निफ्टी क्लोजिंग में स्पॉट-फ्यूचर्स गैप से मचा बवाल, नए ऑक्शन नियमों पर ट्रेडर्स ने पूछा-नियमित कारोबार की समाप्ति पर 185 अंकों का अंतर क्यों ?

खबर सार :-

निफ्टी स्पॉट और फ्यूचर्स क्लोजिंग में अंतर ने नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर बाजार में चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि सेबी ने इसे पारदर्शी मूल्य निर्धारण और बेहतर बाजार व्यवस्था की दिशा में कदम बताया है। आने वाले दिनों में इस प्रणाली के प्रभाव पर निवेशकों और विशेषज्ञों की नजर रहेगी। वहीं मजबूत बाजार संकेतों के बीच सतर्क और संतुलित निवेश रणनीति जरूरी होगी।
निफ्टी क्लोजिंग ने बढ़ाई ट्रेडर्स की टेंशन, नए ऑक्शन नियमों पर उठे सवाल

खबर विस्तार : -

Nifty Spot Futures Difference:  भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को तेजी के बीच निफ्टी की क्लोजिंग ने ट्रेडर्स का ध्यान खींच लिया। नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियम लागू होने के पहले ही दिन निफ्टी स्पॉट और फ्यूचर्स क्लोजिंग के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। नियमित कारोबार खत्म होने के बाद निफ्टी करीब 185 अंक उछल गया, जिससे सोशल मीडिया पर ट्रेडर्स ने सवाल उठाए। हालांकि, सेबी के अनुसार नया सिस्टम क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा पारदर्शी और बेहतर तरीके से तय करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन ने बदली बाजार की तस्वीर

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और बैंक निफ्टी में सोमवार को नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन नियम लागू होने के बाद स्पॉट और फ्यूचर्स क्लोजिंग में बड़ा अंतर देखने को मिला। बाजार बंद होने से पहले दोपहर 3:15 बजे निफ्टी लगभग 24,589 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह 24,774.30 पर बंद हुआ। इस तरह आखिरी चरण में करीब 185 अंकों की तेजी दर्ज की गई। वहीं गिफ्ट निफ्टी लगभग 24,650 के आसपास कारोबार कर रहा था। इस असामान्य अंतर ने कई ट्रेडर्स और बाजार प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया।

ट्रेडर्स ने सोशल मीडिया पर जताई चिंता

निफ्टी की क्लोजिंग में अचानक आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई ट्रेडर्स ने प्रतिक्रिया दी। कुछ ट्रेडर्स ने कहा कि उनके अनुभव में स्पॉट और फ्यूचर्स के बीच इतना बड़ा अंतर पहले कभी देखने को नहीं मिला। कई बाजार प्रतिभागियों ने NSE और BSE के प्रमुख सूचकांकों की क्लोजिंग में अंतर को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि नए ऑक्शन सिस्टम के शुरुआती दौर में ऐसी गतिविधियों को समझने के लिए समय की जरूरत होगी।

क्या है नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम?

सेबी और एक्सचेंजों द्वारा लागू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन का उद्देश्य शेयरों और इंडेक्स की क्लोजिंग कीमत को ज्यादा उचित और पारदर्शी तरीके से तय करना है। नए नियमों के तहत एफएंडओ स्टॉक्स में नियमित ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे तक जारी रहती है। इसके बाद ऑक्शन प्रक्रिया शुरू होती है। पहले चरण में ऑर्डर एंट्री की सुविधा दी जाती है, जबकि बाद के चरणों में ऑर्डर मैचिंग के आधार पर अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है। ऑक्शन सेशन में खोजी गई कीमत को एफएंडओ स्टॉक्स के आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य बाजार में बेहतर लिक्विडिटी और ऑर्डर निष्पादन की गुणवत्ता बढ़ाना है।

निफ्टी बैंक में भी दिखा बड़ा बदलाव

नए नियमों का असर केवल निफ्टी तक सीमित नहीं रहा। बैंक निफ्टी में भी क्लोजिंग के अंतिम चरण में तेज उछाल देखने को मिला। बैंक निफ्टी करीब 1.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ और अंतिम समय में लगभग 500 अंकों की तेजी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार क्लोजिंग ऑक्शन में बड़े ऑर्डर्स के मैच होने से कीमतों में बदलाव आ सकता है। हालांकि, इसके प्रभाव को समझने के लिए आने वाले सत्रों के आंकड़ों पर नजर रखनी होगी।

Stock Market-Nifty Closing

लगातार चौथे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार

निफ्टी क्लोजिंग विवाद के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुआ। अमेरिकी-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार धारणा को मजबूत किया। सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,639.03 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 390.70 अंकों यानी 1.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 24,774.30 के स्तर पर बंद हुआ। यह बाजार की लगातार चौथे सत्र की बढ़त रही। पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 1,850 अंक और निफ्टी लगभग 800 अंक चढ़ चुका है।

आईटी और बैंकिंग शेयरों में दिखी मजबूती

सेक्टर के लिहाज से निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे ज्यादा मजबूत रहा और इसमें 3.28 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, मेटल, ऑटो और पीएसयू बैंक इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, इंडिगो, इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में तेजी रही। वहीं अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी और टेक महिंद्रा जैसे शेयर दबाव में रहे।

निवेशकों की संपत्ति में 4 लाख करोड़ रुपये का इजाफा

बाजार में तेजी का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी दिखा। सोमवार के कारोबार में बीएसई सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 486 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 490 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। पिछले चार कारोबारी सत्रों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 11 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत घरेलू संकेतों और चुनिंदा कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से बाजार को सहारा मिल रहा है।

RBI नीति और वैश्विक संकेतों पर नजर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार की दिशा रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, महंगाई के आंकड़ों, विदेशी निवेश, वैश्विक बाजारों की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय होगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव पर ध्यान देने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में संतुलित निवेश रणनीति अपनाएं।

FAQ...

1. निफ्टी स्पॉट और फ्यूचर्स क्लोजिंग में बड़ा अंतर क्यों दिखा?

नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नियम लागू होने के बाद अंतिम क्लोजिंग प्राइस ऑक्शन के जरिए तय हुई, जिससे स्पॉट और फ्यूचर्स क्लोजिंग के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।

2. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) क्या है?

यह एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें नियमित ट्रेडिंग समाप्त होने के बाद खरीद और बिक्री के ऑर्डर मिलाकर अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय की जाती है, ताकि मूल्य निर्धारण अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो।

3. ट्रेडर्स ने नए नियमों पर सवाल क्यों उठाए?

कई ट्रेडर्स का कहना है कि निफ्टी, बैंक निफ्टी और फ्यूचर्स की क्लोजिंग में असामान्य अंतर देखने को मिला, जो उनके अनुसार पहले बहुत कम देखने को मिलता था। इसी वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हुई।

4. आगे शेयर बाजार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?

बाजार की आगे की चाल भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, कॉर्पोरेट नतीजों, विदेशी निवेश, वैश्विक आर्थिक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

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