US Economy employment Data: अमेरिका की अर्थव्यवस्था को लेकर नए संकेत चिंताजनक नजर आ रहे हैं। फरवरी महीने में देश में कुल 92,000 नौकरियां खत्म हो गईं, जिससे श्रम बाजार में कमजोरी के संकेत मिले हैं। यह आंकड़े अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नॉनफार्म पेरोल में पिछले महीने की तुलना में 92 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले पांच महीनों में यह तीसरी बार है जब रोजगार में गिरावट देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गति धीमी होने की ओर इशारा कर सकती है। वहीं देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो श्रम बाजार में बढ़ते दबाव को दर्शाती है।
फरवरी में सबसे ज्यादा असर हेल्थकेयर सेक्टर में देखने को मिला, जहां करीब 28,000 नौकरियां खत्म हो गईं। रिपोर्ट के अनुसार इसका एक बड़ा कारण एक प्रमुख हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में हुई हड़ताल बताया जा रहा है। इस हड़ताल के कारण कई अस्पतालों और संबंधित सेवाओं में काम प्रभावित हुआ, जिससे कर्मचारियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य कई सेक्टरों में भी नौकरियों में कमी देखने को मिली, जिससे रोजगार बाजार का दबाव और बढ़ गया।
खराब मौसम भी रोजगार गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। फरवरी में अमेरिका के कई इलाकों में रिकॉर्ड बर्फबारी और तेज ठंड देखने को मिली, जिससे कई क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ। इसका असर खासतौर पर रेस्टोरेंट और निर्माण उद्योग पर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार रेस्टोरेंट सेक्टर में करीब 30,000 नौकरियां कम हुईं, जबकि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 11,000 नौकरियां घट गईं। मौसम के कारण कई परियोजनाएं और सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहीं, जिससे रोजगार में गिरावट आई।

तकनीकी क्षेत्र भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा। इन्फॉर्मेशन सर्विसेज सेक्टर में 11,000 नौकरियां कम हुईं, जिसका एक बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी संरचनात्मक बदलावों को माना जा रहा है। कंपनियां एआई आधारित सिस्टम अपनाने के कारण कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी 12,000 नौकरियां खत्म हो गईं। उद्योग जगत में लागत बढ़ने और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण उत्पादन गतिविधियों पर दबाव बढ़ रहा है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ये आंकड़े भविष्य में आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकते हैं। पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ फेलो गैरी क्लाइड ने कहा कि श्रम बाजार के कमजोर होने के संकेत काफी समय से मिल रहे थे और अब यह आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी बड़े आर्थिक संकट की संभावना कम है, लेकिन आने वाले महीनों में रोजगार वृद्धि की रफ्तार धीमी रह सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि टैक्स और टैरिफ रिफंड अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक पक्ष हो सकते हैं, जबकि बढ़ती ऊर्जा कीमतें चिंता का विषय हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रोजगार में गिरावट के बावजूद वेतन में वृद्धि देखी गई है। औसत प्रति घंटे की कमाई महीने-दर-महीने 0.4 प्रतिशत और साल-दर-साल 3.8 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी आर्थिक दबाव को बढ़ा सकती है। इस बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व श्रम बाजार की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और ब्याज दरों में कटौती के सही समय का इंतजार कर रहा है।
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