मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार से चमकी अर्थव्यवस्था, सर्विस मांग मजबूत; महंगाई का दबाव बरकरार

खबर सार :-

सितंबर में भारत के निजी क्षेत्र की गतिविधियां जून के बाद सबसे तेज रहीं। कंपोजिट पीएमआई 56.5 पर पहुंचा। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में नए ऑर्डर व रोजगार बढ़े, जबकि कंपनियों के सामने लागत और महंगाई का दबाव चुनौती बना रहा।
सितंबर में दौड़ी अर्थव्यवस्था, निजी क्षेत्र की गतिविधियां 56.5 पर

खबर विस्तार : -

India Private Sector PMI: भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर के दौरान आर्थिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ी। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई के मुताबिक, सितंबर में निजी क्षेत्र की गतिविधियों का सूचकांक बढ़कर 56.5 पर पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 54.3 था। जून के बाद यह निजी क्षेत्र की गतिविधियों का सबसे मजबूत स्तर है। कंपोजिट पीएमआई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज, दोनों क्षेत्रों की कारोबारी गतिविधियों को शामिल किया जाता है।

मैन्युफैक्चरिंग ने संभाली ग्रोथ की कमान

सितंबर में निजी क्षेत्र की मजबूती के पीछे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका रही। आंकड़ों के अनुसार, सामान बनाने वाली कंपनियों के आउटपुट और नए घरेलू ऑर्डर में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ी, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में इसका असर ज्यादा स्पष्ट रहा। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बिक्री की वृद्धि सर्विस कंपनियों की तुलना में अधिक रही और यह सात महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कंपनियों ने एल्युमीनियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्य एवं पेय पदार्थों, फार्मास्युटिकल उत्पादों और नए मॉडलों की मांग में बढ़ोतरी की जानकारी दी। एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती के कारण निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई। उन्होंने कहा कि आउटपुट और नए घरेलू ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं।

सर्विस सेक्टर में भी मांग का जोर

सितंबर में सर्विस सेक्टर ने भी निजी क्षेत्र की ग्रोथ को सहारा दिया। सर्विस कंपनियों के मुताबिक, मार्केटिंग गतिविधियों ने नए ऑर्डर हासिल करने में मदद की। सर्वे के गुणात्मक आंकड़ों में प्रॉपर्टी, ट्रांसपोर्ट सेवाओं और नई ट्रैवल बुकिंग से जुड़ी मांग में मजबूती का उल्लेख किया गया। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग में सुधार का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों में नए कारोबार में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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नौकरियों में भी बढ़ोतरी

आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर रोजगार पर भी दिखाई दिया। सितंबर में निजी क्षेत्र की कंपनियों ने आउटपुट और नए ऑर्डर में लगातार बढ़ोतरी के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता बढ़ाई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज, दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की रफ्तार लगभग समान रही। यह ऐसे समय में हुआ जब कंपनियों को नए कारोबार और बढ़ते उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई।

India Private Sector PMI, September PMI 2026

कंपनियों ने बढ़ाया स्टॉक, अनिश्चितता के बीच बनाया बफर

प्रांजुल भंडारी ने बताया कि कंपनियों की इनपुट खरीद में तेजी आई है। तैयार माल के स्टॉक का इंडेक्स करीब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कंपनियों द्वारा इन्वेंटरी बढ़ाने को भविष्य की मांग और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं से निपटने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। भंडारी ने मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, कंपनियां अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर तैयार कर रही हैं। इससे पता चलता है कि वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय कंपनियों की कारोबारी रणनीति पर भी पड़ रहा है।

महंगाई का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं

निजी क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूती और कारोबारी भरोसे में सुधार के बावजूद लागत से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मैन्युफैक्चरर्स के लिए कीमतों का दबाव बढ़ा है। आउटपुट कीमतों में महंगाई भी तेज हुई है। कंपनियां अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में मांग की मजबूती के साथ इनपुट लागत और बिक्री कीमतों के बीच संतुलन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा। सितंबर के पीएमआई आंकड़े कुल मिलाकर भारतीय निजी क्षेत्र में गतिविधियों, नए कारोबार और रोजगार की बेहतर स्थिति दिखाते हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और लागत दबाव पर कंपनियों की नजर बनी हुई है।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. सितंबर में भारत का कंपोजिट पीएमआई कितना रहा?

सितंबर में भारत का कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 रहा, जबकि अगस्त में यह 54.3 था।

2. सितंबर में किन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहीं?

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज, दोनों क्षेत्रों में गतिविधियां और नए ऑर्डर बढ़े।

3. क्या सितंबर में रोजगार के अवसर बढ़े?

हां, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों क्षेत्रों में कंपनियों ने रोजगार बढ़ाया।

4. कंपनियों के सामने कौन-सी प्रमुख चुनौती बनी हुई है?

मजबूत मांग के बावजूद कंपनियों पर इनपुट लागत, कीमतों और महंगाई का दबाव बना हुआ है।

 

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