आसमान में गोता लगाने को तैयार है भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान, तरंग शक्ति में करेगा युद्धाभ्यास
खबर सार :-
तरंग शक्ति 2026: भारतीय वायुसेना का दूसरा संस्करण है। इसमें कई देशों के साथ युद्ध का अभ्यास किया जाना है। जिन देशों ने युद्ध का अभ्यास कार्यक्रम में शामिल होने की स्वीकृति दी थी, उनके विमान भारत पहुंच चुके हैं।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली, भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2026 का उद्घाटन हो गया है। यह आयोजन जोधपुर में हो रहा है। देश के लिए ये गौरव के दिन हैैं। ऑपरेशनल चरण शुरू कर देने के पहले से ही यहां उत्साह चढ़कर बोल रहा है। इस आयोजन के अंतर्गत भारत के आसमान में कई दिनों तक अलग-अलग देशों के सैन्य विमानों की श्रंखला देखने को मिलेगी। इसमें विभिन्न देशों की वायु सेनाएं एक साथ प्रशिक्षण लेंगी और अपने अनुभव साझा करेंगी। जिन देशों को प्रदर्शन में हिस्सा लेना है, वह अपने विमान लेकर आए हैं।
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कई देशों से मिल रही हैं सफलता की प्रतिक्रियाएं
भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2026 के अंतर्गत इन गतिविधियों की चर्चा केवल जोधपुर में ही नहीं, पूरे देश में है। रविवार को भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने आयोजन की तारीफ की। उन्होंने यहां विभिन्न वायु सेनाओं के बीच तालमेल को देखा। उनको यकीन हो चुका था कि तरंग के माध्यम से सेनाएं अपनी प्रक्रियाओं को सरल करेंगी।
फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डोमिनिक टार्डिफ ने अभ्यास निदेशक एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर के साथ वार्ता करना उचित समझा। हालांकि, उनकी मुलाकात के परिणाम सार्थक रहे। उन्होंने भारतीय वायुसेना और फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना के बीच के संबंधों की तारीफ की। उनके अनुसार, भारत के साथ मजबूत संबंध हैं। भारत को एक अच्छा सहयोगी भी बताया।
12 अक्टूबर तक चलने वाला है युद्ध अभ्यास
यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलने वाला है। भारत के साथ इस अभ्यास में सात मित्र देश अनुभव साझा करेंगे। इनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश आदि हिस्सा ले रहे हैं। इन देशों के अभ्यास में भागीदारी आपसी तालमेल को बेहतर बनाते हुए देखा जाएगा। लड़ाकू विमान, सैन्य परिवहन और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों का प्रदर्शन किसी रोमांच से कम नहीं है। ऐसी विमान की क्षमताएं किसी देश के एक ही मंच पर देखने को मिलने वाली हैं।
रक्षा मंत्रालय की ओर से इस अभ्यास में शामिल विदेशी विमानों की जानकारी दी गई है। इसमें एफ-35 लाइटनिंग द्वितीय, राफेल और एफ-16 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। ए400एम, एमआरटीटी, सी-130, सी-130जे और केसी-30ए की भी उपस्थिति लगभग तय है। ये विमान अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हैं। इनकी कार्यक्षमताएं उच्चस्तरीय हैं।
लड़ाकू अभियानों में भी इनमें किसी की भूमिका हो सकती है। कोई सैनिकों और सैन्य सामग्री के परिवहन में सराहनीय योगदान कर रहा है। कुछ हवा में दूसरे विमानों को ईंधन देने में सक्षम हैं। इस तरह तरंग शक्ति केवल विमानों की भागीदारी तक सीमित नहीं है। दरअसल, आधुनिक हवाई अभियानों में अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच तालमेल महत्वपूर्ण माना जाता है।
अभ्यास के दौरान एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन होगा
तरंग के अंतर्गत पूरा समूह संगठित होकर काम करता है। इसमें आयोजन अभियान से संबंधित विशेषज्ञों की भूमिका अहम होती है। विमानों के चालक दल और आवश्यक कार्य पूरा करने वाले कर्मचारी मिल जुलकर काम करते हैं। सभी देशों की टीमों का कार्यभार भिन्न होता है। यही कारण है कि वह अपने कार्याें की असमान दशाओं को एक दूसरे में साझा करते हैं। इन प्रक्रियाओं के जरिए अनुभव में वृद्धि होती है।
अभ्यास के दौरान सभी का ध्यान आपसी तालमेल, हवाई सुरक्षा, परिचालन प्रक्रियाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान पर रहेगा। कुछ अन्य मित्र देश पर्यवेक्षक के रूप में भी अभ्यास में शामिल होंगे। अभ्यास के दौरान एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन भी होना है। इसमें विदेशी दलों के लिए औद्योगिक भ्रमण, सेखों मैराथन, विरासत स्थलों का भ्रमण और योग सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
तरंग का सबसे ज्यादा लाभ नवाचार में मिलता है। सराहनीय योगदान से ही माहौल बनाए रखने में मित्रदेशों को ऐसे आयोजनों में सफलता हासिल हो पाती है। यह आयोजन भारत में पहले भी हुआ था। तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में आयोजित किया गया था। अब दूसरे संस्करण के माध्यम से भारतीय वायुसेना विभिन्न देशों के साथ अवसरों को आगे बढ़ा रही है।
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