20 अगस्त तक खरीदी जाएगी मूंग, 60 फीसदी फसल रखेगी सरकार
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के भोपाल में चल रहे किसान आंदोलन को आखिर समाप्त कराने में सरकार सफल हो गई है। किसानों ने आंदोलन करने की घोषणा की थी, उन्होंने कहा था कि सड़क पर ही सोएंगे। सड़क पर ही खाएंगे।
खबर विस्तार : -
भोपाल; मध्य प्रदेश के भोपाल में चल रहे किसान आंदोलन को आखिर समाप्त कराने में सरकार सफल हो गई है। किसानों ने आंदोलन करने की घोषणा की थी, उन्होंने कहा था कि सड़क पर ही सोएंगे। सड़क पर ही खाएंगे। सड़क पर ही धरना देंगे। किसने के आंदोलन के ऐलान को सरकार ने गंभीरता से लिया और इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी दी कि वह किसी भी तरह से इस आंदोलन को होने से रोके। इसके लिए बुधवार की रात सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बैठकों का दौर चला। यह बैठक मध्य प्रदेश के मंत्रालय में हुई, जिसमें किसानों ने अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी।
बुकिंग की अवधि 10 दिन बढ़ा दी गई
यद्यपि इससे पहले उन्होंने अपनी बात रखी और सरकार से वादा नुक्रम में हामी भर वाली की मध्य प्रदेश सरकार 60 फीसदी उपज खरीदेंगे। सरकार प्रत्येक पात्र किसान से मूंग 60 फीसदी लेगी और इसका उपार्जन स्लाट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ा दी गई है। किसान आंदोलन में यह बात कही गई की नर्मदा पुरम, सीहोर और हरदा जिलों से लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ खरीद की जाएगी। दिल्ली के अलावा देश के तमाम राज्यों में इन दोनों छात्रों का धरना प्रदर्शन गंभीर मोड़ पर है। इसके कारण संसद भवन तक प्रभावित है। इसे कई राज्यों ने बड़ी गंभीरता से लिया है और किसी भी प्रकार के आंदोलन की अनुमति नहीं देना चाहती है।
देर रात आंदोलन समाप्त हो गया
सरकारी चाह रही है कि जितना भी आसानी से लोगों को मना लिया जाए या फिर उनकी मांगे मान ली जाएं, वह सबसे अच्छा होगा। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनाने का प्रयास भी दूरगामी सोच है। प्रशासन ने बसों के जरिए किसानों को उनके वाहनों तक पहुंचा दिया। देर रात तक आंदोलन पूरी तरह से समाप्त हो गया। आंदोलन समाप्त होने के बाद किसानों को उनके घरों तक भेजना था, इसलिए एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चैहान को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने मीडिया को बताया कि किसानों ने आंदोलन को लेकर सहमति जाता दी है। वह अब आंदोलन के पक्ष में नहीं हैं। सरकार ने किसानों की बात मान भी ली है।
60 फसदी उपार्जन किया जाएगा
इसके बाद प्रशासन ने रोशन पुरा चैराहे से बसों के जरिए उनकी गाड़ियों तक पहुंचवाया और रोशनपुरा लगभग खाली हो गया। बाढ़ गंगा की ओर जाने वाली मार्ग को छोड़कर बाकी रास्ते भी अब खाली हैं। अब जितने भी किसान पात्र होंगंे उनको मूंग उपज का 25 की जगह है 60 फसदी उपार्जन किया जाएगा। यह सब नर्मदा पुरम सीहोर एवं हरदा जिलों के लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ के अंतर्गत आता है। यह निर्णय लागू करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। दूसरी तरफ घरों को जा रहे किसानों का कहना था की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लाट बुकिंग की अवधि बढ़ा दी है, अब 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक बुकिंग कर सकेंगे।
10 अगस्त की जगह 20 अगस्त
इसी प्रकार उनका उपार्जन की अंतिम तिथि में भी बदलाव किया गया है। इसे 10 अगस्त की जगह 20 अगस्त कर दिया गया है। किसानों ने बताया कि इससे उनको अब बड़ी राहत मिलेगी। इस बात की खुशी है कि सरकार ने उनकी बात आसानी से मान ली। किसानों ने कहा कि यह कोई जबरन मामला नहीं था। वास्तव में किसानों की बड़ी परेशानी थी। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य करती रही है। किसी प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने में किसान आगे रहते हैं। उनके जरिए ही समृद्धि बढ़ती है और उनके परिश्रम उत्पादन मूल्य को निर्धारित करता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री को बधाई, क्योंकि उन्होंने किसान हित में निर्णय लिया है। भारत सरकार द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्य प्रदेश को 4.52 लाख मी 1 टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
जो परिवर्तन किया जा रहे वह दीर्घकालिक
भारत सरकार की योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में कुल उत्पादन का अधिकतम 25% उपार्जन करने का प्रावधान रखा गया था। इसी नियम के तहत ही यह भी निर्णय लिया गया था कि यहां प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों की उनकी उपज का 25 न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग भी प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे या बैठक के समय मौजूद रहे हैं, उन्हें पूरी तरह से अस्वस्थ किया गया कि सरकार खाद वितरण के लिए लागू की गई व्यवस्था से संबंधित शिकायतों को भी गंभीरता से ले रही है। व्यावहारिक समस्याओं का समाधान आसानी से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली समय में किसानों को काफी सुविधा होगी जो परिवर्तन किया जा रहे हैं, वह दीर्घकालिक है।
राज्य सरकार को अनुशंसाएं प्रस्तुत करनी होगी
कृषि मंत्री ने कहा कि यह एक नई व्यवस्था के के तहत लिया गया फैसला है। मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का फैसला किया है। इस समिति के जरिए किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। केंद्र व्यवस्था और उससे जुड़ी समस्याओं का निदान भी होगा, लेकिन यह देखना होगा कि राज्य सरकार को कितनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करनी होगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर जरूरी और जल्द लिए जाने वाले फसलों पर काम किया जाएगा। ऐसा ना हो की बारिश के दौरान किसान तबाह हो जाए और फैसले लेने में देरी हा,े इसलिए सुझाव लिए जा रहे हैं और उनको जल्दी से जल्दी निस्तारित करने के लिए कदम बढ़ा दिए गए हैं।
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