एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव पर नैसकॉम की नजर, सभी प्रमुख पक्षों के साथ कर रहा संवाद
खबर सार :-
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के शीर्ष संगठन नैसकॉम अमेरिका में एच-1बी वीजा शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव पर नजर बनाए हुए है। नैसकॉम इस मामले पर सभी प्रमुख हितधारकों से सक्रिय रूप से संवाद बनाए हुए है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने अतिरिक्त शुल्क लगाया है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: अमेरिका में एच-1 वीजा शुल्क बढ़ाने पर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के शीर्ष संगठन नैसकॉम नजर बनाए हुए है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के शीर्ष संगठन नैसकॉम ने कहा कि अमेरिका में एच-1बी वीजा शुल्क में प्रस्तावित भारी बढ़ोतरी को इस कार्यक्रम के मूल उद्देश्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह कार्यक्रम उन क्षेत्रों में अस्थायी रूप से कुशल पेशेवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, जहां अमेरिका में कौशल की कमी होती है। नैसकॉम ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सभी प्रमुख हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से संवाद बनाए हुए है और स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
शुल्क वृद्धि का उद्देश्य इमीग्रेशन सिस्टम की लागत की भरपाई करना है
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित नए नियम के तहत एच-1बी वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। यह अभी एक प्रस्तावित नियम है, जिस पर आम जनता और संबंधित पक्षों को अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस शुल्क का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली (इमीग्रेशन सिस्टम) की लागत की भरपाई करना और कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिकी नागरिकों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है।
नागरिकों की भर्ती का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है एच-1बी वीजा कार्यक्रम
नैसकॉम ने अपने बयान में कहा कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका में अल्पकालिक कौशल कमी को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 5 वर्षों में अमेरिकी बाजार में कार्यरत भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के एच-1बी कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, क्योंकि कंपनियों ने स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। उद्योग संगठन के अनुसार, भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां अमेरिका में स्थानीय कौशल विकास को भी समर्थन दे रही हैं। इस क्षेत्र ने अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा को मजबूत करने के लिए 1.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसके तहत 130 से अधिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ साझेदारी की गई है, जिससे लगभग 29 लाख छात्रों को लाभ पहुंचा है और 2.55 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया है।
कुशल पेशेवरों की भर्ती करने वाली कंपनियों की लागत में हो सकती है भारी वृद्धि
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा व्यवस्था के तहत आने वाली याचिकाओं पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह लागू होता है, तो भारत सहित अन्य देशों के कुशल पेशेवरों की भर्ती करने वाली कंपनियों की लागत में भारी वृद्धि हो सकती है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार, यह शुल्क एच-1बी वीजा की वार्षिक सीमा के अंतर्गत आने वाली प्रत्येक याचिका पर लागू होगा। इसमें वे आवेदक भी शामिल होंगे जो अमेरिकी संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए उपलब्ध विशेष श्रेणी के तहत पात्र हैं। यह शुल्क अन्य सभी मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लिया जाएगा।
प्रस्ताव से प्रतिवर्ष होगी 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय
विभाग का अनुमान है कि इस प्रस्ताव से प्रतिवर्ष लगभग 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है। यह अनुमान हर वर्ष दायर होने वाली लगभग 85,000 एच-1बी याचिकाओं के आधार पर लगाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस राशि का उपयोग कानूनी आव्रजन प्रणाली के संचालन, लाभ आवेदन निपटान, धोखाधड़ी की पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा जांच, सरकारी प्रणालियों के आधुनिकीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसी गतिविधियों पर होने वाले खर्चों की भरपाई के लिए किया जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत अमेरिका हर वर्ष 65,000 एच-1बी वीजा जारी करता है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी विश्वविद्यालयों से परास्नातक या उससे उच्च डिग्री प्राप्त करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा उपलब्ध कराए जाते हैं।
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