यूपी के 100 रेलवे, 100 बस स्टेशनों एवं पांच हवाई अड्डों पर बिकेंगे महिला उत्पाद

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए सरकार कृषि, सोलर एवं व्यापार में उनकी सेवाएं लेगी।
ड्रोन से खेतों में दवा छिड़केंगी समूह की महिलाएं, बनेंगी आत्मनिर्भर

खबर विस्तार : -

लखनऊः उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी ली। इस दौरान उनको संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उन्होंने धरातलीय आंकड़े मांगे हैं।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वयं सहायता समूह उत्पादों के वितरण एवं ब्रांडिंग के लिए विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर 543 प्रेरणा सरल स्टोर स्थापित किए गए। इनमें करीब तीन हजार से अधिक उत्पादों को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विपणन प्लेटफार्म से जोड़ा गया। यह उत्पाद बाजारों में नहीं मिलेंगे तो योजना का अर्थ बेकार जाएगा। इसलिए इन उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। इसीलिए उपमुख्यमंत्री ने योजनानुसार उत्पादों को बाजार पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा है। इससे महिलाओं को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सकेगा। उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

लखपति दीदी को मिलेंगी योजनाएं

 विकेंद्रीकृत ऊर्जा के क्षेत्र में महिला सहभागिता बढ़ाने के लिए कहा गया है। यह काम कई स्तर पर हो रहा है। लखपति दीदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रामीण स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उनकी आय बढ़ाने के लिए महिलाओं को सौर ऊर्जा आधारित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इस काम के अलावा महिलाओं के लिए ड्रोन दीदी योजना चलाई जा रही है। इसकी समीक्षा उप मुख्यमंत्री ने की है। 

ड्रोन सखियों का चयन किया गया

ड्रोन तकनीक से किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने, रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने में ड्रोन सखियां मदद करेंगी। इनके लिए प्रदेश में 75 जिलों में 11,81,660 हेक्टेयर क्षेत्रफल की व्यवस्था की है। प्रथम चरण में दीदीयों को 114 ड्रोन उपलब्ध करा दिए गए हैं। 43 जनपदों में 204 इकाइयां संचालित हैं। इनमें करीब 4,000 सदस्य कार्यरत हैं। दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन एवं मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी समूह की दीदियों को जोड़ा जाएगा। 03 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। 

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 75 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट काम आएगा 

मुख्यमंत्री महिला उत्पादन विपणन योजना के तहत एक पायलट प्रोजेक्ट योजना होगी। यह 75 जनपदों के 826 विकास खंडों में रेल, बस हवाई अड्डों पर दिखाई देगी। प्रदेश के 100 रेलवे एवं 100 बस स्टेशनों तथा 05 हवाई अड्डों पर इनको स्थापित किया जाना है। इनके जरिए महिलाओं को काम दिया जाना है। योजनानुसार तीन करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और 1 करोड़ लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य सरकार की ओर से अधिकारियों को दिया गया है। यह योजना 543 प्रेरणा सरल स्टोर और 3000 से अधिक उत्पादों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में काम आएगी।

खुद के स्वरोजगार में रहती है व्यस्तता 

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों मे कई तरह काम कर रही हैं। आजीविका और स्वरोजगार के विभिन्न कार्यों में यह सालभर व्यस्त रहती हैं। इनके काम की सीमाएं नहीं हैं, लेकिन सामान्य कार्य क्षेत्र हस्तशिल्प और पारंपरिक कला आदि हैं। राजधानी के आसपास जिलों में अमेठी में मूंज के उत्पाद टोकरी, बैग, सजावटी सामान पहचान बने हुए हैं।

पिछले दिनों कुछ जगहों पर हाथ से बनी राखियां व कलाकृतियां इनलोगों ने ही तैयार की थी। साफ-सफाई के उत्पाद में टॉयलेट क्लीनर, फ्लोर क्लीनर, हैंडवॉश और झाड़ू आदि बड़े पैमाने पर महिलाएं बना रही हैं। कुटीर उद्योग में भी सिलाई-कढ़ाई, अचार, पापड़ और अगरबत्ती बनाने में इनका योगदान रहा है। अब सरकार की ओर से कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में रोजगार दिया जा रहा है। 

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