Digital India का दुनिया में डंका! 'समृद्ध ग्राम' पहल को मिला WSIS अवॉर्ड 2026, भारत ने वैश्विक मंच पर फिर मनवाया लोहा
खबर सार :-
डब्ल्यूएसआईएस प्राइज 2026 में 'समृद्ध ग्राम' पहल को मिला सम्मान भारत की डिजिटल विकास यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत का डिजिटल मॉडल अब वैश्विक स्तर पर प्रभाव छोड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों तक तकनीक आधारित सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर यह पहल समावेशी विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई मजबूती प्रदान कर रही है।
खबर विस्तार : -
WSIS Prize 2026: भारत सरकार के डिजिटल इंडिया (Digital India) अभियान को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। दूरसंचार विभाग (DOT) की महत्वाकांक्षी 'समृद्ध ग्राम इंटीग्रेटेड फाइजिटल सर्विसेज प्रोजेक्ट' को प्रतिष्ठित "डब्ल्यूएसआईएस (WSIS) प्राइज 2026" से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार भारत को 'इनेबलिंग एनवायरनमेंट' (सक्षमकारी वातावरण) श्रेणी में प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ग्रामीण डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान के रूप में देखा जा रहा है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की।
Another feather in the cap for Bharat on the global stage…????????
— Jyotiraditya M. Scindia (@JM_Scindia) July 9, 2026
An absolute delight to share that @DoT_India’s Samriddh Gram Integrated Phygital Services Project has been declared Global Winner of the #WSISPrizes2026 under the Enabling Environment category by @ITU.
This is also a… pic.twitter.com/tOEAlelQyr
भारत के लिए गर्व का क्षण: ज्योतिरादित्य सिंधिया
मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की ओर से डीओटी की 'समृद्ध ग्राम' पहल को वर्ष 2026 का ग्लोबल विनर घोषित किया गया है। उन्होंने इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान देश की डिजिटल सोच और नवाचार क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति का प्रमाण है। सिंधिया ने कहा कि यह पुरस्कार केवल एक परियोजना की सफलता नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'समावेशी डिजिटल इंडिया' विजन की वैश्विक मान्यता भी है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य तकनीक का लाभ देश के हर नागरिक तक पहुंचाना है, चाहे वह किसी महानगर में रहता हो या किसी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में। 'समृद्ध ग्राम' पहल इसी सोच को धरातल पर उतारने का काम कर रही है।
गांवों में स्थापित 'समृद्धि केंद्र' का महत्व
केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतनेट नेटवर्क से संचालित यह परियोजना ग्रामीण कनेक्टिविटी को केवल इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ती है। गांवों में स्थापित 'समृद्धि केंद्र' स्थानीय लोगों के लिए एकीकृत डिजिटल सेवाओं के केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, जहां एक ही स्थान पर कई सरकारी और निजी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 'समृद्ध ग्राम' पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'फिजिटल' मॉडल है, जिसमें डिजिटल तकनीक और भौतिक अवसंरचना को एक साथ जोड़कर सेवाएं प्रदान की जाती हैं। भारतनेट के हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क के माध्यम से ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक डिजिटल सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे गांवों के लोगों को पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं मिल रही हैं।

समृद्धि केंद्रों के माध्यम से मिलने वाली जानकारी और लाभ
मंत्रालय के अनुसार, इन समृद्धि केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि सलाह, सरकारी योजनाओं, डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय समावेशन और ई-कॉमर्स जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। हाई-स्पीड इंटरनेट और एफटीटीएच (फाइबर टू द होम) कनेक्टिविटी की मदद से टेलीमेडिसिन सेवाएं, स्मार्ट क्लासरूम, ऑनलाइन सरकारी सेवाएं और तकनीक आधारित कृषि समाधान भी गांवों तक पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने के साथ-साथ डिजिटल सशक्तिकरण को भी नई गति मिली है।
डिजिटल विभाजन को कम करने में योगदान
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि 'समृद्ध ग्राम' जैसी परियोजनाएं डिजिटल विभाजन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जहां पहले ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की पहुंच सीमित थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक के जरिए गांवों के लोग भी शहरों जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को मिली मजबूती
केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि यह सम्मान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप जो डिजिटल समाधान विकसित किए हैं, वे अब दुनिया के अन्य देशों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। भारत का मॉडल यह साबित करता है कि तकनीक का उपयोग केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए दूरसंचार विभाग, भारतनेट परियोजना से जुड़े अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और सभी सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण के कारण भारत आज वैश्विक डिजिटल मंच पर नई पहचान बना रहा है। आने वाले वर्षों में ऐसी पहलें देश के ग्रामीण विकास, डिजिटल समावेशन और आर्थिक प्रगति को और अधिक गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
Digital India: 11 साल में बदली भारत की तस्वीर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को 'डिजिटल इंडिया' अभियान की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत देशभर में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच का विस्तार, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, किया गया। साथ ही सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराकर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया। डिजिटल साक्षरता अभियान के माध्यम से नागरिकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य हुए। आधार जैसी डिजिटल पहचान प्रणाली ने नागरिकों को सुरक्षित और सुविधाजनक ऑनलाइन सेवाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
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