राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट ने स्वीकारे चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे, बोले गोविंद देव गिरी- दोषी कोई भी हो, नहीं बख्शा जाएगा
खबर सार :-
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट की लंबी बैठक के चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। इस बात की जानकारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने दी है। साथ ही बताया गया कि फिलहाल प्रशासनिक और दैनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई ताकि व्यवस्था में कोई परेशानी न आने पाए।
खबर विस्तार : -
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को अपनी पहली अहम बैठक आयोजित की। करीब तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मामले में शामिल कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
प्रेस वार्ता के दौरान गोविंद देव गिरी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि रामलला के मंदिर से जुड़ा यह प्रकरण पूरे समाज के लिए पीड़ादायक और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि चोरी चाहे छोटी हो या बड़ी, चोरी आखिर चोरी ही होती है और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने अपनी निर्धारित 11 जुलाई की बैठक को विशेष परिस्थितियों के कारण पहले ही आयोजित किया। बैठक में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास सहित सभी आवश्यक सदस्य मौजूद रहे, जबकि वरिष्ठ सदस्य के. परासरन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। निर्मोही अखाड़े के संत दिनेंद्र दास महाराज भी बैठक में उपस्थित रहे। बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, जांच की स्थिति और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गोविंद देव गिरी ने कहा कि ट्रस्ट हमेशा पारदर्शिता में विश्वास करता है। उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है और 22 जुलाई तक उसकी अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके बाद ट्रस्ट दोबारा बैठक करेगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
भ्रामक दावों का किया खंडन
उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि केवल दानपात्र ही नहीं बल्कि रामायण, चरण पादुकाओं और अन्य बहुमूल्य धार्मिक वस्तुओं की भी चोरी हुई है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के पास लगभग 2,800 धार्मिक एवं पूजनीय वस्तुओं का विधिवत पंजीकृत रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने इन वस्तुओं का रजिस्टर भी प्रस्तुत किया जाएगा ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे।
कृष्ण मोहन संभालेंगे जिम्मेदारी
बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार अब मंदिर की प्रशासनिक और दैनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन संभालेंगे। गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय की फिलहाल ट्रस्ट की गतिविधियों में कोई भूमिका नहीं होगी। इसी तरह डॉ. अनिल मिश्रा को भी मंदिर और ट्रस्ट की व्यवस्थाओं से अलग रखा जाएगा, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरी हो सके।
गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक से पहले ही चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे स्वीकार करते हुए उनके अब तक के योगदान की सराहना भी की।
चंपत राय के बचाव में उतरी वीएचपी
उधर, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस पूरे मामले पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने कहा कि ट्रस्ट जो भी निर्णय लेगा, उसका सम्मान किया जाएगा। वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि केवल आरोप लग जाने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को अपराधी घोषित करना उचित नहीं है।
सुरेंद्र जैन ने कहा कि एसआईटी को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही किसी प्रकार की राय बनानी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े संतों और नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि संगठन को विश्वास है कि ट्रस्ट निष्पक्ष और उचित निर्णय लेगा।
राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन और चोरी के आरोपों ने श्रद्धालुओं के बीच चिंता पैदा की है। ट्रस्ट का कहना है कि वह मामले को पूरी गंभीरता से ले रहा है और जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की लापरवाही या हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा।
SIT की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर यह स्पष्ट होगा कि चोरी की घटना कैसे हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ट्रस्ट क्या अतिरिक्त कदम उठाएगा। ट्रस्ट ने दोहराया है कि राम मंदिर की व्यवस्था में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा दोषी कोई भी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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