बिहार में ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम का शुभारंभ, सीएम ने बच्चों को अन्नप्राशन कराकर दिया स्वस्थ्य बचपन का संदेश

खबर सार :-

बिहार के 1,15,064 आंगनवाड़ी केंद्रों पर मंगलवार को ‘आंगन मिलन कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। सीएम सम्राट चौधरी ने अन्नप्राशन समारोह में शामिल होकर स्वस्थ बचपन का संदेश दिया।
बिहार के CM सम्राट चौधरी ने आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने पर दिया जोर

खबर विस्तार : -

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को फुलवारीशरीफ हाई स्कूल परिसर में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 137 में बच्चों के लिए 'अन्नप्राशन' (पहली बार ठोस आहार खिलाने की रस्म) समारोह में भाग लेकर स्वस्थ बचपन का संदेश दिया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राज्य में आंगनवाड़ी सेवाओं को और मजबूत करने तथा बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष जोर देने की बात कही।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर राज्यव्यापी 'आंगन का मिलन' कार्यक्रम का उद्घाटन किया। 'आंगन का मिलन' कार्यक्रम मंगलवार को राज्यभर के सभी 1,15,064 आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान, उपमुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रही सुविधाओं और गतिविधियों के बारे में जानकारी लेने के लिए बच्चों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (सेविकाओं) और लाभार्थियों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों के बारे में पूछा, उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें मिठाइयां बांटीं।

सीएम ने स्टालों का निरीक्षण किया 

इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग और एकीकृत बाल विकास सेवा निदेशालय (ICDS) द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' और 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक सौंपे। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं के लिए 'गोद भराई' समारोह में भाग लिया और बच्चों के लिए 'अन्नप्राशन' समारोह संपन्न किया। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (सेविकाओं और सहायिकाओं) और आशा कार्यकर्ताओं (आशा दीदियों) को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। लाभार्थियों के बीच पोषण किट भी बांटी गईं। कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने 'सुपोषित बचपन की रसोई' (अच्छे पोषण वाले बचपन के लिए रसोई) नामक एक पुस्तिका का विमोचन किया।

लाभार्थियों ने साझा किए अपने अनुभव

'आंगन का मिलन' कार्यक्रम के दौरान, 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' और 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए और बेहतर सुविधाएं कैसे दी जाएं, इस पर लाभार्थियों और स्थानीय लोगों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। सरकार जरूरी सुधार लागू करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार माताओं और बच्चों को गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद भी बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है। जिन आंगनवाड़ी केंद्रों के पास अपनी इमारतें नहीं हैं, उनके लिए इमारतें बनाने की भी कोशिश की जाएगी। सरकार का मकसद माताओं और बच्चों की सेहत का ध्यान रखना और साथ ही बच्चों को अच्छी शुरुआती शिक्षा और सही पोषण देना है।

गांवों के बच्चों को जोड़ने के निर्देश

उन्होंने बताया कि राज्यभर में लगभग 1.15 लाख आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर बच्चों और परिवारों की सेवा में लगे हुए हैं। सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन, फल ​​और दूध देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों से कहा कि वे गांव और आस-पास के इलाकों के सभी छोटे बच्चों को इन केंद्रों से जोड़ने की कोशिश करें। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर समाज के बच्चे मजबूत होंगे, तो राज्य और देश भी मजबूत होंगे।

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बिना रुकावट के चलता रहेगा 'आंगन का मिलन'

उन्होंने कहा कि 'आंगन का मिलन' कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू की गई जन-कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है और सरकार यह पक्का करने की कोशिश कर रही है कि इन योजनाओं का फायदा सही लाभार्थियों तक पहुंचे। इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता, सांसद रवि शंकर प्रसाद और विधायक श्याम रजक के साथ-साथ कई वरिष्ठ अधिकारी, आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर, बच्चे और उनके माता-पिता मौजूद थे।

कटिहार में ‘आंगन मिलन’ का आयोजन

बाल विकास परियोजना के तहत, मंगलवार को जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर 'आंगन मिलन' कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने उपस्थित महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक आहार, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों के नियमित सेवन, समय पर मेडिकल जांच, स्तनपान के सही तरीकों और छह महीने की उम्र के बाद शिशुओं को पूरक आहार देने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा, बच्चों के सर्वांगीण विकास में मदद के लिए 'प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा' (Early Childhood Care and Education) के तहत कई गतिविधियां आयोजित की गईं। खेल-खेल में सीखने को बढ़ावा देने के लिए नर्सरी राइम्स, प्रेरणादायक कहानियां और रचनात्मक खेल जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं, जिससे बच्चों में सीखने की क्षमता और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा मिला।

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