बांग्लादेश से रिश्ते बनेंगे बेहतर, शेख हसीना मुद्दे पर सावधानी बरतें: जेएनयू प्रोफेसर

खबर सार :-

मो युनुस ने पाकिस्तान से रिश्ते दूसरी तरह से बनाना शुरू कर दिया था। वह बांग्लादेश के इतिहास को बदलना चाहते थे। भारत के बनाए सालों के संबंध पर उन्होंने कुछ ही दिनों में पानी फेर दिया। अब माहौल बदल रहा है। रिश्ते बेहतर बनाने में हमारा भी फायदा है।
भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव से कई चीजें अटकीं, तारिक की यात्रा से कम होंगी दूरियां: जेएनयू प्रोफेसर

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: डॉ. मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश के बीच का माहौल खराब हुआ, तब से कुछ चीजें अटकी हुई हैं। दो साल तक जब यूनुस वहां थे, वो अंतरिम सरकार में मुख्य सलाहकार के तौर पर नियुक्त हुए। उनकी जिम्मेदारी थी कि वह कानून व्यवस्था बनाकर चुनाव कराते, लेकिन उनकी अपनी महत्वकांक्षा के कारण बांग्लादेश में जमीनी स्तर पर भारत से दूरियां बढाई। यह बात जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने कही।

युनुस ने पाकिस्तान से रिश्ते दूसरी तरह से बनाना शुरू कर दिया था। वह बांग्लादेश के इतिहास को बदलना चाहते थे। भारत के बनाए सालों के संबंध पर उन्होंने कुछ ही दिनों में पानी फेर दिया। उनको चीन के साथ दोस्ती बढ़ाने में भलाई लगी। कुछ ऐसे हालात बना दिए गए कि उन दो सालों में माहौल बदल गया। जमीनी स्तर पर केवल अपनी महत्वकांक्षा के चलते ऐसा किया गया। इस खाई को पाटने में समय लगेगा। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने कहा कि बांग्लादेश प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत दौरे पर आएंगे। वह एक अच्छा माहौल चाहते हैं। डॉ. स्वर्ण सिंह ने उम्मीद जताई है कि पीएम रहमान के भारत आने और पीएम मोदी से सीधी बातचीत की 50 फीसदी से ज्यादा संभावना है।

पूर्व पीएम शेख हसीना के मुद्दे पर संयम बरतना है जरूरी

यदि ऐसा होता है तो दोनों देशों के पास तालमेल सुधारने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। प्रोफेसर सिंह के मुताबिक उनके दौरे के दौरान शेख हसीना के मुद्दे पर संयम बरतना जरूरी है। प्रोफेसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर कहा, जब भी चुनाव होकर वहां नए राष्ट्राध्यक्ष चुने जाते हैं तो ऐसी उम्मीद बनती है कि वो पहली विदेश यात्रा भारत की करेंगे। यह बात सत्य भी साबित हुई और इतिहास भी रहा। एक पड़ोसी देश, जिसके रिश्ते बेहतर रहे, उससे उम्मीद भी ऐसी ही होनी चाहिए। लेकिन 2024 से दूरियां बढ़ीं। जिस तरह से माहौल बदला और भारत ने वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में रहने दिया, बांग्लादेश में नाराजगी देखने को मिली। जमात-ए-इस्लामी या नेशनल सिटीजन पार्टी ने इस मामले पर खूब राजनीति की।

तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने तो माहौल भी बदलने लगा

वह दौर बदला और फिर तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने तो माहौल भी बदलने लगा। अपेक्षा की जा रही है कि अब शायद चुनी हुई सरकार आई है तो संबंध अच्छे हो सकते हैं। एक बदलाव और देखा जा रहा है, वह यह कि पाकिस्तान की ओर झुकाव नहीं है। तारिक रहमान ने शुरू में कहा भी था कि वह विदेश नीति को बेहतर बनाने की दिशा में काम करेंगे। लोगों के हित को सामने रखकर सारे निर्णय लेंगे। डॉ. स्वर्ण सिंह कहते हैं कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत ने अपने प्रतिनिधि को भेजा और बाद में उच्चायुक्त भी वहां पहुंचे। तारिक के लिए दो बार निमंत्रण भी भेजा जा चुका है। इनमें एक बार द्विपक्षीय वार्ता और दूसरी बार ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन के लिए। हालांकि, वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव है।

कुछ लोग भारत को छोड़कर चीन या पाकिस्तान से जुड़ना चाहेंगे

कुछ चीजों को लेकर मन मोटाव है। उनकी मांग है कि शेख हसीना का प्रत्यार्पण हो। कुछ लोग उनकी पार्टी या देश में ऐसे भी होंगे, जो भारत को छोड़कर चीन या पाकिस्तान से जुड़ना चाहेंगे, उनको भारत से ज्यादा दिलचस्पी नहीें होगी। डॉ सिंह कहते हैं कि जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक ये कोशिश की जाए कि आक्रोश न बढ़े। बातचीत के लिए अच्छा महौल बनना चाहिए। 50 फीसदी से ज्यादा उम्मीद भी की जा सकती है। संभावना है कि 20-21 तारीख को पीएम तारिक रहमान भारत आएंगे और पीएम मोदी से सीधी बातचीत होगी। पीएम तारिक रहमान ने अब तक तो ये कहा कि वो संतुलन बनाकर चलेंगे। यह बात कई बार कही कि भारत से वो रिश्ते सुधारना चाहते हैं। हसीना ने अपनी हाल की बातचीत में ये स्पष्ट कर दिया कि वो दिसंबर तक वापस अपने देश चली जाएंगी।

रिश्ते बेहतर बनाने में भारत से ज्यादा फायदा बांग्लादेश को

यदि ऐसा होता है तो भारत के लिए सकारात्मक संकेत है। क्योंकि भारत भी परोक्ष रूप से ऐसा ही चाहता है। भारत के साथ बांग्लादेश की जमीनी सीमा 100 फीसदी भारत के साथ है। जब 15 साल तक शेख हसीना की सरकार वहां रही, उनके संबंध भारत के साथ अच्छे थे। भारत के साथ ही नहीं, पीएम मोदी के साथ भी उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे थे। रिश्ते बेहतर बनाने में भारत से ज्यादा फायदा बांग्लादेश को विकास के मामले पर होगा।
 तारिक के भारत आने पर दोनों देशों के संबंधों बेहतर हों और तीस्ता नदी पर दोनों देशों के बीच समझ बने। गंगा नदी पर 1990 में समझौता 30 साल के लिए हुआ था। इस संधि के भी 29 साल पूरे हो रहे हैं। इसपर भी बातचीत शुरू होनी है। दूसरी ओर यह भी ध्यान रखना है कि इतिहास में बांग्लादेश की एनसीपी का रुझान चीन की तरफ ज्यादा रहा है। यह ऐस कारण हैं जो पीएम को सीमाओं में बांध देती हैं। हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध को लेकर उन्होंने कहा, “भारत और बांग्लादेश के पास अपनी तालमेल सुधारने के बहुत से विकल्प है। यदि ऐसा होता है तो विकास के लिए भी यह जरूरी है।

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