भारत बना ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का पावरहाउस, दुनिया के आधे GCC यहीं; एंटरप्राइज AI टैलेंट में भी नंबर-2 पर पहुंचा देश
खबर सार :-
भारत का जीसीसी इकोसिस्टम अब वैश्विक कंपनियों के लिए केवल लागत बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि इनोवेशन, रिसर्च और अत्याधुनिक तकनीक का भरोसेमंद केंद्र बन चुका है। दुनिया के आधे जीसीसी और एंटरप्राइज एआई टैलेंट के दूसरे सबसे बड़े हब के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका भविष्य में रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
खबर विस्तार : -
Global Capability Centres India: भारत वैश्विक कारोबारी और तकनीकी परिदृश्य में लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। देश अब दुनिया के करीब आधे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (Global Capability Centres-GCC) का केंद्र बन चुका है। इसके साथ ही भारत एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टैलेंट के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हब बनकर उभरा है। यह उपलब्धि भारत की तकनीकी क्षमता, कुशल मानव संसाधन और इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्था की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का जीसीसी इकोसिस्टम पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व बदलाव से गुजरा है। कभी केवल बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित रहने वाला यह सेक्टर आज वैश्विक कंपनियों के लिए रणनीतिक फैसलों और अत्याधुनिक तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बन गया है।
20 लाख से अधिक पेशेवरों को मिला रोजगार
सीईए ने बताया कि भारत में वर्तमान में 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों में 20 लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं, जबकि यह संख्या तेजी से बढ़ते हुए लगभग 23 लाख तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर की वार्षिक आय 60 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुकी है और निकट भविष्य में 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग आधे जीसीसी भारत में संचालित हो रहे हैं और यह उपलब्धि किसी संयोग का परिणाम नहीं है। इसके पीछे भारतीय युवाओं का कौशल, तकनीकी दक्षता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता सबसे बड़ी वजह है।
लागत नहीं, प्रतिभा बनी सबसे बड़ी ताकत
वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि शुरुआती दौर में विदेशी कंपनियां कम लागत पर सेवाएं प्राप्त करने के उद्देश्य से भारत आई थीं, लेकिन समय के साथ उन्हें यहां उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले टैलेंट और बेहतर कार्यक्षमता ने लंबे समय तक टिके रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत केवल सस्ती सेवाएं देने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियों के लिए इनोवेशन, रिसर्च और तकनीकी विकास का विश्वसनीय साझेदार बन चुका है।

GDP में 2 प्रतिशत तक योगदान
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, जीसीसी सेक्टर अब भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग दो प्रतिशत का योगदान दे रहा है। इतना ही नहीं, देश के प्रमुख महानगरों में विकसित होने वाले नए ऑफिस स्पेस का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत जैसे पैमाने पर जीसीसी इकोसिस्टम किसी अन्य देश में मौजूद नहीं है और यही भारत की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त है।
बैक-ऑफिस से हाई-टेक इनोवेशन तक का सफर
सीईए ने कहा कि भारतीय जीसीसी ने अपनी पारंपरिक भूमिका से कहीं आगे बढ़कर वैश्विक कंपनियों के लिए उच्च मूल्य वाले कार्यों की जिम्मेदारी संभाल ली है। अब ये केंद्र टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, प्रोडक्ट डिजाइन, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय इंजीनियर और विशेषज्ञ अब केवल सपोर्ट सेवाएं नहीं दे रहे, बल्कि वैश्विक उत्पादों और तकनीकों के विकास में नेतृत्व भी कर रहे हैं।
मुंबई से बैंकिंग, बेंगलुरु से AI और चेन्नई से ऑटो डिजाइन
नागेश्वरन ने उदाहरण देते हुए बताया कि दुनिया के प्रमुख बैंक अपने रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का संचालन मुंबई और बेंगलुरु से कर रहे हैं। वहीं, ऑटोमोबाइल कंपनियां चेन्नई और पुणे स्थित अपने केंद्रों से नई कारों और एम्बेडेड सिस्टम की डिजाइन तैयार कर रही हैं। इसके अलावा सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में चिप डिजाइन विकसित कर रही हैं, फार्मास्युटिकल कंपनियां क्लिनिकल एनालिटिक्स का कार्य यहीं से संचालित कर रही हैं और उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने डिजिटल प्रोडक्ट्स का विकास भारतीय केंद्रों के जरिए कर रही हैं।

भारत में तैयार हो रही वैश्विक बौद्धिक संपदा
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारतीय जीसीसी में विकसित होने वाली बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) वास्तविक और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है। यहां पेटेंट दाखिल किए जा रहे हैं, नए उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारियां भी भारतीय पेशेवर निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के जीसीसी अब केवल संचालन केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बिजनेस मॉडल और वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
भारत के लिए नए अवसरों का दौर
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग और रिसर्च आधारित उद्योगों में तेजी से बढ़ते निवेश के चलते आने वाले वर्षों में भारत का जीसीसी सेक्टर और अधिक विस्तार करेगा। इससे रोजगार, निर्यात, विदेशी निवेश और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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