Dollar की ताकत के आगे फीके पड़े Gold-Silver, निवेशकों को झटका; कीमतों में 1.7% तक की बड़ी गिरावट
खबर सार :-
सोने और चांदी की कीमतों में आई ताजा गिरावट के पीछे मजबूत डॉलर, बढ़ती महंगाई की आशंका और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि प्रमुख कारण हैं। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया है। फिलहाल डॉलर की मजबूती कीमती धातुओं पर भारी पड़ रही है, लेकिन वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे कीमतों की दिशा तय करेंगी।
खबर विस्तार : -
Gold Silver price crash: वैश्विक वित्तीय बाजारों में डॉलर की मजबूती का असर अब कीमती धातुओं पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और कारोबारियों को झटका लगा। घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक दोनों धातुओं में बिकवाली का माहौल देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स में रिकॉर्ड मजबूती, बढ़ती महंगाई की आशंकाएं और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि के संकेतों ने सोने और चांदी की चमक को फिलहाल फीका कर दिया है।
MCX पर सोने के भाव में भारी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का वायदा अनुबंध पिछले बंद भाव 1,46,529 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,528 रुपये की गिरावट के साथ 1,45,000 रुपये पर खुला। कारोबार के शुरुआती घंटों में बिकवाली और तेज हो गई। सुबह 9:48 बजे तक सोना 2,279 रुपये या 1.56 प्रतिशत टूटकर 1,44,250 रुपये पर पहुंच गया। दिन के कारोबार के दौरान यही इसका न्यूनतम स्तर रहा, जबकि अधिकतम स्तर 1,45,000 रुपये दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाने वाले सोने से मुनाफावसूली की, जिसके कारण कीमतों में दबाव बढ़ा।
Silver की कीमतों में भी दिखी कमजोरी
सोने की तरह चांदी भी गिरावट की चपेट में रही। एमसीएक्स पर 3 जुलाई 2026 के चांदी अनुबंध की शुरुआत 2,22,579 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुई, जो पिछले बंद भाव 2,25,834 रुपये से 3,255 रुपये कम थी। खबर लिखे जाने तक चांदी का भाव 3,803 रुपये या 1.68 प्रतिशत गिरकर 2,22,031 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल कीमती धातुओं से हटकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दबाव
घरेलू बाजार की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी में कमजोरी देखी गई। वैश्विक बाजार में सोना 1.75 प्रतिशत गिरकर 4,077.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी 1.69 प्रतिशत टूटकर 61.02 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने वैश्विक निवेशकों को डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित किया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं में सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
Dollar Index ने बनाया नया रिकॉर्ड
सोने और चांदी में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.265 के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले लगभग एक वर्ष का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स अमेरिकी मुद्रा की ताकत को छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं-यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक-के मुकाबले मापता है। इंडेक्स के मजबूत होने का अर्थ है कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा डॉलर पर बढ़ रहा है।
महंगाई और ब्याज दरों की चिंता
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहे असर से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। यदि महंगाई नियंत्रण से बाहर जाती है तो दुनिया के कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व से जुड़े अधिकारियों की ओर से भी सख्त मौद्रिक नीति के संकेत मिले हैं। ब्याज दरें बढ़ने की संभावना सोने और चांदी के लिए नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इन धातुओं पर कोई ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में निवेशक अधिक रिटर्न देने वाले वित्तीय साधनों की ओर रुख करते हैं।
आगे क्या रहेगा रुख?
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और ब्याज दरों में वृद्धि के संकेत तेज होते हैं तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित निवेश की मांग फिर बढ़ सकती है, जिससे सोने और चांदी को समर्थन मिल सकता है।
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