नेपाल में त्योहार से पहले चीन के साथ जमीनी व्यापार ठप, बारिश-बाढ़ के बाद बॉर्डर क्रॉसिंग बंद
खबर सार :-
नेपाल में बारिश और बाढ़ का असर चीन के साथ व्यापार पर भी पड़ा है। नेपाल-चीन बाॅर्डर क्राॅसिंग बंद होने से त्योहारी सीजन से पहले आपूर्ति पर संकट छा गया है।
खबर विस्तार : -
काठमांडू: नेपाल में लगातार तीन दिनों की बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्तर में मौजूद तीनों मुख्य बॉर्डर क्रॉसिंग पर आवाजाही रुक गई है, जिससे नेपाल और चीन के बीच जमीन के रास्ते होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। त्योहारों का मौसम बस दो हफ्ते दूर है, ऐसे में इन बॉर्डर पॉइंट्स के बंद होने से बाजार में सामान की सप्लाई पर असर पड़ा है।
नेपाल और चीन के बीच तातोपानी-खासा, रसुवागढ़ी और कोराला बॉर्डर क्रॉसिंग अभी बंद हैं। बॉर्डर पॉइंट्स तक जाने वाली सड़कों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने के कारण इन रास्तों से बड़े पैमाने पर माल का ट्रांसपोर्ट मुमकिन नहीं है। कस्टम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल ने चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में ही चीन से 76.40 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का सामान आयात किया था; इसलिए, तीनों मुख्य व्यापारिक मार्गों के बंद होने से व्यापार पर काफी असर पड़ा है।
तातोपानी और रसुवागढ़ी पहले ही बंद
चीन ने भूस्खलन के खतरे के कारण तातोपानी-खासा क्रॉसिंग को पहले ही बंद कर दिया था। इसके बाद, 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में बाढ़ के कारण रसुवागढ़ी क्रॉसिंग को भारी नुकसान पहुंचा। इन दो मुख्य क्रॉसिंग के बंद होने के बाद, मुस्तांग में कोराला क्रॉसिंग नेपाल-चीन व्यापार के लिए एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर उभरा था। हालांकि, काली गंडकी नदी में बाढ़ के कारण अब कोराला तक सड़क संपर्क भी टूट गया है। बाढ़ के पानी ने काली गंडकी कॉरिडोर और मिड-हिल हाईवे पर कई अहम पुलों तक जाने वाली सड़कों को बहा दिया। हालांकि कोराला बॉर्डर क्रॉसिंग और कस्टम ऑफिस सुरक्षित हैं, लेकिन बेनी-जोमसोम सड़क पर पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण माल ढोने वाले वाहनों की आवाजाही रुक गई है।
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15 दिनों में 434 कंटेनर और 641 ईवी पहुंचे
तातोपानी और रसुवागढ़ी क्रॉसिंग के बंद होने के बाद कोराला बॉर्डर पॉइंट पर व्यापार का दबाव काफी बढ़ गया। 10 से 25 सितंबर के बीच यानी सिर्फ 15 दिनों में कोराला के रास्ते 434 कंटेनर और 641 इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नेपाल पहुंचे। भाद्र महीने के आखिरी हफ़्ते तक मस्टैंग कस्टम्स ऑफिस ने चालू वित्त वर्ष के लिए 2.31 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू इकट्ठा कर लिया था। पिछले वित्त वर्ष में, कोराला क्रॉसिंग के जरिए 14.41 अरब नेपाली रुपये का सामान और 3,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां नेपाल आई थीं। लेकिन अब, सड़क संपर्क टूटने की वजह से अरबों रुपये का व्यापार रुक गया है।
त्योहारी सामान की सप्लाई पर असर
बॉर्डर क्रॉसिंग बंद होने से चीन से कपड़े, जूते, बैग, इलेक्ट्रॉनिक सामान और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सप्लाई रुक गई है। इससे व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों में चिंता बढ़ गई है। RB कॉम्प्लेक्स बिजनेस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट परशुराम दहल ने बताया कि त्योहारी सीजन के लिए ऑर्डर किए गए सामान का सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक काठमांडू पहुंचा है। उन्होंने कहा कि त्योहारी स्टॉक रास्ते में ही फंसा हुआ है। वेयरहाउस में रखे सामान को कोराला क्रॉसिंग के जरिए लाने की कोशिशें की गई थीं, लेकिन वह रास्ता भी अब बंद हो गया है। दहल के मुताबिक, समस्या सिर्फ कस्टम्स प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है; अमेरिकी डॉलर की बढ़ती एक्सचेंज रेट और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत का भी प्रोडक्ट की कीमतों पर असर पड़ रहा है। सड़क बंद होने से ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ रही है, इसलिए आने वाले सामान की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
भारत से सामान मंगाने की कोशिशें
बड़े कार्गो ट्रकों के चलने में रुकावट के बाद, कुछ व्यापारियों ने छोटी गाड़ियों का इस्तेमाल करके भारत से सामान मंगाना शुरू कर दिया है। हालांकि, दहल के अनुसार, भारतीय सामान चीनी प्रोडक्ट्स की तुलना में ज्यादा महंगा है और छोटी गाड़ियों से ट्रांसपोर्टेशन की लागत भी ज्यादा आती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टॉक और स्थानीय रूप से बने सामान की वजह से बाजार को कुछ राहत मिली है, भले ही चीनी इंपोर्ट में रुकावट आई है। खराब सड़कों की वजह से काठमांडू के बाहर के थोक व्यापारी स्टॉक खरीदने के लिए राजधानी नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि कुछ व्यापारी WhatsApp और सोशल मीडिया के जरिए ऑर्डर ले रहे हैं, लेकिन कारोबार की रफ्तार धीमी बनी हुई है। दहल ने बताया कि लगातार तीन सालों से सितंबर में बारिश की वजह से सड़कें खराब हुई हैं, जिससे व्यापार में रुकावट आई है। उन्होंने कहा कि हर बार इसका खामियाजा व्यापारियों को ही भुगतना पड़ता है और एक बार फिर सभी को प्राकृतिक आपदा के असर का सामना करना पड़ रहा है।
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