यूरोप में भीषण गर्मी का कहर! हीटवेव ने तोड़े पिछले रिकाॅर्ड, 35 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान
खबर सार :-
यूरोप में इस साल हीटवेव से लगभग 35 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: इस साल यूरोप में लगातार चार बार रिकॉर्ड तोड़ने वाली हीटवेव (लू) के कारण लगभग 35,000 अतिरिक्त मौतें हुई हैं। यह आंकड़ा अभी पूरा नहीं है, और अगस्त का डेटा शामिल होने के बाद मरने वालों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
इस साल मई से ही पूरे यूरोप में लगातार रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया जा रहा है। शुरुआती राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, अकेले जर्मनी, फ्रांस और स्पेन में 25,000 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। जर्मनी की पब्लिक हेल्थ एजेंसी, रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट (RKI) के डेटा से पता चलता है कि अप्रैल और अगस्त के बीच गर्मी से जुड़ी अनुमानित 14,000 मौतें हुईं, जो देश में अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। 22 से 28 जून के एक ही हफ्ते में लगभग 9,600 मौतें दर्ज की गईं।
स्पेन में गर्मी ने तोड़े पिछले रिकाॅर्ड
स्पेन में कई जगहों पर तापमान 42°C से ज्यादा हो गया। कार्लोस III हेल्थ इंस्टीट्यूट के मॉर्टैलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम के अनुसार, मई और अगस्त के बीच देश में गर्मी से जुड़ी अनुमानित 4,947 मौतें हुईं। यह देश के इतिहास में गर्मी का सबसे जानलेवा मौसम रहा, जिसने 2022 में दर्ज 4,520 मौतों के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया। फ्रांस में जुलाई के अंत तक लगभग 7,300 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।
यूरोप में हीटवेव से गई कई जानें
जर्मनी में जून के आखिर में लगातार तीन दिनों तक तापमान के रिकॉर्ड टूटे, और 46 मौसम केंद्रों पर तापमान 40°C से ऊपर चला गया। एक रिपोर्ट से पता चलता है कि गर्मी का असर यूरोप के अन्य देशों में भी महसूस किया गया। बेल्जियम में 18 से 29 जून के बीच सामान्य से 1,222 ज्यादा मौतें दर्ज की गईं, जबकि नीदरलैंड में 22 जून से 5 जुलाई के बीच कम से कम 900 अतिरिक्त मौतें हुईं। अनुमान है कि पोलैंड में जून के अंत में हीटवेव के दौरान लगभग 1,070 अतिरिक्त मौतें हुईं। स्विट्जरलैंड में भी इसी अवधि के दौरान लगभग 220 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।
गर्मी बढ़ा सकती है कई बीमारियां
विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी का असर सिर्फ हीटस्ट्रोक (लू लगने) से होने वाली मौतों तक ही सीमित नहीं है। तेज गर्मी पहले से मौजूद दिल और सांस की बीमारियों को और गंभीर बना सकती है, जिससे मौत का खतरा बढ़ जाता है। नतीजतन, गर्मी से जुड़ी मौतों का सही आंकड़ा अक्सर आधिकारिक डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) में सीधे तौर पर नहीं दिखता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मई में बताया कि पिछले दो दशकों में यूरोप में गर्मी से होने वाली मौतों में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। जलवायु परिवर्तन और यूरोप की बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण आने वाले सालों में इस समस्या के और गंभीर होने की आशंका है।
FAQ
1. यूरोप के कौन से देश हीटवेव का सामना कर रहे हैं?
फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और ब्रिटेन सहित कई देश भीषण लू और रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी की चपेट में हैं।
2. यूरोप में गर्मी बढ़ने के क्या कारण हैं?
एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है; यहां तापमान बढ़ने की दर वैश्विक औसत दर से लगभग दोगुनी है। ऐसा जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है।
3. यूरोप में हीटवेव पर डब्ल्यूएचओ की क्या रिपोर्ट है?
मई में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जानकारी दी कि दो दशकों में यूरोप में हीटवेव से होने वाली मौतों में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
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