WEF रिपोर्ट: FY27 में 6.7% की दर से बढ़ेगी भारत की GDP, घरेलू मांग बनी ताकत

खबर सार :-

WEF के सितंबर सर्वेक्षण में भारत की 2026-27 GDP वृद्धि 6.7% रहने का अनुमान है। 74% विशेषज्ञ मजबूत वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि रोजगार और महंगाई को लेकर भी हालिया आकलन अपेक्षाकृत स्थिर तस्वीर दिखाते हैं।
74% चीफ इकोनॉमिस्ट्स को मजबूत ग्रोथ की उम्मीद, घरेलू मांग बनी ताकत

खबर विस्तार : -

India GDP Growth: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की सितंबर 2026 की Chief Economists Outlook रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं और घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों की प्रमुख ताकत है।

WEF ने अपनी रिपोर्ट में दुनिया के 10 प्रमुख क्षेत्रों की आर्थिक परिस्थितियों का आकलन किया है। इनमें अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन, मध्य पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका, मध्य एशिया और सब-सहारा अफ्रीका शामिल हैं। इस आकलन के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के 92 मुख्य अर्थशास्त्रियों की राय ली गई।

भारत की ग्रोथ को लेकर बढ़ा भरोसा

रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर विशेषज्ञों के रुख में मई के मुकाबले उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सितंबर में 74 प्रतिशत चीफ इकोनॉमिस्ट्स ने भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई। मई में ऐसा मानने वाले विशेषज्ञों का अनुपात 52 प्रतिशत था। वहीं, 98 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि कम से कम मध्यम स्तर की या उससे बेहतर रहेगी। रिपोर्ट में घरेलू मांग को भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में शामिल किया गया है। यह आकलन ऐसे समय में आया है जब भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट का सर्वेक्षण 20 अगस्त 2026 को पूरा हो चुका था। इसके बाद 31 अगस्त को जारी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई।

रोजगार बाजार में स्थिरता

रोजगार के मोर्चे पर विशेषज्ञों का आकलन अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति की ओर इशारा करता है। करीब 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। वहीं 17 प्रतिशत विशेषज्ञ बेरोजगारी बढ़ने और 13 प्रतिशत इसके घटने का अनुमान लगा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 5 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई। WEF के अनुसार, ये आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के बीच श्रम बाजार फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर है। हालांकि, रोजगार सृजन की गति बनाए रखना आगे भी महत्वपूर्ण रहेगा।

महंगाई की चिंता में आई कमी

महंगाई को लेकर भी विशेषज्ञों की चिंता मई के मुकाबले कम हुई है। सितंबर के सर्वेक्षण में 55 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने अगले 12 महीनों में मध्यम महंगाई की उम्मीद जताई, जबकि 45 प्रतिशत ने उच्च महंगाई की संभावना व्यक्त की। मई में 61 प्रतिशत विशेषज्ञों ने उच्च या बहुत उच्च महंगाई का जोखिम जताया था। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई बढ़कर 4.8 प्रतिशत रही। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन 2 से 6 प्रतिशत के स्वीकार्य दायरे के भीतर है।

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RBI की नीति में बड़े बदलाव की उम्मीद कम

मौद्रिक नीति को लेकर 67 प्रतिशत विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं 24 प्रतिशत विशेषज्ञ मौद्रिक नीति के और सख्त होने की संभावना देखते हैं। अगस्त में RBI ने नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था और अपना रुख तटस्थ रखा था। इससे संकेत मिलता है कि विशेषज्ञ निकट अवधि में मौद्रिक नीति में बड़े बदलाव की अपेक्षा नहीं कर रहे हैं।

राजकोषीय नीति भी स्थिर रहने का अनुमान

राजकोषीय नीति को लेकर भी अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने स्थिरता का अनुमान जताया है। सर्वेक्षण में 72 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अगले 12 महीनों में राजकोषीय नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं 22 प्रतिशत ने कुछ नरम रुख अपनाए जाने की संभावना जताई।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत पर नजर

भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक संस्थानों का आकलन हाल के महीनों में मजबूत हुआ है। WEF के सर्वेक्षण के बाद पहली तिमाही के मजबूत GDP आंकड़े सामने आए। इसके अलावा मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया। मूडीज के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। WEF की रिपोर्ट भी घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार और महंगाई को लेकर घटती चिंताओं को भारत की आर्थिक तस्वीर के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में रेखांकित करती है।

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