नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से भारी तबाही, 157 लोगों के शव बरामद और सैकड़ों पर्यटक लापता
खबर सार :-
नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। अब तक 157 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि भारतीय नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों समेत लगभग 700 लोग लापता हैं।
खबर विस्तार : -
काठमांडू : नेपाल के उत्तरी हिस्से में स्थित रसुवा और उससे सटे इलाकों में बुधवार तड़के भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से आई भीषण बाढ़ में कम से कम 157 लोगों की मृत्यु हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद से कई स्थानीय निवासियों, सुरक्षाकर्मियों और विदेशी पर्यटकों समेत करीब 700 लोग संपर्क से बाहर हैं। रसुवा, चितवन और आसपास के तीन प्रमुख जिलों में बाढ़ के तेज बहाव ने बड़े पैमाने पर रिहाइशी मकानों, बुनियादी ढांचे और सड़कों को नुकसान पहुंचाया है। नेपाल पुलिस की ओर से सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी देर रात के आधिकारिक अपडेट में 157 मौतों की पुष्टि की गई है, जिसके बाद इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर जल आपदाओं में से एक माना जा रहा है।
आपदा के बाद चलाए गए शुरुआती खोज अभियानों के दौरान मृत व्यक्तियों के शव चीन से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर भारत की सीमा से लगे तराई के जिलों तक से बरामद किए गए हैं। शुरुआती चरण में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सीमा के समीप स्थित चितवन जिले की नारायणी नदी से सर्वाधिक 64 शव निकाले गए हैं। इसके अतिरिक्त गोरखा जिले से 19, धादिंग से 18, नुवाकोट से 11, तनहु से 9 और नवलपरासी जिले से 1 शव मिला है। आपदा के मुख्य केंद्र रसुवा जिले में भी बड़े पैमाने पर तबाही की खबर है, जहां से लगातार बहकर आए मलबे और पानी के कारण अन्य निचले इलाकों में भारी क्षति दर्ज की गई है।

सुरक्षाबल और विदेशी पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग लापता
विभिन्न जिला प्रशासन कार्यालयों द्वारा एकत्र की गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार, करीब 245 स्थानीय नागरिकों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। इस आपदा की चपेट में राहत और बचाव कार्यों में लगे सुरक्षाबल भी आए हैं। लापता लोगों में नेपाल पुलिस के 26 कर्मी, नेपाली सेना के 22 जवान और सशस्त्र प्रहरी बल के 13 जवान शामिल हैं, जिनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास लगातार जारी हैं। आपदा प्रबंधन इकाइयों के अनुसार जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि के कारण कई सुरक्षा चौकियों और शिविरों को भी नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय निवासियों के अलावा, बाढ़ प्रभावित दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण पर आए 384 पर्यटकों का भी कुछ अतापता नहीं है। नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन लापता पर्यटकों में 139 भारतीय नागरिक और 37 भारतीय मूल के गैर-आवासीय नागरिक (एनआरआई) शामिल हैं। ट्रैकिंग और पर्यटन मार्गों पर नेटवर्क बाधित होने और सड़कें टूट जाने के कारण इन यात्रियों से सीधा संपर्क स्थापित करने में बचावकर्मियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
राहत अभियान और घायलों का उपचार
आपदा के तुरंत बाद शुरू किए गए आपातकालीन अभियानों में अब तक 216 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दुर्गम इलाकों से 123 व्यक्तियों को हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया, जबकि 93 लोगों को पैदल मार्गों और स्थलीय साधनों के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया। बचाव दल लगातार जलजमाव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रयासरत हैं।
बाढ़ की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए 81 नागरिकों को विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। इनमें से अधिकांश घायलों का उपचार देश की राजधानी काठमांडू और उससे लगे पड़ोसी जिलों के मुख्य चिकित्सा केंद्रों में किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों के आसपास अलर्ट पर रखा गया है ताकि प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाएं समय पर मुहैया कराई जा सकें।
पुलों और राजमार्गों को भारी नुकसान
जल प्रलय के कारण देश का परिवहन और संपर्क ढांचा बहुत बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोटेकोशी और उसकी सहायक नदियों के उफान में 35 पक्के पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) पूरी तरह बह गए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई मुख्य बस्तियों को जोड़ने वाले पुलों के नष्ट हो जाने से दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है।
पुलों के अलावा बुनियादी यातायात प्रणाली को भी बड़ा झटका लगा है। लगभग 40 किलोमीटर लंबा राजमार्ग का हिस्सा बाढ़ के पानी, भूस्खलन और मलबे के कारण क्षतिग्रस्त हो चुका है। सड़कों के धंसने से राहत सामग्री ले जा रहे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और प्राथमिकता सबसे पहले फंसे हुए लोगों को निकालने और बुनियादी संपर्क बहाल करने की है।
भोटेकोशी नदी का बहाव बेहद तेज और संकरा
नेपाल का पहाड़ी और नदियों से घिरा भौगोलिक परिवेश मानसून के मौसम में अक्सर भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहता है। रसुवा और उससे सटे उत्तरी जिले चीन (तिब्बत) की सीमा से लगे हुए हैं, जहां से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का बहाव बेहद तेज और संकरा है। नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा या पहाड़ी झीलों के ओवरफ्लो होने से निचले इलाकों में इस तरह के हादसे पूर्व में भी देखे जाते रहे हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में स्थित नदियां अचानक जलस्तर बढ़ने पर संकीर्ण घाटियों के माध्यम से तेजी से बहती हैं, जिससे किनारे बसे गांवों और बस्तियों को संभलने का समय नहीं मिल पाता। इस बार भी जलस्तर में आई तीव्र वृद्धि के कारण तटीय इलाकों में बनी इमारतों, सड़कों और पुलों को संभलने का अवसर नहीं मिला। इससे पहले भी नेपाल में मानसून के दौरान नारायणी, भोटेकोशी और बागमती जैसी नदियों के उफान के कारण भारी जन-धन की हानि दर्ज की जा चुकी है, जिसके बाद सीमावर्ती भारतीय राज्यों (जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश) के निचले इलाकों में भी सतर्कता बरतनी पड़ती है।
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