ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा: दो दशक की तैयारी के बाद उठाया गया कदम, जल्दबाजी नहीं बल्कि सुनियोजित बदलाव

खबर सार :-

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि ई20 पेट्रोल का क्रियान्वयन वर्षों की तैयारी, वैज्ञानिक परीक्षण, उत्पादन क्षमता विस्तार और सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद किया गया है। सरकार का दावा है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। साथ ही उपभोक्ताओं से भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपील की गई है।
ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा: दो दशक की तैयारी के बाद उठाया गया कदम, जल्दबाजी नहीं बल्कि सुनियोजित बदलाव

खबर विस्तार : -

E20 Petrol India:  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ई10 से ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की ओर भारत का बदलाव किसी जल्दबाजी का फैसला नहीं, बल्कि दो दशकों से अधिक समय तक चले परीक्षण, नीतिगत सुधार, उद्योग जगत के साथ व्यापक विचार-विमर्श और जमीनी स्तर पर किए गए परीक्षणों का परिणाम है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत मौजूदा सरकार के कार्यकाल में नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान हुई थी और इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज है।

2001 में भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत

मंत्रालय के अनुसार, भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में एक पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। इसके बाद 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा की गई और वर्ष 2006 तक कई राज्यों में ई5 यानी 5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू कर दिया गया। जनवरी 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस नीति की रूपरेखा को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया था। हालांकि, उस समय 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य तय होने के बावजूद वर्ष 2014 तक वास्तविक मिश्रण दर केवल लगभग 1.5 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी। मंत्रालय ने कहा कि उस दौर में एथेनॉल को ईंधन के रूप में स्वीकार्यता पर कोई विवाद नहीं था, क्योंकि दुनिया के कई देशों में इसका उपयोग पहले से हो रहा था। वास्तविक चुनौती भारत में पर्याप्त मात्रा में एथेनॉल उत्पादन सुनिश्चित करने की थी। उस समय देश लगभग पूरी तरह गन्ने पर आधारित एथेनॉल उत्पादन पर निर्भर था, जो मौसमी फसल होने के कारण पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पाता था। सालाना उत्पादन क्षमता करीब 400 करोड़ लीटर थी, जो न्यूनतम मिश्रण लक्ष्य के लिए भी पर्याप्त नहीं मानी जाती थी।

वर्ष 2018 में 'राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति' लागू

इस चुनौती को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2018 में 'राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति' लागू की। मंत्रालय के अनुसार, इसी नीति के जरिए बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक इकोसिस्टम विकसित करने की शुरुआत हुई। इस मिशन में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, भारतीय रेलवे सहित कई विभागों ने मिलकर काम किया। सरकार ने फीडस्टॉक बढ़ाने, उत्पादन क्षमता विकसित करने, लॉजिस्टिक्स मजबूत करने, तकनीकी सहयोग, निवेश आकर्षित करने और मांग की स्थिरता सुनिश्चित करने जैसे कई मोर्चों पर समन्वित प्रयास किए।

एथेनॉल प्लांट के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट'

सरकार ने बताया कि अगस्त 2021 में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने एथेनॉल की कमी वाले क्षेत्रों में डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट स्थापित करने के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' जारी किए। इन परियोजनाओं में लंबे समय तक खरीद की गारंटी, एस्क्रो व्यवस्था के माध्यम से बैंक वित्तपोषण और निवेश जोखिम कम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। इन प्लांटों को स्थापित होने और उत्पादन शुरू करने में लगभग दो वर्ष का समय लगा। इसी अवधि में नीति आयोग ने ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद जून 2021 में एथेनॉल मिश्रण पर अपना व्यापक रोडमैप जारी किया। इस रिपोर्ट में पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे लाभों का विस्तार से उल्लेख किया गया। उस समय 10 प्रतिशत मिश्रण के लिए देश को सालाना 500 से 600 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता थी, लेकिन निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ने के बाद यह अनुमान लगाया गया कि भारत लगभग 1,200 करोड़ लीटर वार्षिक उत्पादन करने में सक्षम हो जाएगा।

Ministry of Petroleum-Biofuel Policy 2018-E20 petrol

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनाल का  मिश्रण

मंत्रालय ने कहा कि जब आपूर्ति की स्थिति मजबूत हो गई, तब 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित करना स्वाभाविक और जिम्मेदार निर्णय था। इसलिए यह कहना कि भारत ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में जल्दबाजी की, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, यह वर्ष 2001 के पायलट प्रोजेक्ट से लेकर 2013 की नीति, 2018 के संस्थागत सुधारों और 2021 के बड़े निवेशों के बाद चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा अभियान है।

सरकार ने यह भी बताया कि ई20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ कई दौर की तकनीकी बैठकें और परीक्षण किए गए। मंत्रालय ने दावा किया कि मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग के दौरान, जिनमें 1.5 करोड़ गैर-ई20 प्रमाणित वाहन भी शामिल थे, ई20 के कारण जंग, असामान्य टूट-फूट या पुर्जों की आयु कम होने जैसी कोई समस्या दर्ज नहीं की। हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया है।

भ्रामक सूचनाओं के बचने की अपीलः मंत्रालय

मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं से बचने की अपील की। बयान में कहा गया कि एथेनॉल और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन करते हैं तथा डिस्टिलरी से लेकर डिपो और खुदरा पेट्रोल पंप तक प्रत्येक चरण में गुणवत्ता की जांच होती है। साथ ही राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि ईंधन की गुणवत्ता से जुड़े किसी भी उल्लंघन या मिलावट के मामले में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए।

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