RBI का दावाः गांवों से छोटे कारोबार तक नकदी पर भरोसा कायम; चलन में 176 अरब बैंक नोट

खबर सार :-

भारत में डिजिटल भुगतान की तेज रफ्तार ने नकदी की भूमिका को कम जरूर किया है, लेकिन खत्म नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कारोबारों, बुजुर्गों और कम आय वाले वर्गों में कैश की जरूरत अब भी मजबूत है। RBI के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में नोट लगातार चलन में हैं। ऐसे में भविष्य की भुगतान व्यवस्था डिजिटल सुविधा और भरोसेमंद नकदी, दोनों के संतुलन पर आधारित रहेगी।
डिजिटल पेमेंट की रफ्तार तेज, फिर भी ‘कैश’ का क्रेज बरकरार

खबर विस्तार : -

RBI Report: भारत में डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद देश में नकदी की मांग कमजोर नहीं हुई है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से लेकर कम आय वाले वर्ग, बुजुर्गों और छोटे कारोबारियों तक नकदी आज भी भुगतान का अहम माध्यम बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ व्यक्तिगत भुगतान में नकदी की हिस्सेदारी जरूर घटी है, लेकिन चलन में मुद्रा दोहरे अंकों की दर से बढ़ रही है।

डिप्टी गवर्नर ने 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा कि डिजिटल भुगतान और नकदी की बढ़ती मात्रा का यह साथ-साथ चलना भविष्य में करेंसी की मांग का अनुमान लगाना मुश्किल बनाता है। इसका असर मुद्रा के उत्पादन, वितरण और लॉजिस्टिक्स की योजना पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी अभी भी भुगतान का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में साफ-सुथरे नोट, सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और भरोसेमंद मुद्रा व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। उनके मुताबिक, नकदी पर लोगों का भरोसा बनाए रखना सिर्फ भुगतान व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि मौद्रिक संप्रभुता से भी जुड़ा विषय है।

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हर साल 30 अरब तक नए नोट, 21 अरब वापस

RBI के डिप्टी गवर्नर ने बताया कि केंद्रीय बैंक पिछले कुछ वर्षों से छह मूल्यवर्गों में हर साल करीब 28 से 30 अरब बैंक नोटों का उत्पादन कर रहा है। इसके मुकाबले लगभग 21 अरब नोट हर साल चलन से वापस लिए जाते हैं। फिलहाल भारत में करीब 176 अरब बैंक नोट चलन में हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नोटों की संख्या की अंतरराष्ट्रीय तुलना करते समय मूल्यवर्ग की संरचना को ध्यान में रखना जरूरी है। भारत में कम मूल्यवर्ग वाले नोटों की हिस्सेदारी अधिक होने के कारण समान मूल्य के लेनदेन के लिए अन्य देशों की तुलना में ज्यादा नोटों की जरूरत पड़ सकती है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में नोटों की मौजूदगी देश के नकदी प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स के विशाल पैमाने को दर्शाती है। तुलना के लिए, पिछले साल के अंत में अमेरिका में करीब 56 अरब डॉलर मूल्य के नोट और यूरो क्षेत्र में करीब 30 अरब यूरो मूल्य के बैंक नोट चलन में थे। हालांकि इन आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं के मुद्रा ढांचे और नोटों के मूल्यवर्ग को ध्यान में रखना जरूरी है।

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नोटों की उम्र बढ़ाने की तैयारी

नकदी की लगातार मांग को देखते हुए RBI अब बैंक नोटों की टिकाऊपन बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इसके तहत नोटों की उम्र बढ़ाने के लिए सतही कोटिंग जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। वहीं, कम मूल्यवर्ग के नोटों के लिए पॉलिमर नोट के इस्तेमाल की संभावना भी तलाश की जा रही है। केंद्रीय बैंक का फोकस केवल नोटों की गुणवत्ता और टिकाऊपन तक सीमित नहीं है। वह नकदी चक्र के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए करेंसी वितरण नेटवर्क को अधिक कुशल बनाने और पुराने या अनुपयोगी बैंक नोटों से बने ब्रिकेट्स के निपटान में वैल्यू चेन के अगले स्तर तक बेहतर प्रबंधन की योजना पर जोर दिया जा रहा है।

डिजिटल क्रांति के बीच कैश की अलग भूमिका

भारत में UPI और दूसरे डिजिटल भुगतान माध्यमों ने लेनदेन के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। इसके बावजूद नकदी की उपयोगिता खत्म नहीं हुई है। अलग-अलग आय वर्ग, भौगोलिक क्षेत्रों और कारोबारी गतिविधियों में भुगतान की जरूरतें अलग होने के कारण नकदी और डिजिटल भुगतान दोनों समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं। RBI के बयान से संकेत मिलता है कि भारत की भुगतान अर्थव्यवस्था निकट भविष्य में पूरी तरह कैशलेस होने के बजाय मिश्रित स्वरूप में आगे बढ़ सकती है। डिजिटल भुगतान सुविधा, गति और पारदर्शिता बढ़ा रहा है, जबकि नकदी अब भी ऐसे लोगों और क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां डिजिटल माध्यमों तक पहुंच या उनका इस्तेमाल सीमित है। इस बदलते भुगतान परिदृश्य में RBI के सामने चुनौती केवल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की नहीं, बल्कि देश में नकदी की उपलब्धता, गुणवत्ता, सुरक्षा और वितरण को भी कुशल बनाए रखने की है। यही वजह है कि डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ करेंसी मैनेजमेंट को आधुनिक बनाने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....

1. डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद भारत में नकदी क्यों बढ़ रही है?

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों, छोटे कारोबारों, बुजुर्गों और कम आय वाले वर्गों में नकदी का इस्तेमाल अब भी व्यापक है।

2. भारत में कितने बैंक नोट चलन में हैं?

RBI के अनुसार, फिलहाल भारत में करीब 176 अरब बैंक नोट चलन में हैं।

3. RBI बैंक नोटों को लेकर क्या बदलाव कर रहा है?

RBI नोटों की उम्र बढ़ाने के लिए सतही कोटिंग और कम मूल्यवर्ग के लिए पॉलिमर नोट जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।

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