लेकर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
सेंसेक्स के इन शेयरों में खरीदारी
सेंसेक्स पैक में एसबीआई, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। इन शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांक की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया। दूसरी ओर, टीसीएस, एमएंडएम, टाटा स्टील, एलएंडटी, इटरनल, इन्फोसिस, आईटीसी, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी और एचयूएल में कमजोरी रही। खासकर आईटी कंपनियों में दबाव का असर बाजार की दिशा पर साफ नजर आया।
अब महंगाई के आंकड़ों पर टिकी नजर
बाजार की अगली बड़ी निगाह महंगाई के आंकड़ों पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार के आंकड़े खास तौर पर महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि जुलाई के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशक यह आकलन करना चाहते हैं कि तेल की कीमतों में बदलाव का घरेलू महंगाई पर कितना असर पड़ा है। महंगाई के आंकड़े आने वाले समय में बाजार के सेंटीमेंट और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए निवेशक आंकड़ों के साथ-साथ वैश्विक संकेतों और कमोडिटी कीमतों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
बाजार का व्यापक रुझान अभी सकारात्मक
प्रमुख सूचकांकों में बुधवार की गिरावट के बावजूद बाजार का व्यापक रुझान फिलहाल सकारात्मक बताया जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में हैं, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ऊंचे स्तरों के आसपास बने हुए हैं। यह संकेत देता है कि बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। आने वाले सत्रों में महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की चाल और सेक्टर आधारित खरीदारी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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