मखाने की चमक बढ़ी: 2029-30 तक 12 हजार करोड़ का बाजार, किसानों की कमाई को मिलेगा बड़ा बूस्ट
खबर सार :-
भारत का मखाना क्षेत्र उत्पादन, कीमत, घरेलू खपत और निर्यात के मोर्चे पर तेजी से बढ़ रहा है। 2029-30 तक 11,000-12,000 करोड़ रुपये का बाजार बनने की संभावना किसानों के लिए बड़े अवसर का संकेत है। बिहार इसकी रीढ़ बना हुआ है। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और नई विकास योजना से अनुसंधान, बेहतर बीज, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा मिलने पर किसानों की आय और क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।
खबर विस्तार : -
Bihar Makhana export: भारत का मखाना बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की राह पर है। केंद्र सरकार की आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, उत्पादन में बढ़ोतरी, मजबूत घरेलू मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात के विस्तार के दम पर देश का मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे मखाना उत्पादक किसानों के लिए आय बढ़ाने और मूल्यवर्धन के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में करीब 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, इसी अवधि में मखाने की औसत कीमत लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति वृद्धि को कीमतों में इस उछाल की प्रमुख वजह माना गया है।
हेल्थ फूड बना मखाने की ताकत
मखाना अब पारंपरिक खाद्य पदार्थ से आगे बढ़कर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय स्नैक और सुपरफूड बन रहा है। कम वसा, पोषण से भरपूर और प्लांट-बेस्ड होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क्लीन-लेबल और पौध-आधारित खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से भारतीय मखाने के लिए नए बाजार तैयार हो रहे हैं। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, घरेलू मखाना बाजार ने 2021-22 से 2024-25 के बीच 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की। मजबूत घरेलू खपत ने मखाना क्षेत्र को वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षित रखा है।
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उत्पादन में भी तेजी की उम्मीद
वर्ष 2024-25 में भारत का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा। इस दौरान औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। उत्पादकता भी बढ़कर 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है। मखाना उत्पादन में बिहार देश का सबसे बड़ा राज्य है। 2025-26 में बिहार का उत्पादन करीब 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। राज्य में औसत उत्पादकता लगभग 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। इस तरह देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे बड़ी बनी हुई है और राज्य इस उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
आधुनिक खेती से बढ़ रही पैदावार
मखाने की खेती पारंपरिक रूप से तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है। अब आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश हो रही है। फील्ड सिस्टम खेती के साथ स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्में किसानों को बेहतर पैदावार देने में मदद कर रही हैं। खेती के दायरे में विस्तार, उत्पादकता में सुधार और उत्पादन से जुड़े जोखिमों को कम करने की कोशिशों से मखाना क्षेत्र में लगातार विकास की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। बेहतर तकनीक के साथ किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से जोड़ना भी उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

25 हजार टन तक मखाने का निर्यात
भारत हर साल 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है। इसमें से करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन मखाना निर्यात किया जाता है। बाकी उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में होती है। वैश्विक स्तर पर क्लीन-लेबल और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड की बढ़ती मांग भारत के लिए बड़ा अवसर है। मजबूत उत्पादन आधार के कारण भारतीय मखाना अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम स्नैक के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है। निर्यात के नए बाजार खुलने से किसानों और प्रसंस्करण उद्योग को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है।
मखाना बोर्ड से सेक्टर को मिलेगा संस्थागत सहारा
मखाना क्षेत्र के बढ़ते महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसके अलावा, 2025-26 से 2030-31 तक के लिए 476.03 करोड़ रुपये की लागत वाली मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत अनुसंधान और नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, किसानों का कौशल विकास, कटाई और कटाई-पश्चात प्रबंधन को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात को बढ़ावा देने तथा गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने की योजना है। इससे मखाना क्षेत्र को उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार तक एक मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है। यदि मांग और निर्यात की मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो 2029-30 तक 12,000 करोड़ रुपये के बाजार का लक्ष्य किसानों के लिए बड़ा आर्थिक अवसर साबित हो सकता है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1. भारत का मखाना बाजार 2029-30 तक कितना बड़ा हो सकता है?
भारत का मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
2. मखाना उत्पादन में कौन सा राज्य सबसे आगे है?
बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। 2025-26 में राज्य का उत्पादन करीब 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।
3. भारत कितना मखाना निर्यात करता है?
भारत के कुल मखाना उत्पादन का करीब 40 प्रतिशत, यानी लगभग 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन, हर साल निर्यात किया जाता है।
4. सरकार मखाना क्षेत्र के लिए क्या कदम उठा रही है?
केंद्र ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की घोषणा की है और 2025-26 से 2030-31 के लिए 476.03 करोड़ रुपये की मखाना विकास योजना को मंजूरी दी है।
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