बादाम है पुलवामा की पहचान, छंट रहे उत्पादन के व्यवधान
खबर सार :-
पिछले कुछ सालों में जम्मू कश्मीर में बादाम की खेती का स्तर गिरा है। वहीं पुलवामा में भी फसल का उत्पादन लगातार कम होने से यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति चरमराने लगी है। समस्या इससे बड़ी यह है कि सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही आर्थिक और मशीनरी मदद के बाद भी किसान ज्यादा फायदा नहीं ले पा रहे हैं।
खबर विस्तार : -
पुलवामा ; पिछले कुछ सालों में जम्मू कश्मीर में बादाम की खेती का स्तर गिरा है। वहीं पुलवामा में भी फसल का उत्पादन लगातार कम होने से यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति चरमराने लगी है। समस्या इससे बड़ी यह है कि सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही आर्थिक और मशीनरी मदद के बाद भी किसान ज्यादा फायदा नहीं ले पा रहे हैं। वहीं सरकार ने भी अब प्रोत्साहित कर किसानों का उत्साह बढ़ाया है। नतीजा यह रहा कि वर्तमान में पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है। जम्मू कश्मीर के पुलवामा घाटी आदि क्षेत्र को धरती का स्वर्ग माना जाता है। यहां दुनिया भर से सैलानी घूमने के लिए आते हैं। इस क्षेत्र के बागान देखकर लोगों का मन खुश हो जाता है।
पिछले कुछ सालों से इस पर विपरीत प्रभाव पड़ा
पुलवामा में बड़े पैमाने पर बादाम की खेती हो रही थी, पिछले कुछ सालों से इस पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। कुछ किसानों ने अधिकारियों के कहने पर पारम्परिक खेती में लौटने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। घाटे की मार झेल रहे किसानों के चेहरों पर इस बार कुछ राहत भी देखी जा रही है। माना जा रहा है कि क्षेत्र के बन अधिकारी ने सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। किसानों ने इसमें रुचि ली और यही कारण है की समय पर विभागीय सलाह और कीटनाशक उर्वरक तथा जरूरी सामग्री इन तक पहुंच सकी है। बादाम की खेती से मुंह मोड़ चुके किसानों ने वर्तमान की हालत देखकर तय किया है कि वह अगले साल इस पर ध्यान देंगे।
100 कनाल जमीन पर एक विशेष बाग स्थापित किया
प्रशासन यहां एक अनोखी पहल की शुरुआत की है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की जो समस्या है, उसको जड़ से समाप्त किया जाएगा। वन अधिकारी रियाज अहमद शाह का कहना है कि जिला प्रशासन और निदेशालय का साझा प्रयास रहा है, इसीलिए उनके प्रयास से 100 कनाल जमीन पर एक विशेष बाग स्थापित किया गया है। इसके साथ ही कई स्थानों में नर्सरिंयां लगाई जा रही हैं। पांच हेक्टेयर भूमि पर विदेश से उच्च गुणवत्ता वालं पौधे लाकर लगाए गए हैं। वर्तमान में इनका लाभ दूसरे देशों में ज्यादा मिल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में यह कदम कश्मीर के बादाम उद्योग को बढ़ावा देगा, क्योंकि यहां का बादाम पूरी दुनिया में पहुंचाया जाता है। इसके साथ ही ऑटोमेशन और मशीनरी युग का भी लाभ लिया जा रहा है। पुलवामा के किसान बादाम की हार्वेस्टिंग के लिए अपनी पुरानी और पारंपरिक तकनीकी से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब इसमें बदलाव हो रहा है।
मोटे तिरपाल का सहारा लिया जाता
पेड़ों पर चढ़कर लंबी और लचीली लड़कियों से शाखाओं को पीटते हैं। यह इसलिए करते हैं, ताकि बादाम जमीन पर नीचे गिरे। इस दौरान कुछ फल इनका नष्ट भी हो जाता था। किसानों को नई तकनीकी के साथ ही जमीन पर बिछाने के लिए मुलायम और मोटे तिरपाल का सहारा लिया जाता है। यह बादाम नीचे गिरता है तो खराब नहीं होता है। एक साथ बहुत सारे फलों से छिलके हटा लिए जाते हैं और इस काम में अब मशीन का सहारा लिया जाने लगा है। समय बचाने के लिए किसान अब छोटी मशीनों का इस्तेमाल कर भी रहे हैं। बागान मालिकों का कहना है कि छिलके वाले बादाम को खुली धूप में सुखा लिया जाता है। इसे कुछ समय बचाने के बाद उनके अंदर की गिरी एकदम कुरकुरी और स्वादिष्ट हो जाती है।
किसी मशीन के सहारे नहीं निकाला जाता
दूसरी ओर महंगा बिकने वाला कागजी बादाम है। यह बादाम अपनी कागज जैसी पतली परत के लिए जाना जाता है। इसे किसी मशीन के सहारे नहीं निकाला जाता हैं बल्कि इसकी गिरी आसानी से हाथों के जरिए ही निकाल दिया जाता है। विशेष मुड़ी हुई बनावट वाली भरपूर प्राकृतिक तेल और स्वाद के कारण कश्मीरी बादाम बहुत प्रसिद्ध है। यह बादाम उच्च कोटी की श्रेणी में आता है। इस फसल को ज्यादा उत्पादन के लिए यहां के किसानों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। अब देखना यह है कि सरकार की कोशिश कितना रंग लाती है? क्या कश्मीर पहले की तरह ही बागानों और फूलों की खेती में चार कदम आगे बढ़ पाएगा।
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