इक्विटी ऑप्शंस में NSE की पकड़ ढीली, तीन साल में 22% से ज्यादा घटी बाजार हिस्सेदारी; IPO से पहले बढ़ीं चुनौतियां
खबर सार :-
एनएसई अभी भी भारतीय पूंजी बाजार का सबसे बड़ा और प्रभावशाली एक्सचेंज है, लेकिन इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में लगातार घटती बाजार हिस्सेदारी उसके सामने नई प्रतिस्पर्धी चुनौतियों का संकेत देती है। आईपीओ से पहले परिचालन आय और ट्रांजैक्शन चार्जेज में आई गिरावट भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। आने वाले वर्षों में कंपनी की रणनीति और बाजार की दिशा पर सभी की नजर रहेगी।
खबर विस्तार : -
NSE Equity Options: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के लिए इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) बाजार से जुड़े ताजा आंकड़े नई चिंता लेकर आए हैं। पिछले तीन वित्त वर्षों में इस सेगमेंट में एक्सचेंज की बाजार हिस्सेदारी 22 प्रतिशत से अधिक घट गई है। यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है जब एनएसई अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि इक्विटी कैश और फ्यूचर्स जैसे अन्य प्रमुख कारोबार क्षेत्रों में उसकी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन ऑप्शंस कारोबार में घटती हिस्सेदारी प्रतिस्पर्धा के बढ़ते असर की ओर संकेत कर रही है।
तीन साल में 22 प्रतिशत से ज्यादा घटी हिस्सेदारी
एनएसई की वार्षिक रिपोर्ट और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) सेगमेंट में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान एक्सचेंज की बाजार हिस्सेदारी 96.9 प्रतिशत थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर 87.4 प्रतिशत रह गई और वित्त वर्ष 2025-26 में यह और फिसलकर 74.71 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस तरह तीन वर्षों के भीतर इस कारोबार में एनएसई की हिस्सेदारी 22.2 प्रतिशत से अधिक कम हो गई।
दूसरे कारोबार में अब भी मजबूत स्थिति
हालांकि ऑप्शंस कारोबार में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन अन्य प्रमुख सेगमेंट में एनएसई की स्थिति मजबूत बनी हुई है। इक्विटी कैश मार्केट में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान उसकी हिस्सेदारी 92.7 प्रतिशत थी, जो अगले वर्ष बढ़कर 93.6 प्रतिशत हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में यह मामूली घटकर 92.99 प्रतिशत रही, जो बाजार में उसकी मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है। इसी तरह इक्विटी फ्यूचर्स सेगमेंट में एनएसई का लगभग एकाधिकार कायम है। वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में उसकी हिस्सेदारी 99.9 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 99.79 प्रतिशत दर्ज की गई।
परिचालन आय में भी आई कमी
आईपीओ की तैयारी के बीच कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी नरमी दिखाई दी है। आरएचपी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में एनएसई की कुल परिचालन आय 17,140.67 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 16,601.30 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट को दर्शाता है।
ट्रांजैक्शन चार्जेज बने दबाव की वजह
एनएसई की आय का सबसे बड़ा स्रोत ट्रांजैक्शन चार्जेज भी दबाव में रहा। वित्त वर्ष 2025 में यह आय 13,635.76 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यानी इसमें करीब चार प्रतिशत की सालाना गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा क्लियरिंग एंड सेटलमेंट सेवाओं से होने वाली आय भी 321.34 करोड़ रुपये से घटकर 251.45 करोड़ रुपये रह गई, जो 21.8 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है।
आईपीओ से पहले बढ़ी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी ऑप्शंस कारोबार में घटती हिस्सेदारी और परिचालन आय में आई कमी ऐसे समय सामने आई है जब एनएसई सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी बाजार हिस्सेदारी और आय को दोबारा मजबूत करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
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