मध्य पूर्व संकट से डगमगाया भारतीय शेयर बाजार, फार्मा शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव; निवेशकों की बढ़ी चिंता
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव में कारोबार कर रहा है। मध्य पूर्व की स्थिति, अमेरिकी नीतियां और विदेशी बाजारों का रुख आने वाले दिनों में निवेशकों की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थिर माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए मजबूत कंपनियों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
खबर विस्तार : -
Indian stock Market News: मध्य पूर्व में लगातार गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, जबकि फार्मा सेक्टर सबसे अधिक दबाव में नजर आया। अमेरिकी टैरिफ संबंधी आशंकाओं और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में लाल निशान में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में बाजार की अस्थिरता और बढ़ सकती है।
घरेलू शेयर बाजार गुरुवार सुबह कमजोर शुरुआत के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 208 अंक टूटकर 76,553 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 51 अंक फिसलकर 23,941 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी आशंकाओं का बाजार पर असर
सबसे ज्यादा दबाव फार्मा शेयरों पर रहा। निफ्टी फार्मा इंडेक्स लगभग 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी आशंकाओं ने दवा कंपनियों के शेयरों में कमजोरी पैदा की है। इसके अलावा आईटी, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटी सेक्टरों में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। हालांकि सभी सेक्टरों में कमजोरी नहीं रही। ऑटो, मेटल, एफएमसीजी, मीडिया, डिफेंस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में सीमित बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुए हैं, बल्कि चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी जारी है।
BSE, NSE में कंपनियों के शेयरों की स्थिति
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। दूसरी ओर इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टाटा स्टील, एसबीआई, टीसीएस, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, भारती एयरटेल, टाइटन, एचसीएल टेक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे दिग्गज शेयर दबाव में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली
बाजार की कमजोरी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने बिकवाली की। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 152 अंक फिसलकर 62,142 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी गिरावट के साथ 19,097 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे स्पष्ट है कि व्यापक बाजार में निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर हुआ है।
वैश्विक बाजारों में मिश्रित रूख
वैश्विक बाजारों का रुख भी मिश्रित रहा। एशियाई बाजारों में टोक्यो, हांगकांग, सोल और जकार्ता के सूचकांक बढ़त में रहे, जबकि शंघाई में गिरावट दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान नैस्डैक में उल्लेखनीय कमजोरी रही, जबकि डाओ जोन्स लगभग सपाट बंद हुआ। विदेशी बाजारों के इस मिश्रित रुख का असर भारतीय निवेशकों की रणनीति पर भी देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की सबसे बड़ी चिंता मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है। ईरान-अमेरिका विवाद के बीच लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हूती विद्रोहियों के हमले ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों में आयातित तेल का बड़ा हिस्सा
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में तेल कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई, चालू खाते के घाटे, रुपये की मजबूती और कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ सकता है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों के साथ घरेलू निवेशक भी फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
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