‘मेक इन इंडिया’ पर बढ़ा दुनिया का भरोसा, रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड: राजनाथ सिंह
खबर सार :-
राजनाथ सिंह ने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत मोबाइल फोन निर्माण, ऑटोमोबाइल उत्पादन, स्वदेशी लोकोमोटिव निर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे देश न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सर्वकालिक उच्च स्तर 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है, जो देश की रक्षा निर्माण क्षमता में तेज़ी से हुई वृद्धि को दर्शाता है। इसी तरह, भारत का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो वित्त वर्ष 2013-14 के केवल 686 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 57 गुना वृद्धि है।
बीजेपी सरकार में रखी गई विकसित भारत की नींवः राजनाथ सिंह
एक मीडिया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे मेक इन इंडिया अभियान पर वैश्विक विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने कमी से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से विकसित भारत की दिशा में मजबूत प्रगति की है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की नीति के माध्यम से विकसित भारत की मजबूत नींव रख रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान गति को देखते हुए सरकार के चौथे कार्यकाल तक भारत एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व मंच पर स्थापित होगा।
उन्होंने कहा कि जब 2014 में मेक इन इंडिया अभियान शुरू किया गया था, तब कई आलोचकों ने इसकी सफलता पर संदेह जताया था। लेकिन समय के साथ इस पहल ने न केवल सफलता हासिल की, बल्कि नए मानक भी स्थापित किए हैं। आज भारत रक्षा उत्पादन और औद्योगिक क्षमता में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
मजबूत हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की राय को सीमित महत्व दिया जाता था, वहीं अब वैश्विक नीतिगत चर्चाओं में भारत की भूमिका को गंभीरता से सुना और स्वीकार किया जा रहा है।
उन्होंने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में शुरू किए गए इस मिशन पर भी शुरुआत में संदेह जताया गया था, लेकिन आज भारत ने सेमीकंडक्टर पार्कों और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के जरिए महत्वपूर्ण प्रगति की है। हाल ही में देश ने अपना पहला स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप भी तैयार किया है, जो तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने भारत की डिजिटल क्रांति का उल्लेख करते हुए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की सफलता को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अप्रैल में UPI के माध्यम से 22.35 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 29 लाख करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि UPI अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पहुंच लगातार अन्य देशों तक भी बढ़ रही है, जो भारत की फिनटेक क्षमता और नवाचार नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा, तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था-तीनों क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश बनकर उभरेगा।
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