पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौतियों में नया मोड़, TTP के समर्थन में सक्रिय हुआ AQIS, कई मोर्चों पर बढ़ी मुश्किल
खबर सार :-
पाकिस्तान में अल-कायदा इन द सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS की सक्रियता से सुरक्षा चुनौतियां बढ़ने का दावा किया जा रहा है। TTP, BLA और BLF पहले से पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए चुनौती बने हुए हैं।
खबर विस्तार : -
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सुरक्षा परिदृश्य में अल-कायदा इन द सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की कथित सक्रियता ने एक नया आयाम जोड़ दिया है। पाकिस्तान पहले से ही तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे सशस्त्र संगठनों की गतिविधियों से जूझ रहा है। ऐसे में AQIS का TTP के समर्थन में खुलकर सामने आना पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए एक अतिरिक्त चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के बीच लंबे समय से वैचारिक और रणनीतिक संघर्ष रहा है। अब इस टकराव का असर अफगानिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान में भी दिखाई देने की बात सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, AQIS पहले पाकिस्तान और अफगानिस्तान में प्रत्यक्ष अभियानों से दूरी बनाए हुए था और मुख्य रूप से डिजिटल प्रचार तथा संगठन के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहा था।
TTP के समर्थन में AQIS की सक्रियता
सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में AQIS के कई सदस्य मौजूद हैं। अमेरिका की कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान से बाहर निकाले गए संगठन के कई सदस्य पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए थे। पिछले कुछ वर्षों में संगठन का प्रमुख फोकस डिजिटल प्रचार और नए सदस्यों की भर्ती पर रहा। अब परिस्थितियों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से TTP और BLA के खिलाफ ISKP का इस्तेमाल किए जाने की कोशिश के बाद AQIS ने भी संघर्ष में अधिक प्रत्यक्ष भूमिका अपनाने का फैसला किया। एक अधिकारी के मुताबिक, लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहने के बाद AQIS ने पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान को चुनौती देने के लिए अपने रुख को अधिक सक्रिय किया है। हालांकि संगठन की वास्तविक परिचालन क्षमता और पाकिस्तान में उसके नेटवर्क की स्थिति को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आते रहे हैं।
अल-सहाब के जरिए प्रचार
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, AQIS अपनी प्रचार सामग्री और संदेश अपने मीडिया विंग अल-सहाब मीडिया फाउंडेशन के जरिए जारी करता है। हाल के दिनों में इस माध्यम से पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान के खिलाफ TTP की गतिविधियों के समर्थन की बात सामने आई है। अधिकारी के मुताबिक, AQIS से जुड़े संदेशों में संगठन के सदस्यों और समर्थकों से TTP के साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि AQIS अपनी पारंपरिक प्रचार गतिविधियों से आगे बढ़कर पाकिस्तान के संघर्ष में प्रत्यक्ष भूमिका तलाश रहा है। हालांकि ऐसे प्रचार संदेशों में किए गए दावों और आह्वानों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना अलग चुनौती है। आतंकवादी संगठनों के मीडिया प्लेटफॉर्म अक्सर अपनी गतिविधियों और प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं।
TTP, BLA और BLF से पहले ही चुनौती
पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कई मोर्चों पर दबाव में है। TTP लंबे समय से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले करता रहा है। इसके अलावा बलूचिस्तान में BLA और BLF की गतिविधियां भी पाकिस्तान के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बनी हुई हैं। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इन संगठनों की गतिविधियों के कारण पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान को लगातार संसाधन और सुरक्षा बल अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात करने पड़ रहे हैं। TTP का मुख्य प्रभाव पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर हिस्सों में देखा जाता है, जबकि BLA और BLF की गतिविधियां मुख्य रूप से बलूचिस्तान से जुड़ी रही हैं। इस बहुस्तरीय चुनौती के बीच AQIS की संभावित सक्रियता सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना सकती है। खासतौर पर तब, जब अलग-अलग आतंकी संगठनों के बीच सहयोग या वैचारिक समर्थन की संभावनाएं बढ़ती हैं।
BLA और BLF के महिला दस्तों का भी उल्लेख
अधिकारी ने बलूचिस्तान में सक्रिय संगठनों की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि BLF ने हाल में दावा किया कि उसके महिला दस्ते ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ पहला हमला किया। BLA का भी महिला विंग होने की बात कही जाती है। सुरक्षा आकलनों में इन महिला इकाइयों को लेकर भी चिंता जताई गई है। हालांकि किसी संगठन द्वारा किए गए हमले के दावे और उसकी वास्तविक भूमिका की पुष्टि के लिए स्वतंत्र स्रोतों से जांच आवश्यक होती है।
ISKP को लेकर भी बढ़ी जटिलता
पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति को लेकर एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, TTP और BLA से उत्पन्न चुनौतियों के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने कथित तौर पर ISKP और अन्य संगठनों को अपने हितों के अनुरूप इस्तेमाल करने की कोशिश की। ऐसे आरोपों से पाकिस्तान की सुरक्षा नीति को लेकर एक व्यापक बहस भी जुड़ती है। यदि अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों को किसी दूसरे संगठन के खिलाफ इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई जाती है, तो इससे अल्पकालिक सुरक्षा लाभ के साथ-साथ दीर्घकालिक जोखिम भी पैदा होने की आशंका रहती है। AQIS की TTP के समर्थन में कथित सक्रियता इसी जटिल स्थिति का नया हिस्सा है। एक तरफ पाकिस्तान को TTP, BLA और BLF जैसी अलग-अलग चुनौतियों से निपटना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ISKP और AQIS जैसे संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा और गठजोड़ की बदलती तस्वीर सुरक्षा समीकरण को और कठिन बना रही है।
कई संगठनों की मौजूदगी से बढ़ी चुनौती
पाकिस्तान में मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को देखें तो अलग-अलग क्षेत्रों और अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े सशस्त्र संगठन सक्रिय हैं। TTP का पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ संघर्ष, बलूचिस्तान में BLA और BLF की गतिविधियां तथा ISKP और AQIS के बीच प्रतिद्वंद्विता इस पूरे समीकरण को जटिल बनाती है। AQIS की कथित नई सक्रियता से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संगठन आने वाले समय में केवल प्रचार और भर्ती तक सीमित रहेगा या पाकिस्तान में प्रत्यक्ष अभियान की दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल उपलब्ध दावों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि TTP के समर्थन में AQIS की गतिविधियों की चर्चा ने पाकिस्तान के पहले से चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिदृश्य में एक नया तत्व जोड़ दिया है।
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