596.22 से बढ़कर 781.06 एमटी हुआ सालाना उत्पादन, सीएसआर खर्च भी पहुंचा करीब 1,000 करोड़ रुपये

खबर सार :-

कोल इंडिया का सालाना उत्पादन 2020-21 के 596.22 एमटी से बढ़कर 2024-25 में 781.06 एमटी हो गया। कंपनी का लक्ष्य 2026-27 में 1,004 एमटी उत्पादन है। इसी बीच सीएसआर खर्च बढ़कर करीब 1,000 करोड़ रुपये सालाना पहुंच गया है।
कोल इंडिया की कोयला रफ्तार: पांच साल में 185 एमटी बढ़ा उत्पादन

खबर विस्तार : -

Coal India Annual Production: सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का सालाना कोयला उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2020-21 में 596.22 मिलियन टन (एमटी) रहा कंपनी का उत्पादन 2024-25 में बढ़कर 781.06 एमटी हो गया। इस तरह पांच साल में सीआईएल के सालाना उत्पादन में 184.84 एमटी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उत्पादन में यह वृद्धि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच कंपनी की भूमिका को भी रेखांकित करती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में सीआईएल ने 622.64 एमटी कोयले का उत्पादन किया। इसके अगले वित्त वर्ष 2022-23 में उत्पादन बढ़कर 703.21 एमटी हो गया। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी ने 773.81 एमटी उत्पादन किया, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 781.06 एमटी पर पहुंच गया। यानी 2020-21 से 2024-25 के बीच उत्पादन में करीब 31 फीसदी की वृद्धि हुई।

वर्ष 2024-25 में देश का कुल कोयला उत्पादन 1,047.523 एमटी

सीआईएल के उत्पादन में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब सरकार घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दे रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल कोयला उत्पादन 1,047.523 एमटी रहा। इसमें सीआईएल का योगदान करीब तीन-चौथाई रहा। कंपनी के उत्पादन में बढ़ोतरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली क्षेत्र समेत कई प्रमुख उद्योगों की ईंधन जरूरत को पूरा करने में घरेलू कोयला उत्पादन की अहम भूमिका है।

ये भी पढ़ें....कोयले से बनेगा भविष्य का ईंधन: 65,000 करोड़ रुपये की गैसीकरण परियोजनाओं पर तेजी से काम, 2030 तक बड़ा लक्ष्य

वर्ष 2026-27 के लिए सीआईएल का उत्पादन लक्ष्य 1,004 एमटी

कंपनी के लिए आगे भी उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य तय किए गए हैं। सरकारी योजना के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीआईएल का उत्पादन लक्ष्य 1,004 एमटी रखा गया है। इसके बाद 2027-28 में लक्ष्य 1,043 एमटी, 2028-29 में 1,082 एमटी और 2029-30 में 1,131 एमटी निर्धारित किया गया है। इन लक्ष्यों के मुताबिक कंपनी आने वाले वर्षों में सालाना उत्पादन को एक अरब टन से ऊपर ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उत्पादन विस्तार के साथ सीआईएल की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है। कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान कंपनी के लिए सीएसआर पर 5,795 करोड़ रुपये खर्च करना सांविधिक आवश्यकता थी, जबकि सीआईएल ने इस अवधि में 7,276 करोड़ रुपये खर्च किए। यानी कंपनी ने निर्धारित आवश्यकता से 1,481 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया।

सीआईएल का सालाना सीएसआर खर्च 1,000 करोड़ रुपये के पार

मंत्रालय ने कहा कि सीआईएल का सालाना सीएसआर खर्च कभी करीब 500 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कंपनी अपने सालाना सीएसआर बजट का कम-से-कम 80 फीसदी हिस्सा अपनी खदानों और प्रतिष्ठानों के 25 किलोमीटर के दायरे में खर्च करती है। परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों को इसमें प्राथमिकता दी जाती है। मंत्रालय के मुताबिक सीआईएल के 90 फीसदी से अधिक सीएसआर खर्च का इस्तेमाल कोयला उत्पादक राज्यों में होता है। इससे खनन गतिविधियों से जुड़े स्थानीय क्षेत्रों में विकास और सामाजिक योजनाओं पर खर्च का फोकस बना रहता है। इस प्रकार कंपनी के आंकड़े बताते हैं कि एक ओर वह उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना पर आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय क्षेत्रों में सीएसआर खर्च भी बढ़ा रही है।

ये भी पढ़ें....FY27 में 7.3% रह सकती है GDP ग्रोथ, महंगाई बढ़ने से RBI की चुनौती और बढ़ने के आसार

 

 

अन्य प्रमुख खबरें