काम से पहले शर्तें पूरी कराएगी सरकार, रोजगार की गारंटी में 125 दिन का वेतन

खबर सार :-

सरकार के बदल जाने के बाद केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं को लागू किया जा रहा है। धीमी पड़ी योजनाओं में रोजगार गारंटी, जैसे मनरेगा नाम बदलने के बाद उस पर फिर काम हो रहा है।
पश्चिम बंगालः प्रवासी मजदूर परिवारों की पहचान कर रोजगार कार्ड देगी सरकार

खबर विस्तार : -

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश देकर नई जिम्मेदारी थमा दी है। इसमें जिले के  डीएम को जिम्मेदारी दी गई है कि वह प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान करे। उनको ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (जीआरजीसी) दिए जाने हैं। 

हर वित्तीय वर्ष में 125 दिन की गारंटी

इन मजदूर परिवारों को सरकार की ओर से स्थानीय आधार पर काम दिया जाना है। इसके लिए कार्ड ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी केंद्र सरकार की ओर से तय की गई व्यवस्था में निहित है। इनको अकुशल शारीरिक काम करने के लिए कहा जा रहा है। इसका मतलब है कि यह खेती में काम करने वाले, मजदूरी वाले जैसे लोग हो सकते हैं। राज्य के पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में एक सर्कुलर जार किया था। यह सर्कुलर सभी जिलाधिकारियों को भेजा गया है। जिलाधिकारियों सेे कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान जल्द से जल्द पूरा करें।

यह भी पढ़ें :  स्वाद ही नहीं, सेहत का खजाना है इमली, पेट की बीमारियों की दवा है इमली

एक जुलाई से योजना लागू

राज्य के पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग के पास सम्यक रूप से यह काम जिलाधिकारियों के माध्यम से पूरा किया जाना है। वह इसमें अपने जिले के अधिकारियों की मदद ले सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में इस साल 1 जुलाई से योजना लागू है। इसे विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी-राम जी) एक्ट, 2025 के अंतर्गत रखा गया है। इस एक्ट के तहत, ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को काम दिया जाएगा। इसमें एक साल में ज्यादा से ज्यादा 125 दिनों के काम की गारंटी ली गई है। गांवों के लोग अन्य जिलों में काम करने के लिए जाते हैं। वह किसी विषेष काम में दक्ष नहीं होते। इसलिए यह काम मुख्य रूप से उन वयस्कों के लिए है जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं। 

गांव में नियमित आय के अवसर मिलेंगे 

इस संबंध में प्रशासन का कहना है कि रोजगार गारंटी का इस्तेमाल जरूरी है। इससे गांव के लोगों के लिए नियमित आय के अवसर मिलेंगे। योजना के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और प्रवासी मजदूरों के लिए अपने गृह राज्य लौटने के लिए आय की व्यवस्था देना है। यही कारण है कि प्रशासन के सामने कम समय में इसको पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पंचायत विभाग की गाइडलाइंस में प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को खास प्राथमिकता दी गई है। सरकार की ओर से भी कहा गया है कि योजना को पारदर्षी बनाना है। इसमें लापरवाही न करें। योजना को जिम्मेदारी से पूरा करना है। 

1.265 करोड़ रुपए मंजूर किए

एक आंकडे़ के अनुसार राज्य श्रम विभाग के अनुमान के मुताबिक, राज्य में अभी तक पहचाने गए प्रवासी मजदूरों की संख्या 22 लाख से ज्यादा मानी गई है। इस लिस्ट को संबंधित जिला प्रशासन तक पहले ही पहुंचाया जा चुका है। उसी जानकारी के आधार पर परिवारों की असल स्थिति की जांच की जा रही है। इस मामले में केंद्रीय मदद का भरोसा पहले ही मिल चुका था। राज्य के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी एक्ट स्कीम के तहत काम बढ़ाया है। इसमें लगभग 1.265 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। केद्र राज्य सरकार ने इसमें काफी मदद भी की है। 

औसत दिहाड़ी और पेमेंट के नियम बनाए

विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 में बदलाव किया गया है। हाल में ही 1 जुलाई से मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी एक्ट लागू कर दी गई। यह एक नई ग्रामीण रोजगार योजना है। ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन के बजाय 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की कानूनी गारंटी इस योजना के तहत मिलती है। जानकारी के अनुसार, देश में औसत दिहाड़ी ₹298.8 से बढ़ाकर ₹327.4 रोज दिए जा रहे हैं। साथ ही फर्जी जॉब कार्ड रोकने के उपाय भी इसमें हैं। गड़बड़ियों रोकने के लिए डिजिटल और बायोमेट्रिक व्यवस्था दी गई है। मेहनत का पैसा लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। 

राज्य सरकार की जिलाधिकारियों को सलाह

1. प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान करें 

2. उनके डेटा की जांच का मिलान होना चाहिए 

3. इस कार्य को मात्र एक रूटीन प्रक्रिया न समझें

यह भी पढ़ें : जम्मू-कश्मीर: सरकार दे रही उन्नतशील बीज, 80 साल का बुजुर्ग कर रहा फूलों की खेती

अन्य प्रमुख खबरें