अपना बगीचा भी भर जाए तो कम, गोमा यशी बेल की पैदावार में है दम
खबर सार :-
गोमा यशी बेल की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। यह फलदार पेड़ पारंपरिक खेती से काफी ज्यादा कमाई करा सकता है। यह आंगन और बगीचे में भी लगाया जा सकता है। इसमें कांटे कम होते हैं। इसे सीआईएएच की ओर से विकसित किया गया है।
खबर विस्तार : -
लखनऊ : आप अगर पैसा कमाना चाहते हैं और खेती से जुड़े हुए कार्य ही करते हैं। लेकिन आप इतनी कमाई नहीं कर पा रहे हैं, जितनी की लागत और मेहनत आपकी लगती है। इसलिए मेरा सुझाव है कि आप अपनी खेती की परंपराओं में बदलाव लाएं। इससे आपकी आमदनी बढ़ जाएगी और समय की भी बचत होगी। लागत भी काम आएगी।
इन दिनों बागवानी संस्थान की ओर से गोमा यशी बेल के लिए प्रात्साहन दिया जा रहा है। इसका आप भी लाभ ले सकते हैं। आप अपने बगीचे में, आंगन में खेत में, जहां कहीं भी थोड़ी भी जगह हो, वहां पर गोमा बेल के पौधे लगा सकते हैं। यह एक फलदार पौधा होता है और आसानी से विकसित हो जाता है। इस पौधे की कई खासियत है। अच्छी पैदावार तो इसकी सबसे बड़ी खूबी है। यह एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आ रहा है। बेल की इस खास किस्म को कम कांटेदार और अपेक्षाकृत छोटे आकार के तौर पर विकसित किया गया है।
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अनुकूल परिस्थितियों में 80 किलोग्राम के करीब उतरते हैं फल
इसकी खासियत में उत्पादन क्षमता भी महत्व रखती है, क्योंकि अनुकूल परिस्थितियों होती है तो इसमें 4 से 5 साल पुराने पेड़ में एक सीजन में 80 किलोग्राम के करीब फल उतरते हैं। वैज्ञानिकों ने इसको बड़ी समझदारी के साथ किसानों के सामने पेश किया हैं। गोमा यशी को केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान की ओर से विकसित किया गया है। यह पारंपरिक खेती और फलदार खेती से हटकर है। हमारी पुराने बेल से भी यह भिन्न है। पारंपरिक बेल में ज्यादा जगह की जरूरत होती है और उसमें कांटे भी बड़े होते हैं। पेड़ की ऊंचाई काफी होती है। इससे तमाम तरह की दिक्कते भी आ जाती हैं।
ज्यादा जगह लेने के कारण इसे लगाने से लोग बचते हैं। इसमें उत्पादन क्षमता भी कम होती है, लेकिन गोमा बेल के बारे में बताया गया है कि इस किस्म के विकसित होने के साथ ऐसे फल उपलब्ध होते हैं, जिसे सीमित जगह में आसानी से लगाया जा सकता है। गोमा यशी बेल के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी संरचना पारंपरिक बेल से अलग होती है। यह एक कंपैक्ट और प्रबंधन बताया गया है। इस पौधे की ऊंचाई और चौड़ाई कम होती है। यह मध्यम आकार में पेड़ विकसित होता है और इसीलिए लोग इसे घर में लगाना पसंद करते हैं। जिस किसी के पास दो तैयारी की जगह है, वह इस पेड़ में खासियत यह भी है कि इसमें कांटे कम होते हैं। इसके फलों की तुरई भी आसानी से हो जाती है। गोमा यशी में कांटे काम होते हैं। उनकी लंबाई भी कम होती हैं।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह पारंपरिक फलों से बड़ा होता
एक फल के वजन के संबंध में भी वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह आम प्रचलित और पारंपरिक फलों से बड़ा होता है। इसका वजन डेढ़ किलो तक हो सकता है। फल की बाहरी त्वचा अपेक्षाकृत पतली और चिकनी होती है। एक छोटी सी बागवानी तैयार करने में ज्यादा पौधे लगा सकते हैं, क्योंकि यह काफी फैलाव में नहीं होता है। ज्यादा उत्पादन होने के कारण कम जगह में ज्यादा पौधे लगाए जा सकते हैं। वास्तविक उत्पादन पौधे की देखभाल के लिए सिंचाई मिट्टी और मौसम भी अनुकूल होना चाहिए। इस पौधे में यह सब चीज जरूरत की होती हैं। गोमा यशी बेल की खेती करने के लिए मिट्टी दमदार होनी चाहिए और यह किसान के हाथ पर निर्भर है।
उसे आसानी से तैयार कर सकते हैं। खेत को इस तरह से बनाया जाना चाहिए, जिसमें पानी नहीं रूके। मिट्टी भी इस तरह हो कि ज्यादा पौधे को पानी की जरूरत नहीं होती है। इसकी जड़ों के आसपास लंबे समय तक पानी जमा रहने से नुकसान दायक हो सकता है। पौधा लगाने से पहले इन दो प्रमुख बातों पर जरूर ध्यान देना होगा, एक पौधा लगाने के लिए दो स्क्वायर फीट की जरूरत होती है। इसमें अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी और पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। यद्यपि जैविक खाद का इस्तेमाल भी लोग करते हैं, लेकिन गोबर की खाद जरूरी होती है।
जड़ों में पानी भरा रहना इस पेड़ के लिए है नुकसानदायक
बाकी फसलों की तरह मिट्टी नमी नीम के छिलके आदि इसके प्रमुख पोषक तत्व बनते हैं। पौधे को लगाते समय यह जरूर ध्यान दें कि इसके लिए थोड़ा खुला स्थान जरूर हो जिससे पर्याप्त मात्रा में धूप मिल सके। पौधा लगाने के बाद 1 साल तक उसकी सिंचाई पर ध्यान देना पड़ता है। इसके बाद उसकी जडें़ मिट्टी में प्रवेश कर जाती है। तब ज्यादा नमी की जरूरत नहीं होती है। पानी देते समय यह ध्यान रखें कि उसकी जड़ों तक पानी जमा न हो। एक बार यह पौधा लग जाए, उसके बाद ज्यादा दिक्कतें नहीं रहती हैं। पौधा अपने आप विकसित होेता रहता है। कभी-कभी इसकी खाद पानी की व्यवस्था करें तो यह जल्दी बढवार ले लेता है। पौधों में यदि कहीं कमजोर शाखाएं हैं या सूख गई है तो उनकी छटाई कर देना चाहिए। इससे नई साखाओं का विकास भी जल्दी होता है।
गोमा बेल की खासियत होती है कि यह 4 साल में फल देने लगता है। लंबा समय इसके फल लेने में इंतजार नहीं करना पड़ता है। यदि परिस्थितियों अनुकूल हैं तो यह चार से पांच साल में अच्छी तरह से फल देने की स्थिति में बन जाता है। पूरी तरह से विकसित हुए पेड़ की उत्पादन के बारे में बताया है कि 80 सबे 85 कलो तक एक पेड़ से फल मिलते हैं। यानी कि एक पेड़ में करीब 90 फल या इससे अधिक हो सकते हैं। किसी फलदार पौधे की वास्तविक पैदावार एक जैसी नहीं मानी गई है। मिट्टी की गुणवत्ता मौसम आदि पर भी पैदावार निर्भर करती है। फुलवारी, क्यारी, या आंगन में लगाए गए पौधे का ज्यादा लाभ तब मिल सकता हैै। गर्मियों में बेहद पसंद किए जाने वाला इसके पल्स का शरबत होता है। ऐसे भी इसके बीज निकाल कर खाया जाने वाला फल होता है। काफी खुशबू देने में गोमा यशी माहिर है।
इस बेल में फाइबर, विटामिन सी और पोषक तत्व पाए जाते हैं भरपूर
इसमें फाइबर विटामिन सी और पोषक तत्व पाए जाते हैं। गोमा यसी बेल किसानों के लिए ज्यादा उपयोगी है। क्योंकि पारंपरिक खेती से ज्यादा इसमें उत्पादन और लाभ मिल सकता है। पर्याप्त संख्या में पौधे लगाकर फलों का उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में मिलेगा। वर्तमान समय में पारंपरिक बेल जो वजन में छोटा है और स्वाद में इतने अच्छे नहीं होते हैं, इसके बाद भी उनकी बिक्री बढ़ रही है। बाजार में इनकी मांग भी काफी मात्रा में रहती है। बेल की पैदावार को देखते हुए कहा जा सकता है कि बाजार में इसकी खपत भी अच्छी है। इसकी बिक्री भी आसानी से हो जाती है। बेल की खेती करने के लिए स्थानीय बाजार पौधे की उपलब्धता और किसान विशेषज्ञों से परामर्श जरूरी होता है।
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