सिरसाः खारे पानी में झींगा पालन, 14 लाख निवेश, 65 लाख का कारोबार, अब हैं चार तालाब

खबर सार :-

14 लाख का निवेष कर झींगा पालन में 65 लाख बनाए। प्रगतिशील किसान बना और पारंपरिक खेती छोड़ दी।
सिरसाः खारे पानी में झींगा पालन, 14 लाख निवेश, 65 लाख का कारोबार

खबर विस्तार : -

सिरसाः खारे पानी में किसान पारंपरिक खेती से अपेक्षाकृत लाभ नहीं बना पा रहा था। एक दिन उसका ध्यान प्रगतिषील किसानों की और गया और झींगा पालन की ठान ली। इस कार्य में उसने 14 लाख का निवेष किया और आज सालाना 65 लाख की कमाई है।

सिरसाः झींगा पालन से किसान ने अपनी तकदीर बदल दी है। सिरसा जिले के प्रगतिशील किसान गुरदीप सिंह इन दिनों चर्चा बने हुए हैं। इन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर झींगा पालन शुरू किया। इस व्यवसाय में 14 लाख रुपए का निवेश किया। आज इनकी कमाई सालाना करीब 65 लाख रुपए पहुंच गई।

पारंपरिक खेती छोड़ झींगा पालन किया

सिरसा जिले के गांव रघुआना के किसान गुरदीप सिंह ने मीडिया से बात की और अपनी प्रगतिशील खेती के बारे में कई नई जानकारियां दीे। इन्होंने बताया कि तमाम विषम परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया। संभावनाएं तलाशी और उन्हें खेत से तालाब तक, फिर फसल से झींगा पालन तक पहुंचा।

मेहनत के बाद भी आर्थिक कमी रहती थी

प्रगतिशील किसानों के रूप में गुरदीप सिंह काफी दूर तक पहचाने जाते हैं। खारे पानी की जमीन पर इन्होंने व्हाइट सिर्फ पालन को सफल व्यवसाय में बदल दिया। मीडिया के लोगों को बताया खेती में उन्हें ज्यादा लाभ नहीं मिल पा रहा था। अक्सर लोग पारंपरिक खेती पर ही निर्भर रहते हैं। इसमें सिंचाई के अलावा अन्य खर्च उठाने के बाद आर्थिक कमी बनी रहती है, इसलिए उनका ध्यान झींगा पालन की ओर गया। इसके लिए वह सेमिनार विशेषज्ञों, ऑनलाइन माध्यम एवं दुकानदारों से संपर्क करने लगे।

झींगा पालन की सफल कहानी सामने आई

उन्होंने बताया कि जब तक व्यवसाय शुरू नहीं कर दिया रुकने का नाम नहीं दिया। कुछ दिन तक तो लोग उनके स्वभाव और व्यवहार को लेकर चिंतित रहे, लेकिन संपर्क बनाए रखने पर झींगा पालन की सफल कहानी सामने आने लगी है। पास पड़ोस के लोग भी खारा पानी में झींगा पालन की कहानी गढ़ रहे हैं। उन्होंने विभाग से भी संपर्क किया और उनसे मछली पालन की तकनीकी मार्गदर्शन लिया। 2019 में वह झींगा पालन में लग गए।

कड़ी मेहनत से किसान ने चार तालाब बनाए

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 14 लाख रुपए की परियोजना से एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाब तैयार किए। इस परियोजना से उन्हें 3 लाख 93 हजार की सब्सिडी मिली। बाद में प्रधानमंत्री मद से संपदा योजना के तहत किसान ने दो और नए तालाब बना लिए। व्यवसाय जब कमाई का जरिया बनने लगा, तब इन्होंने इसको सीमित नहीं रखा और अपनी मदद के लिए 10 लोगों को प्रत्यक्ष एवं 15 लोगों को आप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार दिया क्षेत्र के अन्य किस भी मदद के लिए आते रहते हैं।

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गुरदीप की तरह कुछ और लोग झींगा पालन में बढ़ना चाहते हैं। उनकी भी यह प्रेरणा बने हैं। गुरदीप सिंह कहते हैं कि शुरू के दिनों में बीमारी और बाजार भाव के कारण बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे बारीकियां समझ में आने लगीं। स्थितियां भी बहाल होने लगीं।

खारे पानी में प्रभावित होती है पारंपरिक खेती 

उन्होंने जैव सुरक्षा पानी की बेहतर प्रबंधन आदि के इस्तेमाल के साथ अलग-अलग बिक्री चैनल विकसित किया। जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा सिरसा जैसे क्षेत्रों में जहां पानी खारा मिलता है, वहां पारंपरिक खेती प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन आय का जरिया बन गया है। गुरदीप सिंह के बारे में बताया कि सहकारी सहयोग के साथ आधुनिक तकनीकी सही प्रबंधन और मेहनत उसके लिए स्रोत बने हैं।

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