अमेरिका में अब AI का नाम होगा सुपर इंटेलिजेंस, Trump ने किए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर

खबर सार :-

टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ दोपहर में भोज के दौरान उच्च स्तरीय बैठक की गई। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने एआई का नाम बदलने का निर्णय सुनाया।
AI का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर सुपर इंटेलिजेंस करेंगेःTrump

खबर विस्तार : -

वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नई पहचान मिलने जा रही है। इसके नाम का बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेशों पर होने जा रहा है। नए आदेश में यह सुपर इंटेलिजेंस के नाम से जाना जाएगा। इस संबंध में एक घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में की है। एक कार्यक्रम में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम बदलने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी कर दिए। 

राष्ट्रपति ने टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ दोपहर में भोज किया। इस दौरान उच्च स्तरीय बैठक भी की गई थी। इसके बाद ट्रंप की ओर से कार्यकारी आदेश जारी किए गए। बैठक में स्पेसएक्स और टेस्ला के एलन मस्क, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, गूगल के सुंदर पिचाई और एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग के अलावा कई प्रमुख सीईओ थे। बैठक के दौरान लिए गए निर्णय व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए।

बदलाव कानून की अधिकतम अनुमति के अनुसार होगा

इसके अनुसार, आदेश में कहा गया है कि यह बदलाव कानून की अधिकतम अनुमति के अनुसार लागू होगा। मौजूदा नियमों, शर्ताें और पुराने दस्तावेज में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।  डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर सुपर इंटेलिजेंस कर देंगे। उन्होंने इंडस्ट्री के खुद नियम बनाने (सेल्फ-रेगुलेशन) का समर्थन किया और चीन के मुकाबले अमेरिका की तकनीकी बढ़त को बनाए रखने का वादा किया।

इससे पहले उन्होंने टेक्नोलॉजी लीडर्स के साथ एक मीटिंग भी की। कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना होगा और डेटा सेंटर स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत करेंगे। नाम बदलने का कारण भी बताया गया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि आर्टिफिशियल शब्द इस टेक्नोलॉजी का सही वर्णन नहीं करता है। बाद में उन्होंने कहा कि प्रशासन एसआई शॉर्ट-फॉर्म का इस्तेमाल करेगा। यह बहुत ज़्यादा इंटेलिजेंस है। उनका मानना है कि नाम बदलने के इस प्रस्ताव से टेक्नोलॉजी के विस्तार और उसमें अमेरिका की लीडरशिप बनाए रखने की क्षमता बढ़ जाएगी। 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेल्फ-रेगुलेशन बहुत अधिक होना चाहिए। उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और एफबीआई का जिक्र किया जो गलत कामों से निपट सकते हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि वह काम किस तरह करता है। 

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कंपनियों को मुनाफा चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

टेक्नोलॉजी कंपनियों को ईमानदारी से काम करते हुए देखने की चाहत में कहा कि लोग खतरनाक रास्ता अपनाते हैं तो सरकारी एजेंसियां रोक सकती हैं। उनकी बातचीत में चीन निशाने पर रहा। उन्होंने कहा कि चीन के साथ ऐसे टेक्नोलॉजी सहयोग की जरूरत नहीं है। इससे अमेरिकी जानकारी और राज उजागर हो सकते हैं। किसी शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि किसी ने कहा कि चलो चीन के साथ मिलकर काम करते हैं। लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं, तो हम बहुत सारे राज उन्हें दे देंगे। वह अपने समकक्ष चीन को मानते हैं। इसके सिवाय किसी को नहीं। मुकाबला अमेरिका और चीन के बीच है।

चीन को पीछे ही रखना चाहता है अमेरिका

 ट्रंप ने यह बात कही भी कि हम चीन और बाकी सभी से आगे हैं और मैं चाहता हूं कि यह स्थिति बनी रहे। इस दौरान उन्होंने शी के साथ की मुलाकात का भी जिक्र किया। यह बात मीडिया के जरिए फैल गई। डोनाल्ड चाहते हैं कि चीन के साथ वह काम करें। चीन भी ऐसा चाहता है, लेकिन डोनाल्ड की चाहत में चीन को पीछे रखना ही है। यह बात शी जिनपिंग को पसंद नहीं।

इसीलिए ट्रंप ने कहा कि टेक्नोलॉजी के बारे में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की थी, लेकिन बातचीत को सीमित रखा क्योंकि वह अमेरिका की बढ़त को सुरक्षित रखना चाहते थे। अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियां अन्य देशों की डेटा सेंटर के साथ काम करना चाह रही हैं। संभावित मदद में ऊर्जा की सप्लाई, शिक्षा और शिक्षकों व अन्य निवासियों के लिए आर्थिक सहायता शामिल हो सकती है। आर्थिक समृद्धि के लिए डेटा सेंटर वाले लोग अधिक अमीर हो गए हैं। यद्यपि इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं हैं, यह बातंें ट्रंप के बयान का हिस्सा हैं। 

70 सालों से एआई पर काम करने का ट्रंप का दावा

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन अब एआई के स्थान पर एसआई शब्द का प्रयोग करेगा। किसी भी संदर्भ में एआई के उपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जन्मभूमि है। अमेरिका इस नई तकनीक को आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका 70 से ज़्यादा सालों से इसके विकास में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकियों को वह हासिल करने के लिए सशक्त बनाता है जो पहले असंभव था। जुलाई 2025 में व्हाइट हाउस ने अमेरिका का एआई एक्शन प्लान जारी किया था। इसमें एसआई इनोवेशन को तेज करने का संकल्प लिया गया था।

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