पीएम-किसान योजना नहीं होगी बंद, 2031 तक जारी रखने का फैसला, महिला किसानों को भी मिल रहा लाभ

खबर सार :-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को जारी रखने का फैसला किया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी।
पीएम-किसान योजना नहीं होगी बंद, 2031 तक जारी रखने का फैसला, महिला किसानों को भी मिल रहा लाभ

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को जारी रखने का फैसला किया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी। इन वर्षाें में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने 3.15 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान को स्वीकृति भी दी है। सरकार इस फैसले को किसानों की आय बढ़ाने, कृषि निवेश को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सही दिषा में ले जाने वाला बताया है। एक आधिकारिक बयान में सरकार की ओर से कहा गया है कि इस योजना ने तकनीक-आधारित किसान कल्याण का एक सफल मॉडल स्थापित किया हैै।

पीएम-किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी

यह बिचैलियों की भूमिका समाप्त कर रही है। इसीलिए अब सहायता राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है। सरकार इस प्रक्रिया को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), आधार प्रमाणीकरण और डिजिटल सत्यापन के जरिए संचालित कर रही है। पीएम-किसान योजना फरवरी 2019 में शुरू की गई थी। इसके तहत पात्र किसान परिवारों को हर वर्ष 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। जो सरकारी आंकड़े हैं, उनके मुताबिक, पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तों के माध्यम से 4.47 लाख करोड़ रुपए से अधिक किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं।

23वीं किस्त के तहत किसानों को 18,984 करोड़ भेजे गए

बताया गया है कि 23वीं किस्त के तहत 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को 18,984 करोड़ भेजे गए। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को राहत के रूप में 1.71 लाख करोड़ रुपए जारी किए गए। पीएम-किसान योजना का लाभ महिला किसानों भी ले रही हैं। इसमें बड़े पैमाने पर अब तक 1.06 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिला किसानों को दी जा चुकी है। कुल लाभार्थियों में लगभग हर चैथा लाभार्थी महिला किसान को बताया गया है। सरकार का कहना है कि पीएम-किसान के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता कई चीजों में दी जा रही है। किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि जरूरतों पर निवेश करने में मदद मिली है। इससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ी है।

ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई

कर्ज पर निर्भरता कम हुई है। साथ ही ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।आधार आधारित प्रमाणीकरण, डिजिटल लाभार्थी सत्यापन और डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सहायता राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है। योजना से आर्थिक सहायता, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और कृषि निवेश की क्षमता भी बढ़ा रही है। योजना के सकारात्मक परिणाम नीति आयोग के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस (डीएमईओ) द्वारा किए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में भी पाए गए हैं। इसमें बताया गया कि 92 प्रतिशत से अधिक किसानों की राय थी कि सरकार का प्रयास उनके काम आया। सरकारी सहायता राशि का उपयोग कृषि कार्यों और कृषि निवेश में किया।

सरकार ने डिजिटल इंडिया की एक खूबसूरत पहल बताया

जबकि 85 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि उनकी कृषि आय में सुधार हुआ। सरकारी बयानों में बताया कि 2020-21 से 2025-26 के दौरान खेती का रकबा लगभग 9.65 प्रतिशत, उत्पादकता 10.53 प्रतिशत बढा है। कुल खाद्यान्न उत्पादन 21.18 प्रतिशत ज्यादा हुई है। पीएम-किसान योजना को सरकार ने डिजिटल इंडिया की एक खूबसूरत पहल बताया है। इसीलिए सरकार का कहना है कि योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखा जाएगा। इससे किसानों की निवेश क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होगी, कृषि जोखिम कम होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। 

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