बांग्लादेश : कर्नल ओली अहमद 11 दलों के गठबंधन से हैं उम्मीदवार
खबर सार :-
ढाका, 35 वर्षों में पहली बार बांग्लादेश में राष्ट्रपति के लिए मुकाबला हो रहा है। इस चुनाव में आज कुल 349 सांसद मतदान करने वाले हैं।
खबर विस्तार : -
ढाकाः बांग्लादेश की संसद के सदस्य आज 23वां राष्ट्रपति चुनेंगे। यहां पर 35 सालों बाद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे हैं। इस चुनाव में 349 सांसद मतदान करेंगे। संसद भवन में 2 बजे से मतदान शुरू होंगे और 5 बजे तक मतदान किया जाएगा। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनल पार्टी बीएनपी के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलीमगीर का मुकाबला बांग्लादेश जमात ए इस्लामी का नेतृत्व कर रहे 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल ओली अहमद से होगा।
35 साल बाद हो रहे चुनाव में ऊहापोह
राष्ट्रपति चुनाव के लिए बांग्लादेश में चहल कदमी मची हुई है। यहां पर 35 साल बाद हो रहे चुनाव को लेकर बड़ी ऊहापोह की स्थिति मची हुई है। ढाका ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट के अनुसार 8 अक्टूबर 1991 के बाद यहां पर राष्ट्रपति का चुनाव ऐसा पहली बार हो रहा हैख् जिसमें एक से अधिक उम्मीदवार हैं। 1991 में हुए तत्कालीन चुनाव में बीएनपी उम्मीदवार अब्दुल रहमान विश्वास ने अवामी लीग के जस्टिस बदरुल हैदर चौधरी को हराया था। बड़े आश्चर्य की बात यह है कि तब से यहां पर चुनाव नहीं कराए गए हैं।
पोर्ट की बातें यदि सही हैं तो संसद में 350 सदस्य हैं। इसमें 300 सामान्य सीट और महिलाओं के लिए 50 आरक्षित हैं। चार सीट खाली बताई गई हैं, इसलिए 349 सांसद मतदान करेंगे। यहां पर एक परंपरा बन गई थी। 1991 के बाद से संसदीय प्रणाली के तहत राष्ट्रपति चुनाव निर्विरोध होते रहे हैं। अभी तक माना जा रहा है कि बीएनपी के पास स्पष्ट बहुमत है, रिजल्ट के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। फैसला कभी भी बदल सकता है। जिस तरह से चर्चाएं चल रही हैं, मिर्जा फखरुल की जीत की संभावना ज्यादा है।
देश के संविधान में अनुच्छेद 70 महत्वपूर्ण
यहां बांग्लादेश के संविधान में अनुच्छेद 70 मी महत्वपूर्ण अधिकार है। इसमें बताया गया है कि संसद के रूप में चुना गया व्यक्ति यदि किसी भी चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ वोट करता है तो उसकी संसद की सदस्यता चली जाएगी। इसमें किसी प्रकार की हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं रह जाती है। इससे भी बड़ी बात है कि यहां के संविधान में धारा 70 में मतदान की व्यवस्था संसद के मुख्य कच्छ में जब होगी तो सांसद ेको कक्ष के अंदर वैलेट बॉक्स में अपना वोट डालने से पहले यह बताना होगा कि उसकी पसंद क्या है। इस दुविधा से बचने के लिए और रिस्क उठाने से बेहतर यही मानते हैं कि संसद अपनी पार्टी को ही वोट करें। बहुमत यदि किसी सामने वाली पार्टी का है तो फिर चुनाव के परिणाम बदल सकते हैं। यहां शाम 5 बजे मतदान संपन्न हो जाएंगे और इसके तुरंत बाद ही गणना भी शुरू कर दी जाएगी।
आज ही चुनाव का फैसला भी आ जाएगा
उम्मीद यही की जा रही है कि आज ही इस चुनाव का फैसला भी आ जाएगा। इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त घोषणा करते हैं कि नतीजे में कौन सी पार्टी विजई हुई है। मतदान के दौरान जो प्रक्रियाएं चलती रहेंगीं उनका लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। चुनाव की पूर्व संध्या पर बीएनपी सांसद दल ने बैठक की थी। कहा गया कि इस चुनाव को देश के लिए बेहद बेहतर माना जा रहा है, क्योंकि कई वर्षों बाद यहां पर ऐसे चुनाव होने जा रहे हैं जिसमें आमने-सामने प्रत्याशी होंगे। बैठक संसद भवन में ही की गई थी। इसमें नूरल इस्लाम मोनी ने कहा कि यह चुनाव बांग्लादेश की लोकतांत्रिक यात्रा है।
1986 में हुसैन मोहम्मद इरशाद को चुना
उम्मीदवार मिर्जा फखरुल भी इस बैठक में शामिल थे। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री और सदन के नेता तारिक रहमान ने की। दुनिया की संवैधानिक प्रक्रिया में बांग्लादेश थोड़ा भिन्न है, क्योंकि यहां पर आजादी के बाद से राष्ट्रपति चुनाव के लिए कई बार व्यवस्थाएं बदली हैं। 1974 में जब यहां पर चुनाव हुए थे, तब संसद के स्पीकर मोहम्मद उल्लाह को राष्ट्रपति चुना गया था। 1978 1981, 1986 में बांग्लादेश की जनता को राष्ट्रपति चुनाव के लिए सीधे वोट देने का अधिकार मिला। 1978 में जब चुनाव हुए थे तो यहां जिया उर रहमान और 1981 में जस्टिस अब्दुस सत्तार एवं 1986 में हुए चुनाव में राष्ट्रपति के रूप में हुसैन मोहम्मद इरशाद को चुना गया।
2024 के दौरान से बांग्लादेश में अस्थिरता
वर्तमान में जो चुनाव हो रहे हैं, यह बांग्लादेश ही नहीं पड़ोसी राज्यों के लिए भी अहम है। 2024 के दौरान से बांग्लादेश में बड़ी अस्थिरता बनी हुई है। पड़ोसी राज्यों के संबंध बेहतर नहीं बन सके हैं। इसलिए यहां पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के चुनाव बड़े हम हो जाते हैं। इन्हीं से तय होगा कि पड़ोसी देशों के संबंध बेहतर होंगे या नहीं। इसमें भारत और चीन दो बेहद गरीबी देश हैं। यदि दो सालों की छोड़ दें तो भारत के संबंध पहले भी बेहतर रहे हैं, क्योंकि बांग्लादेश बनने में भारत ने बहुत मदद की थी। यदि भारत से संबंध बेहतर बनाने की कोशिश होती है तो यह बंगला देश के विकास के साथ भारत के लिए भी अच्छा होगा।
यह भी पढ़ें : बांग्लादेश से रिश्ते बनेंगे बेहतर, शेख हसीना मुद्दे पर सावधानी बरतें: जेएनयू प्रोफेसर
अन्य प्रमुख खबरें
-
ईरान में ईंधन टैंकर में धमाका, हादसे में 11 लोगों की मौत, सात लोग घायल
2026-09-06
-
पाकिस्तान की कलंक कथा: हर सोलह में एक बच्चा घुटन में!
2026-09-05
-
नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 1,252 के पार, हजारों अब भी लापता
2026-09-04
-
नेपाली सुरंग से 9 दिन बाद निकाले दो लोग, अंदर से आ रही थी आवाज
2026-09-04
-
यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप का दावा, युद्ध जल्द होगा समाप्त
2026-09-04
-
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बर्ड फ्लू का मिला खतरनाक एच5एन1 स्ट्रेन
2026-09-04
-
'ISRO की शानदार उपलब्धि, भारत के गर्व के पल, GSLV-F17 की सफल लॉन्चिंग
2026-09-04
-
हूती विद्रोहियों का हमला, संघर्ष में 15 सैनिक-10 हूती लड़ाके मारे गए
2026-09-04
-
बेल्जियम बना भारत का साथिया, प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर पहुंचे नई दिल्ली
2026-09-03
-
आतंकवाद पर बेनकाब पाक, पीएम मोदी की एडिट फोटो किया पोस्ट
2026-09-02
-
ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने दिया इस्तीफा
2026-09-01
-
नेपाल त्रासदी: परिजनों को देने से पहले शवों का होगा डीएनए-पोस्टमॉर्टम
2026-09-01
-
ट्रंप ने किया फेडरल रिजर्व के ब्याज में वृद्धि की संभावना का विरोध
2026-09-01
-
Iran US War: ईरान ने जॉर्डन से UAE तक अमेरिकी ठिकानों पर दागी मिसाइलें
2026-08-31
-
भारत-उज्बेकिस्तान यूरेनियम समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक: भाजपा
2026-08-31