यूरोप के लिए चुनौती बनी जंगल की आग, सदी के अंत तक तीन गुना बढ़ सकता है दायरा; स्टडी में दावा
खबर सार :-
यूरोप के कई देशों के जंगल आग में झुलस रहे हैं। एक स्टडी में दावा किया गया है कि सदी के अंत तक यूरोप में जंगल की आग से जलने वाले इलाके में लगभग 39% की बढ़ोतरी हो सकती है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: कई यूरोपीय देश अभी जंगल की आग (wildfires) से जूझ रहे हैं। गुरुवार को प्रकाशित एक स्टडी में चेतावनी दी गई है कि आने वाले दशकों में यूरोप के जंगलों में आग का खतरा काफी बढ़ सकता है। एक स्टडी के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने की सबसे अच्छी स्थिति में भी, सदी के अंत तक आग की चपेट में आने वाले यूरोपीय जंगल का दायरा लगभग 39 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित यह स्टडी बताती है कि अगर वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को लगभग 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित भी रखा जाए, तब भी लंबे समय तक गर्म और शुष्क मौसम के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाएगा। तापमान बढ़ने से मिट्टी और पेड़-पौधों में नमी कम हो जाएगी, जबकि तेज हवाएं आग के फैलने की रफ्तार को बढ़ा देंगी।
तीन गुना ज्यादा बढ़ सकती है आग
सबसे खराब स्थिति में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। अगर सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 3.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होती है, तो यूरोप में जंगल की आग से जलने वाले इलाके का दायरा मौजूदा स्तर की तुलना में तीन गुना हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा जलवायु नीतियों के आधार पर, दुनिया लगभग 2.6 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की ओर बढ़ रही है। नतीजतन, जंगल की आग का बढ़ता खतरा यूरोप के लिए केवल भविष्य की चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक तत्काल चुनौती बन गया है।
प्रभावी अग्निशमन प्रणालियों से कम किया जा सकता है नुकसान
स्टडी के मुख्य लेखक और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के शोधकर्ता माइक बिलिंग ने कहा कि बेहतर वन प्रबंधन और प्रभावी अग्निशमन प्रणालियों से आग से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्बन उत्सर्जन के उच्च स्तर के बीच केवल अग्निशमन क्षमताओं को बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। स्टडी में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि दशकों से जंगल की आग को पूरी तरह से रोकने की नीतियों के कारण सूखी वनस्पति और आग पकड़ने वाली अन्य चीजें जमा हो गई हैं। नतीजतन, अब आग की छोटी-मोटी घटनाएं भी विशाल और बेहद विनाशकारी "मेगा-फायर" का रूप ले सकती हैं।
छह लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि आग की चपेट में
यूरोप इस साल पहले ही इस खतरे का सामना कर रहा है; 2026 के फायर सीजन के दौरान, पूरे यूरोपीय संघ में 6,00,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि जंगल की आग से प्रभावित हो चुकी है। ग्रीस, स्पेन, फ्रांस और क्रोएशिया सहित कई देशों में जंगल की आग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए दो मोर्चों पर एक साथ काम करने की जरूरत है: जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करना और वन प्रबंधन में सुधार करना। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के साथ-साथ, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को लागू करना, सूखी वनस्पति का प्रबंधन करना और अग्निशमन क्षमताओं को बढ़ाना भी जरूरी होगा।
FAQ
1. यूरोप के जंगलों में आग फैलने के क्या कारण हैं?
यूरोप में जंगल की आग के मुख्य कारण अत्यधिक गर्मी (हीटवेव), भीषण सूखा, जलवायु परिवर्तन और तेज हवाएं हैं।
2. किन-किन देशों के जंगलों में आग लगी है?
जबरदस्त गर्मी और सूखे की वजह से यूरोप और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में जंगल की आग तेजी से फैल रही है। बेल्जियम, स्पेन, फ्रांस, ग्रीस, तुर्की और जर्मनी के जंगलों पर इस आग का असर सबसे ज्यादा है।
3. यूरोपीय जंगलों की आग पर की गई स्टडी की मुख्य बातें क्या हैं?
ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, सदी के अंत तक आग की चपेट में आने वाले यूरोपीय जंगल का दायरा लगभग 39 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
4. आग रोकने के प्रयासों के बारे में क्या कहा गया?
शोधकर्ता माइक बिलिंग के अनुसार, बेहतर वन प्रबंधन और प्रभावी अग्निशमन प्रणालियों से आग से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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