नेपाल में मूसलाधार बारिश से बिहार की नदियों में बढ़ा जलस्तर, कई गांवों में बाढ़, सीएम ने देखी स्थिति
खबर सार :-
बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति है। नेपाल में मूसलाधार बारिश के बाद गंडक बैराज से पानी छोड़ने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है।
खबर विस्तार : -
पटना: नेपाल के कैचमेंट एरिया में हुई भारी बारिश का असर उत्तर बिहार की नदियों पर साफ दिख रहा है। पश्चिमी चंपारण जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 28 सितंबर को 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद, बाढ़ का पानी तेजी से पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के निचले इलाकों में फैल रहा है।
पश्चिमी चंपारण के बगहा में गंडक नदी का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया, जिसे स्थानीय स्तर पर अब तक का सबसे ज्यादा स्तर बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बैराज से पानी का बहाव 13 घंटे तक 5 लाख क्यूसेक से ज्यादा रहा और 32 घंटे तक 4 लाख क्यूसेक से ऊपर बना रहा; इसका असर नदी के निचले इलाकों में साफ दिख रहा है। जल संसाधन विभाग की 30 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी के दबाव के कारण चंपारण तटबंध तीन जगहों पर टूट गया है। खबर है कि पानी बैरिया के बथुवरिया और फुलियाखाद समेत कई आस-पास के गाँवों में फैल गया है। ग्रामीणों को ऊंची और सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें कटाव को रोकने और तटबंध की मरम्मत के काम में जुटी हुई हैं।
रेवाघाट पर नदी का पानी मंदिर परिसर तक पहुंचा
गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर मुजफ्फरपुर के सरायिया इलाके में भी चिंता का कारण बना हुआ है। रेवाघाट पर नदी का पानी मंदिर परिसर तक पहुंच गया है। प्रशासन ने नदी के किनारे वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाने और राहत व बचाव कार्यों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के रियल-टाइम डेटा से पता चलता है कि 29 सितंबर की रात को पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 48.85 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है। इसका मतलब है कि नदी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। दीघा घाट पर पानी का स्तर 49.69 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी के स्तर से ऊपर है। हाथीदह में गंगा का जलस्तर 41.67 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है।
सुल्तानगंज में जलस्तर खतरे के निशान से ज्यादा
भागलपुर जिले के कहलगांव में गंगा का जलस्तर 30.74 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 31.09 मीटर है। सुल्तानगंज में जलस्तर 35.08 मीटर था, जो 34.50 मीटर के खतरे के निशान से ज्यादा है। आजमाबाद में भी नदी का जलस्तर चेतावनी के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। इसलिए, भागलपुर और उसके आस-पास के नदी किनारे वाले इलाकों में निगरानी जारी है।
सुपौल के बीरपुर में कोसी नदी का जलस्तर 75.29 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 74.70 मीटर है। खगड़िया के बलतारा में कोसी का जलस्तर 35.20 मीटर था, जो 33.85 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक नदी भी चेतावनी के निशान से ऊपर बह रही है। सीतामढ़ी के धेंग पुल पर बागमती नदी का जलस्तर 70.70 मीटर दर्ज किया गया, जो 70 मीटर के चेतावनी के निशान से ज्यादा है। मुजफ्फरपुर में बागमती का जलस्तर रुन्नीसैदपुर में 56.19 मीटर और बेनीबाद में 49.92 मीटर दर्ज किया गया। सिवान के दरौली में घाघरा नदी का जलस्तर 61.15 मीटर था, जो 60.82 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है।
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15 जिलों में लगभग 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य सरकार के आंकड़ों पर आधारित उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर के मध्य तक बिहार के 15 जिलों में लगभग 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे। 15 सितंबर की एक रिपोर्ट में लगभग 49.67 लाख प्रभावित लोगों की संख्या बताई गई थी। यह आंकड़ा उस समय 15 जिलों, 88 ब्लॉक और सैकड़ों पंचायतों में बाढ़ के असर को दिखाता है। सितंबर में बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। हालाँकि, 30 सितंबर तक इन सभी जिलों में खतरे का स्तर एक जैसा नहीं है; नेपाल-गंडक संकट का सीधा असर मुख्य रूप से उत्तरी बिहार के निचले इलाकों वाले जिलों पर पड़ रहा है।
3 से 5 अक्टूबर तक आंधी-तूफान की संभावना
IMD के पटना केंद्र से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर, 1 अक्टूबर और 2 अक्टूबर के लिए बिहार में मौसम से जुड़ी कोई चेतावनी नहीं है। हालाँकि, 3, 4 और 5 अक्टूबर को आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है। इसलिए, अभी बाढ़ का मुख्य खतरा नई भारी बारिश से नहीं, बल्कि नदियों में पहले से मौजूद अतिरिक्त पानी, तटबंधों पर दबाव और निचले इलाकों में पानी के स्तर से है।
गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंध क्षतिग्रस्त
बिहार में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के बीच, गोपालगंज ज़िले के बैकुंठपुर ब्लॉक के शीतलपुर में एक तटबंध (embankment) क्षतिग्रस्त हो गया है। तटबंध टूटने के बाद, पानी तेजी से निचले इलाकों में फैलने लगा है, जिससे आस-पास के गांवों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए काम कर रही हैं। इस दरार के कारण शीतलपुर के अलावा फैज़ुल्लापुर, खोमहरीपुर, सलेमपुर, नरवार, बहरामपुर, गंभारी के कुछ हिस्सों, बैकुंठपुर, चिउटाहा और बनौरा के गांवों तक बाढ़ का पानी फैलने की आशंका है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
सीएम सम्राट ने किया चंपारण का हवाई सर्वे
इस बीच, गंडक नदी के तेज बहाव के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति का आकलन करने के लिए चंपारण में बाढ़ प्रभावित और संभावित रूप से संवेदनशील इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने प्रशासन को राहत, बचाव और जरूरी इंतजामों को लेकर सतर्क और सक्रिय रहने का निर्देश दिया। हाल ही में गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुज़फ़्फ़रपुर और वैशाली सहित कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जल संसाधन विभाग के बुधवार के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 1,31,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था; सुबह 9 बजे तक यह आंकड़ा घटकर 129,000 क्यूसेक हो गया और सुबह 10 व 11 बजे भी इसी स्तर पर बना रहा। विभाग ने बैराज पर पानी के बहाव के ट्रेंड को स्थिर बताया है।
वहीं, सोन बैराज (इंद्रपुरी) पर पानी के बहाव की मात्रा में लगातार कमी के कारण बहाव का ट्रेंड 'घटता हुआ' दर्ज किया गया है। गंडक के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन निचले इलाकों में लगातार निगरानी रख रहा है। आने वाले घंटों में पानी के फैलाव पर नजर रखने के साथ-साथ राहत और बचाव कार्यों को तेज करने की तैयारी चल रही है।
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