ईरान के करीब मंडराने लगे अमेरिकी ड्रोन, ट्रंप ने दी जोरदार हमले की धमकी

खबर सार :-

अब अमेरिका ईरान के आणविक, सैन्य ठिकानों, ऊर्जा एवं तेल से संबंधित ठिकानों को ही चुन-चुनकर टारगेट कर सकता है। अब तनाव बढ़ने से कई देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
ईरान से हमले का बदला लेंगे ट्रंप, चुन-चुन कर करेंगे प्रहार

खबर विस्तार : -

वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति इन दिनों बेहद गुस्से में हैं। इसका कारण है कि ईरान ने उनकी अहमियत नहीं समझी है। वह यही तो बताना चाह रहे हैं, उनका कहना है कि जो बात अमेरिकी राष्ट्रपति कह दें, उसे पूरी तरह ईरान मान ले। ईरानी हमलों का जवाब देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा भी किया है।

ईरान ने किए कई ताबड़तोड़ प्रहार

17 जून को हुए संघर्ष विराम के बाद ईरान ने ताबड़तोड़ प्रहार किए है। इन प्रहरों में केवल अमेरिकी सैनिक ठिकाने रहे हैं, जो उनके मित्र राष्ट्रों में बनाए गए हैं। ईरानी हमलों में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है और यह जॉर्डन, बहरीन, कतर और कुवैत को निशाना साधकर किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने सैनिकों को इन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल करके ईरान पर दबाव बनाने केे लिए हमले करवाते थे।

बड़ी मात्रा में चीन भी ईरान से लेता है तेल  

 जुलाई महीने में एक बार फिर तनाव बढ़ गया और इसमें कई रातें बारूदी आवाज में कांप उठीं। इस बार अमेरिका चाहता है कि ईरान पर सबसे बड़ा दबाव आर्थिक हमले कर बनाया जाए और इसीलिए वह उन देशों की तरफ नजर दिख रहे हैं जो ईरान से तेल खरीदते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले ही ईरान से तेल ना खरीदने का दबाव बनाया था। चीन की तरफ भी ट्रंप के अधिकारियों की नजरे हैं, क्योंकि बड़ी मात्रा में वहां भी तेल पहुंचता है। 

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अमेरिका ने कहा कि ईरान है नाकाम देश

अमेरिका ने एक आरोप चीन पर लगाया है, उसका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में पैसे का लेनदेन ऑनलाइन तरीके से किया जा रहा है। इससे चीन ईरान को पैसे भेजता है। इसलिए चीन पर दबाव बनाना जरूरी हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि ईरान को आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों और खासतौर पर चीन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अमेरिका ने कहा है कि ईरान नाकाम देश है। हमारे लिए कुछ भी नहीं है। ईरान से लड़ाई हमारे लिए बहुत छोटी लड़ाई है। 

न्यूक्लियर प्रोग्राम की इच्छा छोड़े ईरान

मंगलवार को तेल मसले पर ट्रंप की एक बैठक भी होने जा रही है। इस बैठक में तेल डिस्ट्रीब्यूटर्स शामिल किए जाएंगे। अमेरिका के छोटे डिस्ट्रीब्यूटर भी बैठक में भाग लेंगे। अमेरिका के मेजर जनरल ब्रैंडन टेगटमेयर और कमांड सार्जेंट मेजर जेम्स ब्रैडशॉ ने कहा है कि ट्रंप मंगलवार को तेल रिफाइनर और डिस्ट्रीब्यूटर से मिलेंगे। बैठक में आंतरिक सचिव डग बर्गम और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट भी शामिल होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है जलडमरूर मध्य पर उनका पूरा नियंत्रण है। वह कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि ईरान कम से कम जलडमरूमध्य को खुला रखें। साथ ही न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में भी सोचना बंद करें। उनकी यह इच्छा कभी भी पूरी नहीं होगी।

दोनों देशों ने कई बार समझौते में दी दरार

 अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ टकराव को अमेरिका के लिए काफी छोटी लड़ाई बताया। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं। अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इसी के जरिए वह अमेरिका से बातचीत करने के लिए टेबल पर आएगा। ईरानी हमलों का जवाब देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा भी किया है।

जॉर्डन में अमेरिकी कर्मियों पर ईरानी हमलों को लेकर ही तनाव बढ़ गया है। इसीलिए अमेरिका ने 30 अगस्त को लराक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चरों को निशाना बनाया था। आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम लागू हुआ था। यह आरंभिक समझौता था। इसके बाद से ऐसी कई बार नौबत आई है कि दोनों ओर से शर्तें तोड़े जाने के आरोप लगाकर तनाव बढ़ा। 

कई देशों पर पड़ सकता है आर्थिक प्रभाव

अमेरिका ने कई बार ईरान पर हमले किए हैं। इनमें 25 मई, 27 मई, 30 मई, 31 मई, 2 जून, 5 जून, 9 जून, 10 जून, 26 जून, 27 जून, 7 जुलाई, 8 जुलाई, 11 से 23 जुलाई और 30 को भी हमले किए गए। करीब बीस वित्तमंत्रियों के साथ नॉर्थ कैरोलिना में एक बैठक की गई, इस दौरान बेसेंट ने कहा कि ऐसे हालात बनाना है कि वे खुद बातचीत की मेज पर आना चाहें। बहरहाल, अब तनाव बढ़ने से कई देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है। 

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