शरीर के साथ जेब भी मजबूत करे बाजरा

खबर सार :-

बाजरा हमारे शरीर के लिए काफी लाभकारी है। इसमें कई पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह प्रकृति के लिए भी अनुकूल है। इसलिए सरकार मोटा अनाज में बाजारा के प्रोडक्ट और इसकी खेती पर जोर दे रही है।
बाजरा: जमीन का जल बचाए, महफिल को व्यंजन से भरे

खबर विस्तार : -

लखनऊ : बाजरा भले ही दुनियाभर में लोकप्रिय नहीं रहा, लेकिन भारत में यह मुख्य अनाजों गिना जाता रहा है। इसकी कई किस्में पाई जाती हैं। यद्यपि बाजरे का उपयोग धीरे-धीरे कम हुआ है, लेकिन श्रीअन्न के रूप में केद्र और राज्य सरकार मोटे अनाज के रूप में बाजरा का उत्पादन बढाने पर जोर दे रही है। यह ऐसी फसल है, जो किसान, पर्यावण और खरीददार में सभी के लिए लाभकारी है। 

दरअसल, खानपान की संस्कृति में बदलाव के बाद लोगों ने खाद्य पदार्थों में अन्य अनाजों से बनी वस्तुओं का सेवन करना शुरू कर दिया। इस महत्वपूर्ण परिवर्तन के बाद बाजरा की ओर से किसानों का ध्यान हटने लगा। इसके साथ ही चावल और गेहूं को भोजन में प्रमुखता मिल गई। हालत यह हो गई कि अब खेतों में बाजरा देखने को भी कम ही जगहों पर मिलता है। इसके परिणाम भी बेहतर नहीं रहे। लोगों में जैसे-जैसे बाजरे की खाने की सामग्री से मोहभंग हुआ, वैसे ही धीरे-धीरे ही सही, बीमारियों ने परिवार बसा लिए। एक के बाद एक फिर तो डॉक्टरों के बीमारी पता लगाने के शोध बढ़ गए। 

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मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियां हावी हो रहीं

पिछले कुछ वर्षों में मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियां हावी होती जा रही हैं। इनसे मिलने वाली जटिलताओं से पीड़ित रोगियों की संख्या लगभग महामारी के स्तर तक के करीब है। हालत यह है कि कुछ उच्च आय वाले देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण भी ऐसी ही बीमारियां बन गई हैं। हमारे अंदर बीमारियां पैदा होती गईं, फिर भी हमने अपनी थाली में बाजरा जैसे मोटा आनाज को शामिल नहीं किया है। यह हमारे लिए आर्थिक रूप से समृद्धि का प्रतीक बन रहा है, हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। जरूरत इस बात की है कि हम इसे अपना लें। एक साबुत अनाज में बाजरा प्रमुख फसल भी है।

ह आवश्यक पोषक तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है। बाजरा से बने भोजन और पेय पदार्थों में कई प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं। मधुमेह, मोटापा और हृदय संबंधी रोगों का इलाज भी बाजरे में हैं। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले प्रतिरोधी स्टार्च, फेनोलिक्स, स्टेरॉल्स, लिग्नन्स, इनुलिन, फाइटेट्स, टोकोफेरोल, आहार फाइबर और कैरोटीनॉयड जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। बाजरा में मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा काफी होती है। यह मधुमेह की रोकथाम में सहायक है। मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण खनिज भी है। विटामिन, बीटा कैरोटीन का उपयोग दवाओं में हो रहा है। यह सब बाजरा में है। कुपोषण और मोटापे की समस्या का समाधान भी इसके सेवन में है।  

आंतों की कार्यप्रणाली में सुधार करता बाजरा

बक्शी का तालाब स्थित कृषि वैज्ञानिक सत्येंद्र सिंह कहते हैं कि ऐसे रिजल्ट मिले हैं कि उच्च फाइबर वाले अनाज का सेवन आंतों की कार्यप्रणाली में सुधार करता है। यह पाचन को बढ़ाकर मोटापे की संभावना को कम करता है। साथ ही बाजरा में कैलोरी कम जबकि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, अमीनो एसिड, वसा, खनिज प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इनसे वजन कम करने में मदद मिलती है। कुछ अध्ययनों मंे ऐसा नतीजा भी मिला है कि बाजरा हृदय के लिए लाभकारी होता है।

बाजरा में घुलनशील फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होता है। इसका सेवन हृदय संबंधी धमनी रोगी के लिए फायदेमंद है। बाजरा पर शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह कैंसर से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। इसके अलावा यह त्वचा और हड्डियों के रोगों को भी मारता है। इतनी खूबियां बाजरे में हैं, इसके बाद भी लोग बाजरा की खेती से बच रहे हैं। पर्यावरण के लिए भी बाजरे की खेती अनुकूल है। इसका कारण है कि यह बारिश पर निर्भर फसल है।

जल संसाधनों पर इस फसल का दबाव नहीं रहता

जल संसाधनों पर इस फसल का दबाव नहीं रहता है। यही नहीं, इसमें कीटनाशकों वाला डर व खर्च नहीं रहता है।  वर्तमान केद्र सरकार श्री अन्न के रूप में इस फसल के साथ ही बाजरा के व्यंजन व प्रोडक्ट बनाने पर जोर दे रही है। सरकार जरूरत पड़ने पर मदद भी कर रही है। कई देशों में इसके प्रोडक्ट पारंपरिक व्यंजनों में शामिल किए जा रहे हैं। बाजरे का उपयोग बिस्कुट, ब्रेड और क्विक ब्रेड को कुरकुरा बनाने के लिए हो रहा है। यह भरपूर स्वाद बनाने वाला अनाज है। 

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