भारी गिरावट के बाद शेयर बाजार ने की दमदार वापसी, सेंसेक्स 238 अंक चढ़ा; निफ्टी 24 हजार के बेहद करीब
खबर सार :-
आज का कारोबार यह संकेत देता है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतकों और वैश्विक संस्थाओं के सकारात्मक आकलन के चलते भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का विश्वास कायम है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की संभावनाएं अभी भी मजबूत दिखाई दे रही हैं।
खबर विस्तार : -
Indian Stock Market Hike: पिछले कारोबारी सत्र की बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत किया। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार में अधिकांश सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इस तेजी के चलते निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 238.22 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 सूचकांक 80.75 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 23,962.80 अंक पर पहुंच गया। दिनभर के कारोबार के दौरान निफ्टी 24,134.70 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया और 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के बेहद करीब बंद हुआ।
मजबूत घरेलू संकेतों से बाजार में लौटी रौनक
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद 76,503.60 अंक के मुकाबले 76,576.14 पर कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में मामूली बढ़त के बाद बाजार में खरीदारी तेज हुई और सेंसेक्स एक समय 823.04 अंक की छलांग लगाकर 77,326.65 के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में मुनाफावसूली के चलते बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन बाजार सकारात्मक दायरे में बंद होने में सफल रहा। इसी तरह निफ्टी ने भी 23,928.95 अंक पर कारोबार की शुरुआत की और दिन के दौरान 24,134.70 के उच्चतम स्तर को छुआ। बाजार की चौड़ाई भी मजबूत रही। कारोबार के दौरान 2,793 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 1,263 शेयरों में गिरावट रही और 167 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशकों का रुझान व्यापक रूप से खरीदारी की ओर रहा।
निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़त
व्यापक बाजारों में भी शानदार मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.38 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.80 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। इससे साफ है कि केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो अधिकांश क्षेत्रों में सकारात्मक कारोबार देखने को मिला। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 3.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बड़ा विजेता रहा। इसके अलावा निफ्टी मीडिया में 2 प्रतिशत, पीएसयू बैंक में 1.6 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में भी 1.6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर आईटी और ऑटो सेक्टर में हल्का दबाव बना रहा। निफ्टी आईटी 0.47 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
इन शेयरों में दिखी तेजी
निफ्टी-50 के शेयरों में सन फार्मा सबसे अधिक 2.7 प्रतिशत की तेजी के साथ उभरा। इसके अलावा भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंडिगो, इटरनल, ग्रासिम और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी तरफ डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज 5.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर शेयर रहा। इसके अलावा मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, इंफोसिस, एनटीपीसी और हिंडाल्को के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले कारोबारी सत्र के 471.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 476.4 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ।
डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ मजबूत
विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे मजबूत होकर 95.38 पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.55 पर बंद हुआ था। रुपये की मजबूती ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखने में योगदान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार की रिकवरी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की हालिया रिपोर्ट से भी समर्थन मिला। आईएमएफ ने कहा है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत किया गया है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की मजबूती और वित्त वर्ष 2028 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किए जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा और मजबूत हुआ है। हालिया आर्थिक आंकड़े और हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक भी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद की ओर इशारा कर रहे हैं।
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